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नोखा में एसबीआई बैंक घोटाला : 45 लाख की लिमिट पर 6.60 करोड़ का अवैध लेनदेन, सॉफ्टवेयर खामी का फायदा उठाकर व्यापारी ने रचाई बड़ी साजिश : आरोपी सांडवा थाना क्षेत्र के नब्बासर गांव निवासी व्यापारी अमृतलाल जाट गिरफ्तार

नोखा, 20 मई : राजस्थान के बीकानेर जिले के नोखा में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की सदर बाजार शाखा में एक चौंकाने वाला बैंक घोटाला सामने आया है। एक स्थानीय व्यापारी ने बैंक की तकनीकी खामी का फायदा उठाते हुए मात्र 45 लाख रुपये की क्रेडिट लिमिट वाले खाते से 6 करोड़ 60 लाख 63 हजार 305 रुपये का लेनदेन कर डाला। यह राशि स्वीकृत सीमा से करीब 15 गुना अधिक थी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और कोर्ट से तीन दिन की रिमांड प्राप्त की गई है।

घटना का विस्तार: कैसे हुआ सॉफ्टवेयर ग्लिच का फायदा?

सांडवा थाना क्षेत्र के नब्बासर गांव निवासी अमृतलाल जाट का नोखा स्थित एसबीआई शाखा में मैसर्स श्री बालाजी एग्रो इंडस्ट्रीज के नाम से कैश क्रेडिट (सीसी) लिमिट खाता संचालित था। बैंक ने इस खाते को केवल 45 लाख रुपये की क्रेडिट सीमा मंजूर की थी।

आरोपी ने बैंक के भुगतान सिस्टम और सॉफ्टवेयर अलर्ट सिस्टम में मौजूद तकनीकी खामी का लाभ उठाया। 3 दिसंबर 2024 से 20 दिसंबर 2024 (करीब 17-18 दिनों) के बीच उसने विभिन्न फर्मों के नाम पर करोड़ों रुपये के चेक जारी किए। इस दौरान कोई स्वचालित अलर्ट नहीं जारी हुआ, जिससे निर्धारित सीमा से कहीं अधिक लेनदेन बिना रुके पूरा हो गया।

21 दिसंबर 2024 को ऑनलाइन सिस्टम से अलर्ट मिलने पर बैंक अधिकारियों को इसकी जानकारी हुई। खाते की जांच में पता चला कि 45 लाख की लिमिट वाले खाते में 5 करोड़ 26 लाख रुपये से अधिक की बकाया राशि जमा हो चुकी थी। बैंक प्रबंधन में हड़कंप मच गया।

बैंक की शिकायत और पुलिस कार्रवाई

28 दिसंबर 2024 को एसबीआई शाखा प्रबंधक आनंद व्यास ने नोखा थाने में एफआईआर दर्ज कराई। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि अमृतलाल जाट ने बैंक को धोखा देने की नीयत से आपराधिक साजिश रची और निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक राशि विभिन्न फर्मों को चेक/RTGS के माध्यम से ट्रांसफर की। बैंक ने आशंका जताई कि आरोपी अन्य फर्मों और व्यक्तियों के साथ मिलीभगत में था।

नोखा थानाधिकारी अरविंद भारद्वाज के अनुसार जांच के दौरान बैंक प्रबंधन और खाताधारक को कई नोटिस जारी किए गए और पर्याप्त समय दिया गया। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अमृतलाल जाट को गिरफ्तार किया। आरोपी को कोर्ट में पेश कर तीन दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है, जहां पूछताछ जारी है।

रिकवरी और अन्य फर्मों की भूमिका

आरोपी ने बाद में कुछ रुपये बैंक में जमा करवाए। बैंक प्रबंधक के अनुसार अब तक 3.18 करोड़ रुपये की रिकवरी हो चुकी है। पुलिस जांच में पता चला कि आरोपी ने राजस्थान एग्रो, श्री सांवरिया सेठ एग्री एक्सपोर्ट, धरती एग्रो एक्सपोर्ट, कैस्ट्रोल एक्सपोर्ट इंडस्ट्रीज, स्वास्तिक एक्सपोर्ट्स आदि फर्मों के खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर की थी। आरोपी के खाते में 2 करोड़ 14 लाख रुपये विभिन्न माध्यमों से जमा भी हुए।

आरोपी का भतीजा ओम सारण भी मामले में शामिल बताया जा रहा है, जिसने करीब 1.65 करोड़ रुपये अपनी फर्म और निजी खातों में प्राप्त किए। कुछ राशि मंडी व्यापारियों से माल खरीदने में लगाई गई। पुलिस अब अन्य व्यक्तियों, फर्मों और संभावित मिलीभगत की जांच कर रही है।

आरोपी का स्थानीय रसूख

अमृतलाल जाट नब्बा ग्राम पंचायत में प्रभावशाली व्यक्ति माने जाते हैं। उनका पुत्र सरपंच है, जबकि उनकी पत्नी पहले गांव की सरपंच रह चुकी हैं। इसी कारण आरोपी का गांव में अच्छा खासा रसूख बताया जा रहा है।

बैंकिंग सिस्टम पर उठे सवाल

यह घटना एसबीआई के सॉफ्टवेयर सिस्टम और आंतरिक नियंत्रण की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। सामान्य परिस्थितियों में लिमिट पार होने पर ऑटोमैटिक होल्ड लग जाना चाहिए था, लेकिन खामी के कारण ऐसा नहीं हुआ। कुछ सूत्रों ने दो बैंक कर्मचारियों की लापरवाही की भी चर्चा की है।

यह मामला दिसंबर 2024 का है, लेकिन पुलिस की कार्रवाई और गिरफ्तारी मई 2026 में हुई। पुलिस जांच जारी है और आगे और खुलासे हो सकते हैं।

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