नागालैंड के मोन में चराईदेव पुलिस का बड़ा ऑपरेशन, 27 चोरी की बाइक-स्कूटी बरामद : असम से चोरी कर नगालैंड में बेचे जा रहे थे दुपहिया वाहन : 5-6 साल पुराने मामलों की बाइक भी मिलीं, करीब 200 और संदिग्ध वाहनों पर पुलिस की नजर : चराईदेव व मोन पुलिस, 149 बटालियन CRPF और स्थानीय संगठनों के समन्वय से चला अभियान; पहले दिन 22 वाहन चराईदेव लाए गए, शेष पांच को लाने की प्रक्रिया जारी
एसएसपी सुरजीत सिंह पानेसर की चेतावनी—पैसे देकर चोरी का वाहन खरीदना भी अपराध; खरीदारी से पहले पुलिस से सत्यापन कराने की अपील

सोनारी, 1 सितंबर : असम से दुपहिया वाहन चोरी कर पड़ोसी राज्य नगालैंड में बेचने वाले कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क के खिलाफ चराईदेव जिला पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। नगालैंड के मोन जिले में स्थानीय पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और नागरिक संगठनों के सहयोग से चलाए गए संयुक्त अभियान में विभिन्न कंपनियों की कुल 27 चोरी की मोटरसाइकिल, बाइक और स्कूटी बरामद की गई हैं। इनमें कुछ वाहन ऐसे भी हैं, जो करीब पांच-छह साल पहले असम के अलग-अलग इलाकों से चोरी हुए थे।

पुलिस को आशंका है कि मोन जिले के विभिन्न हिस्सों में अब भी करीब 200 संदिग्ध चोरी के दुपहिया वाहन चल रहे हो सकते हैं। ऐसे वाहनों की पहचान और बरामदगी के लिए असम एवं नगालैंड पुलिस के समन्वय से आगे भी चरणबद्ध अभियान चलाने की तैयारी है।
पुराने रिकॉर्ड खंगालने से खुली अंतरराज्यीय नेटवर्क की कड़ी
चराईदेव जिले के पुलिस प्रमुख एसएसपी सुरजीत सिंह पानेसर ने मंगलवार को आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में अभियान की जानकारी देते हुए बताया कि पुलिस को लंबे समय से सूचनाएं मिल रही थीं कि चराईदेव सहित असम के विभिन्न इलाकों से चोरी होने वाली मोटरसाइकिलों और अन्य दुपहिया वाहनों को अंतरराज्यीय नेटवर्क के जरिए नगालैंड पहुंचाया जाता है। इनमें विशेष रूप से मोन और दीमापुर की ओर चोरी के वाहन बेचे जाने की जानकारी सामने आ रही थी।
इन सूचनाओं को गंभीरता से लेते हुए चराईदेव पुलिस ने पुराने वाहन चोरी के मामलों के रिकॉर्ड खंगालने शुरू किए। चराईदेव के साथ शिवसागर जिले में पिछले करीब दस वर्षों के दौरान चोरी हुए दुपहिया वाहनों से संबंधित डेटा जुटाया गया। इसके बाद संदिग्ध वाहनों की जानकारी नगालैंड पुलिस के समकक्ष अधिकारियों के साथ साझा की गई।
इसके समानांतर पुलिस ने अपने स्तर पर गोपनीय सूचनाएं जुटाने और संदिग्ध वाहनों की पहचान का काम जारी रखा। जांच के दौरान ठोस संकेत मिले कि असम से चोरी हुई कई मोटरसाइकिलें नगालैंड के सीमावर्ती मोन जिले के विभिन्न इलाकों में इस्तेमाल की जा रही हैं।
CRPF और मोन पुलिस के सहयोग से शुरू हुआ अभियान
एसएसपी पानेसर के अनुसार, सोमवार को चराईदेव पुलिस ने 149 बटालियन CRPF की सी कंपनी के सहयोग से मोन जिले में अभियान शुरू किया। चराईदेव पुलिस की टीम ने मोन पहुंचकर वहां के पुलिस अधीक्षक और उनकी टीम के साथ समन्वय स्थापित किया तथा संदिग्ध वाहनों की बरामदगी के लिए व्यापक रणनीति तैयार की।
