अर्जुन अवॉर्डी भोगेश्वर बरुआ का 87वां जन्मदिन, असमभर में मना 43वां ‘अभिरुचि क्रीड़ा दिवस’ : जयसागर स्थित आवास पर केक काटकर दिग्गज एथलीट को दी गई शुभकामनाएं, बोरपुखुरी किनारे स्थापित प्रतिमा पर गामोछा अर्पित कर जताया सम्मान : असम सरकार और खेल विभाग ने किया सम्मानित, जन्मदिन पर प्रदान किया एक लाख रुपये का चेक : प्रख्यात मूर्तिकार दिगंत माधव गोस्वामी ने संरक्षण के लिए संग्रह किए भोगेश्वर बरुआ के हस्त एवं पदचिह्न
1966 बैंकॉक एशियाई खेलों में 800 मीटर दौड़ का स्वर्ण जीतकर रचा था इतिहास; बोले—‘हमें आगे बढ़ना है और बच्चों को भी आगे ले जाना है’

शिवसागर, 3 सितंबर : पूर्वोत्तर भारत के खेल इतिहास के गौरव और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित दिग्गज एथलीट भोगेश्वर बरुआ का 87वां जन्मदिन गुरुवार को पूरे सम्मान, उत्साह और खेल भावना के साथ मनाया गया। उनके जन्मदिन के उपलक्ष्य में असम के विभिन्न हिस्सों में 43वां ‘अभिरुचि क्रीड़ा दिवस’ भी आयोजित किया गया। शिवसागर के जयसागर स्थित उनके आवास पर बड़ी संख्या में प्रशंसकों, खेल प्रेमियों और शुभचिंतकों ने पहुंचकर उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं और उनके ऐतिहासिक खेल योगदान को याद किया।

1984 से भोगेश्वर बरुआ के जन्मदिन पर मनाया जाता है ‘अभिरुचि क्रीड़ा दिवस’
असम के खेल जगत में 3 सितंबर का विशेष महत्व है। वर्ष 1984 से प्रत्येक वर्ष भोगेश्वर बरुआ के जन्मदिन के अवसर पर राज्य में ‘अभिरुचि क्रीड़ा दिवस’ मनाने की परंपरा रही है। इसी कड़ी में इस वर्ष 43वां अभिरुचि क्रीड़ा दिवस मनाया गया।
राज्य के विभिन्न हिस्सों में आयोजित कार्यक्रमों के माध्यम से जहां भोगेश्वर बरुआ की उपलब्धियों और भारतीय एथलेटिक्स में उनके योगदान को याद किया गया, वहीं नई पीढ़ी को खेलकूद, शारीरिक गतिविधियों और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति प्रेरित करने का संदेश भी दिया गया।

जयसागर स्थित आवास पर केक काटकर मनाया 87वां जन्मदिन
शिवसागर के जयसागर स्थित भोगेश्वर बरुआ के आवास पर जन्मदिन को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में प्रशंसक, खेल प्रेमी और शुभचिंतक उन्हें बधाई देने पहुंचे। इस अवसर पर केक काटकर उनका 87वां जन्मदिन मनाया गया। शुभचिंतकों ने उन्हें पारंपरिक गामोछा और पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मानित किया तथा उनके स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की।
उम्र के इस पड़ाव पर भी खेल और नई पीढ़ी के भविष्य को लेकर भोगेश्वर बरुआ का उत्साह कम नहीं दिखा। उन्होंने युवाओं को आगे बढ़ने और बच्चों को खेल के क्षेत्र में प्रोत्साहित करने का संदेश देते हुए कहा, “हमें आगे बढ़ना है और लड़के-लड़कियों को भी आगे ले जाना है।” उनका यह संदेश नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को अवसर और प्रोत्साहन देने के आह्वान के रूप में सामने आया।

असम सरकार ने किया सम्मानित, प्रदान किया एक लाख रुपये का चेक
भोगेश्वर बरुआ के 87वें जन्मदिन पर असम सरकार और खेल विभाग की ओर से भी उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर राज्य सरकार की ओर से दिग्गज एथलीट को एक लाख रुपये का चेक प्रदान किया गया।
यह सम्मान उस महान खिलाड़ी के प्रति राज्य की कृतज्ञता और आदर का प्रतीक रहा, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर असम और पूर्वोत्तर भारत का नाम रोशन करने के साथ भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।

