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चराईदेव पुलिस ने अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क का किया पर्दाफाश, सक्रिय उग्रवादी कैडर से संदिग्ध कनेक्शन की जांच तेज : 46.11 ग्राम संदिग्ध हेरोइन की बरामदगी से खुलती गईं नेटवर्क की कड़ियां : दिल्ली से कथित साइकोट्रॉपिक टैबलेट सप्लायर गिरफ्तार : मोबाइल चैट, दिल्ली से भेजी गई खेप और 1.12 लाख के Paytm लेन-देन की जांच

ऊपरी असम तक फैले कथित नेटवर्क की तह तक पहुंचने में जुटी पुलिस : ड्रग तस्करी और उग्रवादी संपर्कों के संभावित गठजोड़ पर फोकस : डिजिटल डेटा, वित्तीय ट्रेल और सप्लाई चेन की जांच जारी

सोनारी, 1 सितंबर : चराईदेव जिला पुलिस की ओर से नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ शुरू की गई एक जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पुलिस के अनुसार, 46.11 ग्राम संदिग्ध हेरोइन की बरामदगी से शुरू हुआ मामला जांच आगे बढ़ने के साथ कथित अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क, दिल्ली से ऊपरी असम तक साइकोट्रॉपिक टैबलेट की संभावित सप्लाई, डिजिटल और वित्तीय लेन-देन तथा एक सक्रिय उग्रवादी कैडर से संदिग्ध संपर्क तक पहुंच गया है।

पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल फोन, व्हाट्सऐप संपर्क, डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड, बैंकिंग और वित्तीय ट्रेल तथा आपसी संपर्कों का विश्लेषण कर यह स्थापित करने की कोशिश कर रही है कि कथित ड्रग तस्करी नेटवर्क और उग्रवादी तत्वों के बीच वास्तविक संबंध किस स्तर तक था।

17 जुलाई को स्विफ्ट कार की तलाशी से शुरू हुआ मामला

चराईदेव जिले के सीनियर सुप्रिटेंडेंट ऑफ पुलिस सुरजीत सिंह पानेसर ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि चराईदेव पुलिस के मुताबिक मामले की शुरुआत 17 जुलाई 2026 को हुई। गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने धोधर अली रोड के माजगांव इलाके में एक मारुति सुजुकी स्विफ्ट कार को रोककर तलाशी ली थी।

वाहन में सवार मनुज गोगोई को हिरासत में लेने के बाद पुलिस ने कार में विशेष रूप से बनाए गए एक कथित गुप्त चैंबर की तलाशी ली। पुलिस के अनुसार वहां से चार पैकेट बरामद हुए, जिनमें कुल 46.11 ग्राम संदिग्ध हेरोइन पाई गई।

इसके बाद मनुज गोगोई को मथुरापुर थाना कांड संख्या 24/2026 के तहत एनडीपीएस अधिनियम की धारा 21(बी) में गिरफ्तार किया गया।

पूछताछ में सामने आया भास्कर गोगोई का नाम

पुलिस का दावा है कि मनुज गोगोई से पूछताछ के दौरान भास्कर गोगोई की कथित भूमिका सामने आई। आरोप है कि भास्कर ने ही मनुज को इस नेटवर्क से परिचित कराया था और कथित नशीले पदार्थों के कारोबार में निवेश अथवा वित्तीय सहयोग भी कर रहा था।

जांच में सामने आई जानकारियों के आधार पर पुलिस ने बाद में भास्कर गोगोई को भी गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद उसके मोबाइल फोन और डिजिटल संपर्कों की तकनीकी जांच शुरू की गई, जिससे मामले में नए पहलू सामने आने का दावा किया गया है।

मोबाइल जांच में सक्रिय उग्रवादी कैडर से कथित संपर्क

मामले ने उस समय अधिक गंभीर रूप ले लिया, जब पुलिस के अनुसार भास्कर गोगोई के मोबाइल फोन की तकनीकी जांच में एक कथित सक्रिय उग्रवादी कैडर से संपर्क के संकेत मिले।

पुलिस ने संबंधित व्यक्ति की पहचान मृदुपवन दहुतिया के रूप में की है। जांच में पुलिस को कथित तौर पर यह जानकारी भी मिली कि देबाशीष दहुतिया ने भास्कर गोगोई को मृदुपवन दहुतिया से मिलवाया था।