अभियान में चराईदेव के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (मुख्यालय) ज्योति प्रसाद पेगु, डीएसपी (मुख्यालय) आर्यन नाथ, डीएसपी (सुरक्षा) नईमुद्दीन तथा 149 बटालियन CRPF के असिस्टेंट कमांडेंट मनोज सहित पुलिस और सुरक्षाबल के अधिकारियों एवं जवानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
पुलिस ने अभियान को प्रभावी बनाने के लिए स्थानीय नागरिक संगठनों से भी संपर्क किया। कोन्याक यूनियन के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद अलग-अलग इलाकों में कार्रवाई की गई। स्थानीय स्तर पर मिले सहयोग के बाद पुलिस विभिन्न स्थानों तक पहुंची और संदिग्ध वाहनों की जांच शुरू की।

एक के बाद एक मिले 27 चोरी के दुपहिया वाहन
संयुक्त कार्रवाई के दौरान विभिन्न कंपनियों की कुल 27 मोटरसाइकिल और स्कूटी बरामद की गईं। वाहनों के दस्तावेज, इंजन और चेसिस नंबर तथा पुराने चोरी के मामलों से संबंधित रिकॉर्ड का प्रारंभिक मिलान करने पर इनके असम के अलग-अलग इलाकों से चोरी होने की बात सामने आई।
पुलिस के अनुसार, जिन जिलों और थानों में इन वाहनों की चोरी से संबंधित एफआईआर दर्ज थीं, वहां के रिकॉर्ड एवं आवश्यक कानूनी दस्तावेजों के आधार पर नगालैंड पुलिस के समक्ष औपचारिक प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद बरामद वाहनों को चराईदेव लाने की अनुमति मिली।
एसएसपी पानेसर ने बताया कि अभियान के पहले चरण के बाद तीन वाहनों के जरिए 22 बाइक-स्कूटी चराईदेव लाई जा चुकी हैं, जबकि शेष पांच दुपहिया वाहनों को मोन से लाने की प्रक्रिया जारी है।
इंजन-चेसिस नंबर से होगी असली मालिकों की पहचान
चराईदेव पुलिस अब बरामद सभी 27 वाहनों के इंजन नंबर, चेसिस नंबर, पंजीकरण विवरण और पूर्व में दर्ज एफआईआर का विस्तृत मिलान करेगी। इसके आधार पर प्रत्येक वाहन के वास्तविक मालिक की पहचान सुनिश्चित की जाएगी।
इसके बाद जिस जिले या थाना क्षेत्र से वाहन चोरी हुआ था, वहां की पुलिस से संपर्क स्थापित कर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। प्रक्रिया पूरी होने पर वाहनों को उनके वास्तविक मालिकों को सौंपने की कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस के लिए इस अभियान की खास बात यह भी है कि बरामद वाहनों में ऐसे दुपहिया वाहन शामिल हैं, जो करीब पांच-छह साल पहले चोरी हुए थे। इतने पुराने मामलों से जुड़े वाहनों का दूसरे राज्य से पता लगाकर बरामद किया जाना पुलिस के लिए महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।
मोन में करीब 200 और संदिग्ध वाहनों की आशंका
अभियान के दौरान पुलिस के सामने एक और गंभीर तथ्य आया। एसएसपी पानेसर के अनुसार, मोन जिले में अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे दुपहिया वाहन मौजूद हो सकते हैं, जिनके चोरी के होने का संदेह है।
पुलिस के प्रारंभिक आकलन के मुताबिक मोन जिले में करीब 200 चोरी या संदिग्ध दुपहिया वाहन चल रहे हो सकते हैं। हालांकि इतने बड़े पैमाने पर वाहनों को एक ही अभियान में बरामद करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इसलिए असम और नगालैंड पुलिस आपसी समन्वय से चरणबद्ध तरीके से अभियान आगे बढ़ाएगी।
एसएसपी ने स्पष्ट किया कि मौजूदा कार्रवाई के साथ अभियान समाप्त नहीं होगा। संदिग्ध वाहनों के बारे में सूचनाएं जुटाने, उनके रिकॉर्ड की जांच करने और असम में दर्ज वाहन चोरी के मामलों से मिलान करने का काम जारी रहेगा।