बोरपुखुरी किनारे सात फीट ऊंची प्रतिमा पर गामोछा अर्पित
जन्मदिन के अवसर पर शिवसागर में भोगेश्वर बरुआ के सम्मान में एक अन्य कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। शिवसागर बोरपुखुरी के किनारे स्थापित उनकी सात फीट ऊंची प्रतिमा पर प्रशंसकों और शुभचिंतकों ने गामोछा अर्पित कर उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया।
इसके बाद शुभचिंतक जयसागर स्थित उनके आवास पहुंचे और उन्हें गामोछा तथा पुष्पगुच्छ भेंट कर जन्मदिन की बधाई दी। इस दौरान उनके खेल जीवन, उपलब्धियों और असम के खेल इतिहास में उनके योगदान को भी याद किया गया।

ऐतिहासिक विरासत के रूप में संरक्षित होंगे हस्त एवं पदचिह्न
भोगेश्वर बरुआ के 87वें जन्मदिन को उनकी खेल विरासत के संरक्षण की दृष्टि से भी यादगार बनाने की पहल की गई। गुवाहाटी से पहुंचे ‘पूर्णशिल्पम’ के प्रमुख एवं प्रख्यात चित्रकार-मूर्तिकार दिगंत माधव गोस्वामी ने अर्जुन पुरस्कार विजेता भोगेश्वर बरुआ के हाथ और पैरों के निशान यानी हस्त एवं पदचिह्न संग्रह किए।
इन निशानों को भविष्य के लिए संरक्षित करने के उद्देश्य से लिया गया है। इस पहल को दिग्गज खिलाड़ी से जुड़ी ऐतिहासिक स्मृतियों और विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

1966 के बैंकॉक एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतकर रचा था इतिहास
भोगेश्वर बरुआ का नाम भारतीय खेल इतिहास में विशेष रूप से 1966 के बैंकॉक एशियाई खेलों में हासिल की गई ऐतिहासिक सफलता के लिए दर्ज है। उन्होंने पुरुषों की 800 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया था। उनकी इस उपलब्धि ने न केवल असम और पूर्वोत्तर भारत, बल्कि पूरे देश के एथलेटिक्स जगत को गौरवान्वित किया।
भोगेश्वर बरुआ पूर्वोत्तर भारत के पहले अर्जुन पुरस्कार विजेता खिलाड़ी के रूप में भी विशिष्ट पहचान रखते हैं। दशकों बाद भी उनकी उपलब्धियां असम के उभरते खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।

जन्मदिन समारोह बना नई पीढ़ी को खेलों से जोड़ने का संदेश
भोगेश्वर बरुआ का 87वां जन्मदिन और 43वां ‘अभिरुचि क्रीड़ा दिवस’ महज एक जन्मदिन समारोह तक सीमित नहीं रहा। यह अवसर उनके दशकों पुराने खेल योगदान को सम्मान देने, उनकी विरासत को संरक्षित करने और नई पीढ़ी को खेलों के प्रति प्रेरित करने का माध्यम भी बना।
एक ओर जयसागर स्थित आवास पर प्रशंसकों और शुभचिंतकों की मौजूदगी में उनका जन्मदिन मनाया गया, वहीं दूसरी ओर बोरपुखुरी किनारे स्थापित उनकी प्रतिमा पर गामोछा अर्पित कर सम्मान जताया गया। राज्य सरकार की ओर से एक लाख रुपये का चेक, उनके हस्त एवं पदचिह्नों के संरक्षण की पहल और राज्यभर में आयोजित अभिरुचि क्रीड़ा दिवस के कार्यक्रमों ने इस अवसर को और खास बना दिया।
इन सबके बीच दिग्गज एथलीट भोगेश्वर बरुआ का संदेश—“हमें आगे बढ़ना है और लड़के-लड़कियों को भी आगे ले जाना है”—असम की नई पीढ़ी के खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा और खेलों में आगे बढ़ने का आह्वान बनकर सामने आया।




