देरगांव में मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा का बड़ा संदेश: आधुनिक पुलिसिंग, कानून-व्यवस्था और ड्रग्स के खिलाफ अभियान पर रहेगा फोकस : लाचित बरफुकन पुलिस अकादमी में 32 डीएसपी और 371 कांस्टेबल की पासिंग आउट परेड : उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं को मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित : दो दिवसीय एसपी सम्मेलन में कानून-व्यवस्था, नई पुलिस भर्ती, ड्रग्स नेटवर्क तथा महिलाओं-बच्चों के खिलाफ अपराधों पर मंथन : 3 सितंबर को अकादमी परियोजना की भी होगी समीक्षा
बाढ़-बारिश से क्षतिग्रस्त जरूरी सड़कों को दुर्गा पूजा से पहले दुरुस्त करने का प्रयास : सड़क हादसों में तेज रफ्तार और लापरवाही पर भी ध्यान देने की अपील : काजीरंगा में स्थानीय लोगों को पर्यटन से जोड़ने पर जोर : समजिला व्यवस्था में विधानसभा क्षेत्र की प्रशासनिक सेवाओं को एक इकाई में समेटने का लक्ष्य

देरगांव, 2 सितंबर : असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा बुधवार को गोलाघाट जिले के देरगांव पहुंचे, जहां उन्होंने लाचित बरफुकन पुलिस अकादमी में आयोजित पासिंग आउट परेड में हिस्सा लेने के साथ राज्य की कानून-व्यवस्था, पुलिस भर्ती, ड्रग्स के खिलाफ अभियान, सड़क मरम्मत, टोल व्यवस्था, सड़क सुरक्षा, काजीरंगा के पर्यटन विकास और समजिला प्रशासन सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार का रुख स्पष्ट किया। मुख्यमंत्री का गोलाघाट जिले का यह दौरा 2 और 3 सितंबर तक निर्धारित है और इसके केंद्र में पुलिस प्रशासन तथा लाचित बरफुकन पुलिस अकादमी की भावी योजनाएं हैं।

403 पुलिस अधिकारियों-जवानों का प्रशिक्षण पूरा
मुख्यमंत्री ने सुबह लाचित बरफुकन पुलिस अकादमी में आयोजित पासिंग आउट परेड में हिस्सा लिया। इस अवसर पर 32 प्रशिक्षु उप-पुलिस अधीक्षकों (डीएसपी) और असम पुलिस की संचार शाखा के 371 कांस्टेबलों सहित कुल 403 पुलिसकर्मियों ने सफलतापूर्वक अपना प्रशिक्षण पूरा किया। मुख्यमंत्री ने परेड का निरीक्षण किया और प्रशिक्षण के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों एवं जवानों को पुरस्कार भी प्रदान किए। उन्होंने नवप्रशिक्षित पुलिसकर्मियों को उनके नए दायित्वों के लिए शुभकामनाएं देते हुए उनके माता-पिता और परिवारों को भी बधाई दी।

आधुनिक अपराधों से निपटने के लिए पुलिस प्रशिक्षण में बदलाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि देरगांव स्थित लाचित बरफुकन पुलिस अकादमी अब केवल असम तक सीमित प्रशिक्षण संस्थान नहीं रही, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रही है। यहां असम के साथ दूसरे राज्यों के पुलिसकर्मियों को भी प्रशिक्षण दिया जा चुका है। मणिपुर के करीब 1,946 पुलिस एवं IRB प्रशिक्षुओं और बाद में गोवा पुलिस के 700 प्रशिक्षुओं ने यहां प्रशिक्षण पूरा किया था।
अकादमी के प्रशिक्षण कार्यक्रमों में आधुनिक पुलिसिंग की जरूरतों के अनुरूप बदलाव भी किए जा रहे हैं। साइबर अपराध, डिजिटल तकनीक, कानूनों में बदलाव, आधुनिक जांच पद्धति और तकनीक आधारित पुलिसिंग पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी वर्ष राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय और असम पुलिस के संयुक्त कार्यक्रम में 32 डीएसपी और 123 सब-इंस्पेक्टर सहित 155 अधिकारियों को आधुनिक पर्यटन पुलिसिंग का विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया था, जिसमें IT आधारित उपकरण, कानूनी प्रावधान, आपातकालीन प्रतिक्रिया और पेशेवर व्यवहार जैसे विषय शामिल थे।
अकादमी की बढ़ती प्रतिष्ठा का अंदाजा इससे भी लगाया जा सकता है कि पहले मणिपुर और गोवा के पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण के बाद पड़ोसी देश भूटान की ओर से भी अपने पुलिसकर्मियों को यहां प्रशिक्षण दिलाने में रुचि दिखाई गई थी।