फिलहाल गिरफ्तारी नहीं, नेटवर्क से जुड़े संदिग्ध पुलिस की नजर में
इस संयुक्त अभियान के दौरान फिलहाल किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं की गई है। हालांकि पुलिस का कहना है कि वाहन चोरी, उनके परिवहन और दूसरे राज्य में बिक्री से जुड़े संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।
चराईदेव पुलिस का उद्देश्य केवल चोरी के वाहन बरामद करना नहीं, बल्कि वाहन चोरी से लेकर उन्हें सीमा पार पहुंचाने और दूसरे राज्य में बेचने तक सक्रिय पूरी श्रृंखला का पता लगाकर नेटवर्क को ध्वस्त करना है।
जनवरी में भी सामने आया था वाहनों की अवैध खरीद-बिक्री का मामला
इस संदर्भ में जनवरी 2026 में चराईदेव पुलिस की एक अन्य कार्रवाई भी उल्लेखनीय है। उस समय पुलिस ने असम और नगालैंड के बीच फाइनेंस पर लिए गए वाहनों की कथित अवैध खरीद-बिक्री से जुड़े एक अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए छह लोगों को गिरफ्तार और आठ वाहन बरामद किए थे।
उस जांच में दस्तावेजों में कथित जालसाजी, वित्तीय संस्थानों की अनुमति के बिना वाहनों की बिक्री और उन्हें नगालैंड पहुंचाने जैसे पहलू सामने आए थे।
हालांकि पुलिस की मौजूदा कार्रवाई सीधे तौर पर चोरी हुए दुपहिया वाहनों की बरामदगी से संबंधित है। इसलिए जनवरी के मामले और मौजूदा प्रकरण को एक ही नेटवर्क का हिस्सा मानना फिलहाल उचित नहीं होगा। इसके बावजूद पिछली कार्रवाई असम-नगालैंड सीमा के रास्ते वाहनों के अवैध कारोबार की चुनौती की पृष्ठभूमि जरूर सामने रखती है।
‘पैसे देकर खरीदा’ कहने से नहीं बचेगी कानूनी जिम्मेदारी
एसएसपी सुरजीत सिंह पानेसर ने अभियान के दौरान सामने आए एक अन्य पहलू को लेकर लोगों को विशेष रूप से आगाह किया। उन्होंने बताया कि कार्रवाई के दौरान कुछ लोगों ने पुलिस से कहा कि उन्होंने संबंधित मोटरसाइकिलें पैसे देकर खरीदी थीं और उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि वाहन चोरी के हैं।
पुलिस ने ऐसे लोगों को स्पष्ट किया कि चोरी की संपत्ति खरीदना भी कानूनन अपराध है। केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि वाहन के बदले पैसे दिए गए थे। बेहद कम कीमत पर, पर्याप्त दस्तावेजों के बिना अथवा संदिग्ध स्रोत से वाहन खरीदना खरीदार के लिए आर्थिक नुकसान के साथ कानूनी परेशानी का कारण भी बन सकता है।
ऐसे मामलों में चोरी का वाहन बरामद होने पर खरीदार वाहन और उसके लिए दिए गए पैसे—दोनों से वंचित हो सकता है तथा उसे कानूनी प्रक्रिया का भी सामना करना पड़ सकता है।
खरीदारी से पहले असम पुलिस से सत्यापन कराने की अपील
चराईदेव पुलिस ने मोन और आसपास के क्षेत्रों के लोगों से अपील की है कि यदि वे असम से कोई मोटरसाइकिल, स्कूटी अथवा अन्य दुपहिया वाहन खरीदने जा रहे हैं तो खरीदारी से पहले उसकी पृष्ठभूमि का सत्यापन अवश्य करा लें।
एसएसपी पानेसर के अनुसार, कोई व्यक्ति असम से दुपहिया वाहन खरीदना चाहता है तो पुलिस को इसकी जानकारी देकर संबंधित वाहन का सत्यापन कराया जा सकता है। चराईदेव पुलिस वाहन की पृष्ठभूमि और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच में सहयोग करेगी, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संबंधित वाहन चोरी का नहीं है और किसी आपराधिक मामले से जुड़ा नहीं है।
