पुरातत्व विभाग में असमिया युवाओं के कथित मानसिक उत्पीड़न का आरोप, जातीय संग्रामी सेना असम ने उठाया मामला : एएसआई शिवसागर उप-मंडल कार्यालय पहुंचा संगठन का प्रतिनिधिमंडल, अधिकारियों के साथ मामले पर चर्चा की पहल : ‘वर्षश्रेष्ठ टूरिस्ट गाइड’ सम्मान प्राप्त गौतम हीरा का दावा—कथित मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर छोड़ी संविदा आधारित नौकरी
कुछ बाहरी अधिकारी-कर्मचारियों पर लगाए गंभीर आरोप : विभाग का आधिकारिक पक्ष आना बाकी, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं

शिवसागर, 3 सितंबर : भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से जुड़े शिवसागर क्षेत्र में कार्यरत कुछ स्थानीय असमिया युवक-युवतियों के कथित मानसिक उत्पीड़न का मामला सामने आया है। आरोप है कि विभाग से जुड़े कुछ बाहरी अधिकारी-कर्मचारियों के कथित व्यवहार के कारण स्थानीय कर्मचारियों को मानसिक दबाव और प्रताड़ना जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। मामला सामने आने के बाद जातीय संग्रामी सेना असम ने इसे गंभीर बताते हुए विभागीय स्तर पर मुद्दा उठाया है।
हालांकि, इस पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की अभी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण अथवा संबंधित अधिकारियों की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

एएसआई के शिवसागर उप-मंडल कार्यालय पहुंचा प्रतिनिधिमंडल
मामले को गंभीरता से लेते हुए जातीय संग्रामी सेना असम की शिवसागर जिला समिति के अध्यक्ष ऋतुराज बरुवा और सचिव रीदीप डेका के नेतृत्व में संगठन का एक प्रतिनिधिमंडल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के शिवसागर उप-मंडल कार्यालय पहुंचा।
प्रतिनिधिमंडल ने स्थानीय असमिया युवक-युवतियों से जुड़े कथित मानसिक उत्पीड़न के मुद्दे को उठाते हुए अधिकारियों के साथ इस पर चर्चा की पहल की। संगठन की ओर से स्थानीय कर्मचारियों के लिए सम्मानजनक और अनुकूल कार्यस्थल सुनिश्चित करने से जुड़े सवाल भी उठाए गए।
कुछ बाहरी अधिकारी-कर्मचारियों के व्यवहार पर आरोप
मामले के केंद्र में यह आरोप है कि विभाग से जुड़े कुछ बाहरी अधिकारी एवं कर्मचारियों के कथित व्यवहार के चलते स्थानीय असमिया कर्मचारियों को कार्यस्थल पर मानसिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। आरोपों में दावा किया गया है कि स्थिति कुछ कर्मचारियों के लिए इतनी असहज हो रही है कि उन्हें नौकरी से अलग होने तक का निर्णय लेना पड़ रहा है।
इन आरोपों को लेकर जातीय संग्रामी सेना असम की ओर से विभागीय स्तर पर स्थिति स्पष्ट करने और मामले को गंभीरता से देखने की पहल की गई है।
गौतम हीरा ने सोशल मीडिया पर जताई नाराजगी
इसी बीच गौतम हीरा ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से इस मुद्दे पर नाराजगी जाहिर करते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, गौतम हीरा को वर्ष 2024 में ‘वर्षश्रेष्ठ टूरिस्ट गाइड’ सम्मान से सम्मानित किया गया था।
हीरा ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि केंद्रीय पुरातत्व विभाग से जुड़ी अपनी संविदा आधारित नौकरी के दौरान उन्हें कुछ बाहरी अधिकारी-कर्मचारियों की कथित मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि इस स्थिति को और सहन नहीं कर पाने के कारण उन्होंने नौकरी से अलग होने का निर्णय लिया।
उनका यह दावा सामने आने के बाद स्थानीय युवाओं के लिए विभाग के कार्यस्थल के माहौल और उनके साथ कथित व्यवहार को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
असमिया अधिकारी-कर्मचारियों की कथित चुप्पी पर भी उठाए सवाल
गौतम हीरा ने अपने आरोपों में यह भी दावा किया कि कथित घटनाक्रम की जानकारी होने के बावजूद विभाग से जुड़े कुछ असमिया अधिकारी एवं कर्मचारी चुप रहे। उन्होंने इस कथित मौन भूमिका को लेकर भी नाराजगी व्यक्त की।
जातीय संग्रामी सेना असम की ओर से मामला उठाए जाने के बाद यह मुद्दा अब विभागीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। संगठन की पहल के बाद इस मामले में संबंधित अधिकारियों के रुख पर भी नजर बनी हुई है।
विभाग का पक्ष आना बाकी, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं
इस पूरे घटनाक्रम में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि मानसिक उत्पीड़न और कुछ बाहरी अधिकारी-कर्मचारियों के व्यवहार को लेकर सामने आए दावे फिलहाल आरोप हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण अथवा संबंधित विभागीय अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष भी अभी सामने नहीं आया है।
ऐसे में संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया के बाद ही आरोपों के दूसरे पक्ष और पूरे घटनाक्रम की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
स्थानीय युवाओं के कार्यस्थल के माहौल को लेकर चर्चा तेज
गौतम हीरा की सोशल मीडिया पोस्ट और जातीय संग्रामी सेना असम की पहल के बाद मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा में आ गया है। संगठन द्वारा एएसआई के शिवसागर उप-मंडल कार्यालय में मुद्दा उठाए जाने से अब विभागीय प्रतिक्रिया का इंतजार है।
मामले का निष्पक्ष रूप से सामने आना इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह स्थानीय युवक-युवतियों के सम्मानजनक, सुरक्षित और निष्पक्ष कार्यस्थल से जुड़े सवालों से संबंधित है। अब निगाह इस बात पर है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इन आरोपों पर क्या पक्ष रखता है और मामले को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।