एसपी सम्मेलन में ड्रग्स और कानून-व्यवस्था प्रमुख एजेंडा
देरगांव में 2 और 3 सितंबर को आयोजित दो दिवसीय वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सम्मेलन को राज्य की सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री बुधवार दोपहर लाचित बरफुकन पुलिस अकादमी के कन्वेंशन सेंटर में सम्मेलन में शामिल हुए, जबकि 3 सितंबर को भी सम्मेलन का अगला सत्र होना है। मुख्यमंत्री 3 सितंबर की सुबह अकादमी परियोजना की प्रगति की समीक्षा भी करेंगे।
मुख्यमंत्री के मुताबिक सम्मेलन में राज्य की कानून-व्यवस्था, पुलिस बल में नई नियुक्तियां, ड्रग्स के खिलाफ अभियान तथा महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध अपराधों जैसे संवेदनशील विषयों पर विस्तार से विचार किया जाएगा। हाल में सरकार की ओर से सम्मेलन की जानकारी देते समय ड्रग्स के मुद्दे को प्रमुख फोकस बताया गया था और म्यांमार-अरुणाचल प्रदेश की ओर से सामने आ रहे नए मादक पदार्थ तस्करी मार्ग को लेकर चिंता जताई गई थी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि असम पुलिस को मानव संसाधन के स्तर पर और मजबूत करने की प्रक्रिया लगातार जारी है। उनके अनुसार पिछले पांच वर्षों में पुलिस में करीब 21 हजार नई नियुक्तियां की गई हैं। अब एसडीआरएफ और विभिन्न बटालियनों में खाली पदों को भरने तथा पात्र पुलिसकर्मियों की पदोन्नति की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे।

बाढ़-बारिश से टूटी सड़कों पर मुख्यमंत्री का आश्वासन
राज्य में बाढ़ और लगातार बारिश के कारण क्षतिग्रस्त हुई सड़कों को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि भारी वर्षा के दौरान हर स्थान पर तत्काल निर्माण अथवा मरम्मत करना तकनीकी रूप से संभव नहीं होता। इसके बावजूद जिन सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त करने की आवश्यकता है, उनकी दुर्गा पूजा से पहले मरम्मत कराने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने संकेत दिया कि मौसम अनुकूल होते ही जरूरी सड़क मरम्मत कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा, ताकि त्योहारों के दौरान आम लोगों को आवागमन में परेशानी न हो।

टोल से मिलने वाला पैसा बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्टों के लिए महत्वपूर्ण
राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल वसूली को लेकर उठ रहे सवालों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर सड़क संपर्क और बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्टों के निर्माण के लिए संसाधनों की जरूरत होती है। उन्होंने काजीरंगा क्षेत्र के एलिवेटेड कॉरिडोर, सुरंग तथा नए चार लेन वाले मार्गों जैसे बड़े प्रोजेक्टों का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास के लिए जनता की भागीदारी भी आवश्यक है।
देरगांव और आसपास राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के उन्नयन का काम पहले से महत्वपूर्ण रहा है। NHIDCL के ताजा प्रोजेक्ट रिकॉर्ड में देरगांव टाउन के NH-37 खंड को चार लेन में अपग्रेड करने वाली परियोजना को पूर्ण बताया गया है।