पुलिस ने इस संबंध में स्थानीय सिविल सोसायटी संगठनों को भी विस्तार से जानकारी दी है और उनसे लोगों के बीच जागरूकता फैलाने में सहयोग मांगा है। पुलिस के मुताबिक स्थानीय संगठनों की ओर से सकारात्मक सहयोग मिला है।
35 किलोमीटर की अंतरराज्यीय सीमा पर समन्वय बेहद अहम
चराईदेव जिला नगालैंड के साथ सीमा साझा करता है और जिला मुख्यालय सोनारी सड़क मार्ग से मोन जिले से जुड़ा है। चराईदेव जिले की नगालैंड के साथ करीब 35 किलोमीटर लंबी सीमा होने के कारण सीमा पार अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए दोनों राज्यों की पुलिस के बीच सूचनाओं का नियमित आदान-प्रदान और संयुक्त कार्रवाई विशेष महत्व रखती है।
एसएसपी पानेसर के मुताबिक पिछले करीब डेढ़ साल में चराईदेव पुलिस ने मोन जिला पुलिस एवं प्रशासन के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करने की दिशा में लगातार काम किया है। कई मामलों में जटिल परिस्थितियां और मतभेद सामने आने के बावजूद संवाद और समन्वय के जरिए सहयोग को मजबूत किया गया है।
उन्होंने कहा कि इसी बेहतर तालमेल के चलते पूर्व में उग्रवादी संगठनों से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई संभव हुई और अब वाहन चोरी के मामलों में महत्वपूर्ण सफलता हासिल हुई है।
स्थानीय नागरिक संगठनों का सहयोग भी बना अभियान की ताकत
असम-नगालैंड सीमावर्ती क्षेत्रों में पुलिस-प्रशासन के साथ नागरिक संगठनों का समन्वय भी इस अभियान का महत्वपूर्ण पहलू रहा। वर्ष 2023 में मोन और चराईदेव के नागरिक संगठनों ने सीमा क्षेत्र से जुड़े एक संवेदनशील मामले के बाद संयुक्त बैठक कर दोनों क्षेत्रों के बीच शांति, सहयोग और संवाद को मजबूत करने पर सहमति जताई थी।
मौजूदा अभियान में स्थानीय नागरिक संगठनों और विशेष रूप से कोन्याक यूनियन से मिले सहयोग ने एक बार फिर अंतरराज्यीय संवाद और स्थानीय भागीदारी की उपयोगिता को रेखांकित किया है।
27 वाहनों की बरामदगी शुरुआत, पूरे नेटवर्क को तोड़ने की तैयारी
एसएसपी सुरजीत सिंह पानेसर ने कहा कि पांच-छह साल पहले चोरी हुए वाहनों तक को दूसरे राज्य से तलाश कर वापस लाना चराईदेव पुलिस के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब पुलिस की पहली प्राथमिकता बरामद सभी 27 दुपहिया वाहनों के वास्तविक मालिकों की पहचान कर कानूनी प्रक्रिया के बाद उन्हें वापस सौंपना है।
इसके साथ ही मोन जिले में मौजूद करीब 200 अन्य संदिग्ध वाहनों का पता लगाने की दिशा में काम किया जाएगा। इसके लिए पुराने एफआईआर रिकॉर्ड, वाहन पंजीकरण विवरण, इंजन और चेसिस नंबर सहित अन्य सूचनाओं का मिलान किया जाएगा।
चराईदेव पुलिस ने साफ किया है कि अभियान यहीं समाप्त नहीं होगा। असम और नगालैंड पुलिस के आपसी समन्वय तथा स्थानीय संगठनों के सहयोग से मोन जिले में आगे भी चरणबद्ध कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का लक्ष्य असम से चोरी कर नगालैंड पहुंचाए गए दुपहिया वाहनों को वापस लाने के साथ-साथ वाहन चोरी, सीमा पार परिवहन और अवैध बिक्री से जुड़ी पूरी अंतरराज्यीय श्रृंखला को जड़ से खत्म करना है।