इसी कड़ी की जांच करते हुए पुलिस ने देबाशीष दहुतिया और बिटु हजारिका को भी हिरासत में लिया।

वरिष्ठ उग्रवादी कैडर की कथित भूमिका की भी जांच

पुलिस ब्रीफ के मुताबिक पूछताछ के दौरान देबाशीष दहुतिया ने एक अन्य दहुतिया को कथित वरिष्ठ उग्रवादी कैडर के रूप में चिन्हित किया है।

पुलिस को संदेह है कि संबंधित व्यक्ति ऊपरी असम के लिए कथित साइकोट्रॉपिक टैबलेट की खरीद और परिवहन के समन्वय में भूमिका निभा रहा था। हालांकि नेटवर्क में उसकी वास्तविक भूमिका क्या थी और कथित सप्लाई चेन में वह किस स्तर पर सक्रिय था, इसकी जांच अभी जारी है।

दिल्ली तक पहुंची जांच, अपूर्व ठाकुर गिरफ्तार

तकनीकी और डिजिटल जांच आगे बढ़ने के साथ चराईदेव पुलिस की जांच दिल्ली निवासी अपूर्व ठाकुर तक पहुंची। पुलिस के मुताबिक अपूर्व कथित रूप से साइकोट्रॉपिक टैबलेट की आपूर्ति करने वालों में शामिल था।

पुलिस का दावा है कि उसके मोबाइल फोन की जांच में वर्ष 2025 से मृदुपवन दहुतिया के साथ व्हाट्सऐप संपर्क के संकेत मिले हैं। इसके अलावा जांचकर्ताओं को साइकोट्रॉपिक टैबलेट की एक कथित खेप से संबंधित इनवॉइस भी मिलने की बात कही गई है।

इसके बाद चराईदेव पुलिस की एक टीम ने 27 अगस्त को दिल्ली में अभियान चलाकर अपूर्व ठाकुर को गिरफ्तार किया। गिरफ्तारी के बाद उसे सक्षम अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां से पुलिस को चार दिनों की ट्रांजिट रिमांड मिली। आरोपी को चराईदेव लाने के बाद उससे विस्तृत पूछताछ शुरू की गई।

1.12 लाख के Paytm ट्रांजैक्शन पर भी पुलिस की नजर

मामले की वित्तीय जांच में भी एक महत्वपूर्ण डिजिटल लेन-देन सामने आने का दावा किया गया है। पुलिस के अनुसार भास्कर गोगोई की पत्नी बॉबी गोगोई से जुड़े 1.12 लाख के Paytm लेन-देन का पता चला है।

अब जांच एजेंसियां इस राशि के वास्तविक स्रोत, भुगतान के उद्देश्य और कथित नशीले पदार्थों के कारोबार से इसके संभावित संबंध का पता लगाने में जुटी हैं। इस वित्तीय लेन-देन को किसी आपराधिक गतिविधि से जोड़ने के लिए साक्ष्यों की पुष्टि अभी जारी है।

दिल्ली से असम भेजी गई कथित टैबलेट की खेप की तलाश

पुलिस जांच में साइकोट्रॉपिक टैबलेट की एक कथित खेप दिल्ली से असम भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस का दावा है कि भास्कर गोगोई की गिरफ्तारी की सूचना नेटवर्क तक पहुंचने के बाद इस खेप की आगे की आवाजाही कथित तौर पर रोक दी गई थी।

अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि खेप कहां तक पहुंची थी, उसमें किस प्रकार की और कितनी मात्रा में नियंत्रित दवाएं अथवा साइकोट्रॉपिक टैबलेट थीं और असम पहुंचने के बाद इन्हें किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।

इस पहलू की पुष्टि होने पर कथित नेटवर्क की सप्लाई चेन और उसके संचालन के तरीके को समझने में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की संभावना है।

दिल्ली से ऊपरी असम तक कथित नेटवर्क के संकेत

चराईदेव पुलिस के अनुसार अब तक की जांच दिल्ली और ऊपरी असम के बीच सक्रिय एक कथित अंतरराज्यीय नशीले पदार्थ नेटवर्क की ओर संकेत करती है।