सड़क हादसों के लिए सिर्फ गड्ढों को जिम्मेदार मानना उचित नहीं
मुख्यमंत्री ने सड़क दुर्घटनाओं को लेकर कहा कि किसी दुर्घटना के लिए केवल सड़क के गड्ढों को जिम्मेदार ठहरा देना समस्या का पूरा आकलन नहीं है। सड़क की स्थिति के साथ वाहनों की गति, चालक की सावधानी, यातायात नियमों का पालन और दोपहिया वाहन चालकों द्वारा हेलमेट पहनना भी सड़क सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलू हैं।
उन्होंने वाहन चालकों से निर्धारित गति सीमा का पालन करने, हेलमेट का इस्तेमाल करने तथा जिम्मेदारी और सावधानी के साथ वाहन चलाने की अपील की।

काजीरंगा पर्यटन में स्थानीय लोगों को आर्थिक भागीदार बनाने पर जोर
काजीरंगा के पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण पर मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्र के विकास की प्रक्रिया में स्थानीय लोगों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है। पर्यटन से होने वाले आर्थिक लाभ का फायदा काजीरंगा के आसपास रहने वाले लोगों तक पहुंचे, इसके लिए उन्हें पर्यटन आधारित गतिविधियों और रोजगार से जोड़ना होगा।
मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि राज्य सरकार केंद्र सरकार से टकराव के बजाय समन्वय के जरिए काजीरंगा के संरक्षण और विकास को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने दावा किया कि वर्तमान सरकार ने काजीरंगा के विस्तार, संरक्षण और पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे के विकास की दिशा में अनेक कदम उठाए हैं।

समजिला व्यवस्था : एक विधानसभा क्षेत्र की सेवाएं उसी प्रशासनिक इकाई में रखने की योजना
समजिला यानी Co-District व्यवस्था पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रशासन को जनता के और करीब लाना है। प्रयास यह है कि संबंधित विधानसभा क्षेत्र के गांवों के साथ पुलिस थाना, अस्पताल, शिक्षा और दूसरी महत्वपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्थाएं उसी समजिला के दायरे में रहें।
उन्होंने कहा कि जहां आवश्यक प्रशासनिक कार्यालय उपलब्ध नहीं हैं, वहां जरूरत के आधार पर नए कार्यालय स्थापित किए जा सकते हैं, लेकिन किसी विधानसभा क्षेत्र के नागरिकों को अपने आवश्यक सरकारी कार्यों के लिए दूसरे समजिला में जाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। देरगांव स्वयं वर्तमान में एक Co-District है और गोलाघाट जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर इसके लिए अलग Co-District Commissioner कार्यालय दर्ज है।
मुख्यमंत्री ने इसके साथ जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही का उल्लेख करते हुए कहा कि विधायकों को अपने विधानसभा क्षेत्र में रहकर जनता की सेवा को प्राथमिकता देनी चाहिए।

देरगांव में होटल-लॉज और कारोबार पर नए कर की चर्चा पर सफाई
देरगांव में पर्यटन क्षेत्र, होटल-लॉज और स्थानीय कारोबारियों पर नए कर अथवा शुल्क लगाए जाने को लेकर चल रही चर्चाओं पर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पिछले वर्ष जो व्यवस्था लागू थी, फिलहाल वही इस वर्ष भी जारी रहेगी।
उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी तरह के बदलाव की आवश्यकता महसूस होने पर स्थानीय व्यापारियों, होटल-लॉज संचालकों, पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों तथा अन्य संबंधित पक्षों के साथ बातचीत की जाएगी। सरकार कोई फैसला संबंधित पक्षों की राय को नजरअंदाज कर जबरन लागू नहीं करेगी।

3 सितंबर को भी देरगांव में जारी रहेगा मुख्यमंत्री का कार्यक्रम
मुख्यमंत्री का देरगांव कार्यक्रम गुरुवार, 3 सितंबर को भी जारी रहेगा। उपलब्ध आधिकारिक कार्यक्रम संबंधी जानकारी के अनुसार सुबह करीब 9 बजे लाचित बरफुकन पुलिस अकादमी परियोजना की समीक्षा निर्धारित है, जबकि करीब 10 बजे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों के सम्मेलन का अगला सत्र आयोजित होगा। ऐसे में दो दिवसीय सम्मेलन के बाद असम पुलिस की कानून-व्यवस्था, ड्रग्स विरोधी रणनीति, भर्ती, प्रशिक्षण और पुलिस प्रशासन को लेकर कुछ महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय सामने आने की संभावना है।




