महंगाई के खिलाफ शिवसागर में आसू का हल्लाबोल, आपूर्ति विभाग की निकाली प्रतीकात्मक ‘शवयात्रा’ : खाद्य पदार्थों और आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के खिलाफ राज्यव्यापी आंदोलन तेज, कीमतों में तत्काल कमी की मांग : आसू का आरोप—‘सफेद हाथी’ बन चुका आपूर्ति विभाग, महंगाई नियंत्रित करने में सरकार और विभाग विफल
शहीद उद्यान से शांतिवन मुक्तद्वार श्मशान घाट तक निकली शवयात्रा; पुलिस ने प्रवेश से रोका तो बाहर जमकर हुई नारेबाजी

शिवसागर, 3 सितंबर : खाद्य पदार्थों समेत रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों के खिलाफ ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) ने अपना आंदोलन तेज कर दिया है। राज्यव्यापी विरोध कार्यक्रम की कड़ी में गुरुवार को शिवसागर में जिला छात्र संघ ने खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के खिलाफ अनोखे अंदाज में विरोध दर्ज कराते हुए विभाग की प्रतीकात्मक ‘शवयात्रा’ निकाली। प्रदर्शनकारियों ने महंगाई पर तत्काल अंकुश लगाने, बाजार की प्रभावी निगरानी करने और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में कमी लाकर आम जनता को राहत देने की मांग की।
आसू कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि लगातार बढ़ती महंगाई पर नियंत्रण लगाने में संबंधित विभाग और सरकार प्रभावी भूमिका नहीं निभा पा रहे हैं। संगठन ने आपूर्ति विभाग को कथित रूप से ‘सफेद हाथी’ करार देते हुए उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

शहीद उद्यान से शुरू हुई प्रतीकात्मक शवयात्रा
शिवसागर में विरोध कार्यक्रम का नेतृत्व शिवसागर आंचलिक छात्र संघ के अध्यक्ष मानस प्रतीम बरुवा, सचिव मंजीत हजारिका, शिवसागर जिला छात्र संघ के उपाध्यक्ष पार्थ प्रतीम बरुवा और सहायक सचिव जीपम बोरा ने किया।
प्रतीकात्मक शवयात्रा शहर के बोर्डिंग रोड स्थित जिला आसू के मुख्य कार्यालय शहीद उद्यान से शुरू हुई। छात्र कार्यकर्ता प्रतीकात्मक शव लेकर शहर के विभिन्न हिस्सों से होते हुए थाना घाट स्थित शांतिवन मुक्तद्वार श्मशान घाट तक पहुंचे।
इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने महंगाई के खिलाफ नारे लगाते हुए आवश्यक वस्तुओं की कीमतें कम करने, बाजार में प्रभावी मूल्य नियंत्रण सुनिश्चित करने और आपूर्ति विभाग को सक्रिय एवं जवाबदेह बनाने की मांग की।

पुलिस ने श्मशान में प्रवेश से रोका, बाहर ही प्रदर्शन
शांतिवन मुक्तद्वार श्मशान घाट पहुंचने पर वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारी छात्रों को प्रतीकात्मक शव के साथ श्मशान परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया। इसके बाद आसू कार्यकर्ता श्मशान घाट के बाहर ही रुक गए और सरकार तथा संबंधित विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
छात्र नेताओं का कहना था कि प्रतीकात्मक शवयात्रा निकालने का उद्देश्य बढ़ती महंगाई और उससे आम लोगों को हो रही परेशानी की ओर सरकार एवं संबंधित विभाग का ध्यान आकर्षित करना है।

आसू का आरोप—‘सफेद हाथी’ बनकर रह गया आपूर्ति विभाग
प्रदर्शनकारी छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने में विफल रहा है और कथित रूप से ‘सफेद हाथी’ बनकर रह गया है।
आसू के मुताबिक खाद्य सामग्री और रोजमर्रा की अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों में लगातार वृद्धि से सामान्य परिवारों का घरेलू बजट प्रभावित हो रहा है। संगठन ने बाजारों की प्रभावी निगरानी, अनुचित एवं कृत्रिम मूल्यवृद्धि पर अंकुश और उपभोक्ताओं को तत्काल राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।