एक सक्रिय उग्रवादी कैडर से संभावित संपर्क सामने आने के कारण पुलिस ने जांच को केवल ड्रग तस्करी तक सीमित नहीं रखा है। मोबाइल फोन के तकनीकी डेटा, व्हाट्सऐप चैट और संपर्क, बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल भुगतान, संदिग्ध वित्तीय लेन-देन तथा आरोपियों के आपसी संपर्कों को जोड़कर कथित नेटवर्क की पूरी संरचना स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।

ड्रग्स-उग्रवादी गठजोड़ की वास्तविकता स्थापित करना बड़ी चुनौती

मौजूदा जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह पता लगाना है कि दिल्ली से साइकोट्रॉपिक टैबलेट की कथित आपूर्ति, ऊपरी असम के स्थानीय तस्करी नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और कथित सक्रिय उग्रवादी कैडर के बीच वास्तव में किस स्तर का संबंध था।

पुलिस नेटवर्क में शामिल अन्य संभावित सदस्यों, सप्लाई चेन, धन के प्रवाह, डिजिटल संपर्कों और कथित उग्रवादी संबंधों की पहचान के लिए आगे की पूछताछ, तकनीकी विश्लेषण और वित्तीय जांच जारी रखे हुए है।

अप्रैल में भी ऊपरी असम में हुई थी संयुक्त कार्रवाई

यह मामला ऊपरी असम में नशीले पदार्थों और उग्रवादी नेटवर्क के संभावित अंतर्संबंध के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अप्रैल 2026 में भी सेना और असम पुलिस की ओर से तिनसुकिया, चराईदेव और शिवसागर जिलों में संयुक्त अभियान चलाए जाने की जानकारी सामने आई थी।

उस कार्रवाई के दौरान एक अल्फा (आई) कैडर, कई कथित ओवर ग्राउंड वर्करों और कथित ड्रग डीलरों को पकड़े जाने की बात कही गई थी। सुरक्षा एजेंसियों ने उस दौरान स्थानीय युवाओं को उग्रवादी नेटवर्क में शामिल करने की कथित गतिविधियों और नशीले पदार्थों से जुड़े तत्वों के खिलाफ कार्रवाई का उल्लेख किया था।

अन्य अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क पर भी तेज हुई कार्रवाई

असम और पूर्वोत्तर में हाल के महीनों में अंतरराज्यीय ड्रग नेटवर्क के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस की कार्रवाई तेज हुई है। अगस्त के पहले पखवाड़े में सामने आए एक अन्य मामले में एक संगठित अंतरराज्यीय नेटवर्क के संपर्क तीन राज्यों के साथ दिल्ली और पुणे तक फैले होने की जानकारी सामने आई थी।

हालांकि वह मामला चराईदेव पुलिस की मौजूदा जांच से अलग है और दोनों मामलों के बीच किसी प्रत्यक्ष संबंध की फिलहाल पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

डिजिटल और वित्तीय साक्ष्यों से साफ होगी पूरी तस्वीर

चराईदेव पुलिस की मौजूदा जांच में अब सबसे अधिक जोर कथित सप्लाई चेन और वित्तीय नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने पर है। जांच पूरी होने तथा मोबाइल फोन, व्हाट्सऐप संपर्क, वित्तीय ट्रेल, डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड और अन्य तकनीकी साक्ष्यों की पुष्टि के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित नारकोटिक्स नेटवर्क और उग्रवादी तत्वों के बीच संबंध की वास्तविक प्रकृति और सीमा क्या थी।

महत्वपूर्ण रूप से, मामले में सामने आए आरोप फिलहाल पुलिस की जांच, तकनीकी विश्लेषण और पूछताछ में सामने आई जानकारियों पर आधारित हैं। संबंधित व्यक्तियों की आपराधिक जिम्मेदारी न्यायिक प्रक्रिया में प्रस्तुत और प्रमाणित साक्ष्यों के आधार पर ही निर्धारित होगी। फिलहाल चराईदेव पुलिस कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों, धन के प्रवाह, दिल्ली-असम सप्लाई चेन और संभावित उग्रवादी संपर्कों की तह तक पहुंचने के लिए जांच आगे बढ़ा रही है।

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