जिले भर में निकली मंत्री कौशिक राय की प्रतीकात्मक शवयात्रा
महंगाई के खिलाफ आसू का विरोध शिवसागर शहर तक सीमित नहीं रहा। गुरुवार को राज्य के अन्य हिस्सों के साथ ही शिवसागर जिले की आसू की प्रत्येक आंचलिक इकाइयों ने विरोध कार्यक्रम आयोजित किए। छात्र संगठन की इकाइयों ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री कौशिक राय की प्रतीकात्मक शवयात्रा निकालकर विरोध दर्ज कराया।

27 अगस्त को भी राज्यभर में हुआ था प्रदर्शन
महंगाई पिछले कुछ समय से आसू के राज्यव्यापी आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में शामिल है। 27 अगस्त को भी संगठन ने असम के विभिन्न जिला मुख्यालयों में विरोध प्रदर्शन किए थे।
आसू अध्यक्ष उत्पल शर्मा और महासचिव समीरन फुकन ने उस दौरान आरोप लगाया था कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में तेजी से हुई वृद्धि ने आम लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं और सरकार महंगाई को नियंत्रित करने में विफल रही है। संगठन ने उस समय संकेत दिया था कि स्थिति में सुधार नहीं होने पर आंदोलन जारी रखा जाएगा।

बाढ़ प्रभावित परिवारों पर दोहरी आर्थिक मार का दावा
आसू ने महंगाई के मुद्दे को असम में हाल में आई बाढ़ से प्रभावित परिवारों की आर्थिक स्थिति से भी जोड़ा है। संगठन का कहना है कि बाढ़ प्रभावित कई जिलों में परिवार पहले से आर्थिक संकट और पुनर्वास की चुनौतियों से जूझ रहे हैं। ऐसे समय में खाद्य पदार्थों एवं दैनिक उपयोग की वस्तुओं की बढ़ती कीमतों ने उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है।
संगठन ने यह भी कहा है कि स्कूल-कॉलेज में दाखिले और शिक्षा संबंधी खर्च के समय बढ़ती कीमतों के कारण कई परिवारों पर आर्थिक दबाव और बढ़ा है।

शिवसागर में बाजार निगरानी की पहले भी उठ चुकी है मांग
हालिया बाढ़ के बाद शिवसागर में मूल्यवृद्धि और बाजार व्यवस्था को लेकर पहले भी चिंता जताई जा चुकी है। जिला उपभोक्ता संरक्षण समिति ने खाद्य सामग्री, दवाइयों, स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक वस्तुओं और निर्माण सामग्री की कीमतों की प्रभावी निगरानी की मांग की थी। इसमें विशेष रूप से बाढ़ प्रभावित परिवारों पर पड़ रहे आर्थिक दबाव का मुद्दा उठाया गया था।
ऐसे में आसू ने सरकार से बाजार निगरानी तंत्र मजबूत करने, आवश्यक वस्तुओं की उचित कीमतों पर उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा कथित कृत्रिम मूल्यवृद्धि एवं अनुचित व्यापारिक गतिविधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की है।

महंगाई नहीं थमी तो आंदोलन और व्यापक करने का संकेत
आसू की शिवसागर जिला समिति के अध्यक्ष मानव हजारिका एवं साधारण सचिव दीपांकर सैकिया ने संकेत दिया है कि आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं लगाया गया तो महंगाई के खिलाफ आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।

शिवसागर में शहीद उद्यान से शांतिवन मुक्तद्वार श्मशान घाट तक निकाली गई प्रतीकात्मक शवयात्रा के जरिए छात्र संगठन ने खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति व्यवस्था के प्रति अपना असंतोष जाहिर किया। प्रदर्शन का मुख्य संदेश यही रहा कि सरकार आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर तत्काल नियंत्रण लगाए, बाजार निगरानी को प्रभावी बनाए और महंगाई से जूझ रही आम जनता को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाए।




