वरिष्ठ अधिवक्ता ओंकारमल माहेश्वरी के निधन से शोकाकुल हुआ असम : 65 वर्षों तक न्याय, समाजसेवा और शिक्षा को समर्पित रहा प्रेरणादायी जीवन : जोरहाट के वरिष्ठ अधिवक्ता, पूर्व बार अध्यक्ष, पूर्व अखिल असम अधिवक्ता संघ अध्यक्ष एवं समाजसेवी ओंकारमल माहेश्वरी (सोमानी) नहीं रहे : देरगांव से लेकर जोरहाट तक शोक की लहर
मारवाड़ी समाज, अधिवक्ता समुदाय, प्रशासन, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि; कहा—‘एक युग का हुआ अवसान’

देरगांव, 12 जुलाई : असम के विधि जगत, सामाजिक जीवन और मारवाड़ी समाज के लिए शनिवार का दिन अत्यंत दुःखद रहा। जोरहाट के वरिष्ठ अधिवक्ता, पूर्व बार अध्यक्ष, पूर्व अखिल असम अधिवक्ता संघ अध्यक्ष, प्रख्यात समाजसेवी तथा शिक्षा एवं जनसेवा के प्रति आजीवन समर्पित रहे सीनियर एडवोकेट ओंकारमल माहेश्वरी (सोमानी) का 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन के साथ ही असम ने एक ऐसे विधिवेत्ता, समाज सुधारक और कर्मयोगी व्यक्तित्व को खो दिया, जिन्होंने छह दशकों से अधिक समय तक न्याय, समाजसेवा, शिक्षा और जनहित के कार्यों में अपना अमूल्य योगदान दिया।

उनके निधन का समाचार मिलते ही देरगांव, जोरहाट सहित पूरे अपर असम में शोक की लहर दौड़ गई। अधिवक्ता समुदाय, प्रशासनिक अधिकारियों, विभिन्न सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक एवं व्यावसायिक संगठनों ने गहरा दुःख व्यक्त करते हुए उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।
शनिवार को अस्पताल में ली अंतिम सांस
91 वर्षीय श्री ओंकारमल माहेश्वरी पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। शनिवार तड़के अचानक उनकी तबीयत अधिक बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां दिन के लगभग 11:50 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
उनके निधन के बाद परिवार सहित पूरे समाज में शोक की लहर फैल गई। वे अपने पीछे पत्नी, दो पुत्र, बहुएं, पौत्र-पौत्रियों सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।
रविवार को निकलेगी अंतिम यात्रा
परिजनों के अनुसार रविवार को सभी पारंपरिक धार्मिक रस्मों के उपरांत दोपहर 3 बजे उनके पार्थिव शरीर को पहले जोरहाट लॉ कॉलेज ले जाया जाएगा, जहां विद्यार्थी, शिक्षक और अधिवक्ता उन्हें श्रद्धांजलि देंगे।
इसके बाद पार्थिव शरीर को जोरहाट वकील संस्था कार्यालय लाया जाएगा, जहां अधिवक्ता समुदाय अंतिम दर्शन कर श्रद्धासुमन अर्पित करेगा। तत्पश्चात केबी रोड स्थित उनके निवास से अपराह्न 4 बजे अंतिम यात्रा निकलेगी।
देरगांव की धरती पर जन्मा एक महान व्यक्तित्व
ओंकारमल माहेश्वरी का जन्म 1 नवंबर 1935 को गोलाघाट जिले के देरगांव स्थित प्रतिष्ठित सोमानी परिवार में हुआ था। उनके पिता स्वर्गीय मोतीलाल सोमानी स्थानीय स्तर पर किराना व्यवसाय करते थे।
बचपन से ही मेधावी और अनुशासित रहे ओंकारमल जी पढ़ाई के साथ-साथ पिता के व्यापार में भी हाथ बंटाते थे। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को ही अपने जीवन का सबसे बड़ा आधार बनाया।
उन्होंने 1953 में देरगांव हाई स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की।
शिक्षा में रहे सदैव अव्वल
मैट्रिक के बाद उन्होंने गुवाहाटी विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया और अपनी प्रतिभा का परिचय देते हुए—
वर्ष 1955 में आई.कॉम. में विश्वविद्यालय टॉपर बने।
वर्ष 1957 में वाणिज्य स्नातक (बी.कॉम.) की डिग्री प्राप्त की।
वर्ष 1960 में एम.ए. तथा एल.एल.बी. दोनों की उपाधियां प्राप्त कीं।
विशेष बात यह रही कि उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा असमिया माध्यम से प्राप्त की थी। बाद में उन्होंने स्वयं के प्रयासों से हिंदी भाषा सीखी और आगे चलकर हिंदी एवं असमिया दोनों भाषाओं में समान दक्षता प्राप्त की।
1961 से शुरू हुआ 65 वर्षों का गौरवशाली विधिक सफर
साल 1961 में उन्होंने जोरहाट न्यायालय में अधिवक्ता के रूप में अपनी प्रैक्टिस प्रारंभ की।
प्रारंभ में उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता राजेन बरुवा के मार्गदर्शन में कार्य किया। कुछ वर्षों बाद स्वतंत्र रूप से उन्होंने वकालत प्रारंभ की और शीघ्र ही अपने ज्ञान, तर्कशक्ति, ईमानदारी और अनुशासन के कारण न्यायिक जगत में विशिष्ट पहचान बना ली।
उन्होंने दीवानी, राजस्व, कर (टैक्स), संवैधानिक तथा अन्य अनेक महत्वपूर्ण मामलों की सफल पैरवी की।
करीब 65 वर्षों तक लगातार सक्रिय वकालत करते हुए वे 90 वर्ष की आयु तक भी न्यायालय में नियमित रूप से उपस्थित रहने वाले जोरहाट के संभवतः एकमात्र वरिष्ठ अधिवक्ता थे।
2004 में बने ‘डेजिगनेटेड सीनियर एडवोकेट’
उनकी उत्कृष्ट विधिक सेवाओं को देखते हुए गौहाटी उच्च न्यायालय ने वर्ष 2004 में उन्हें डेजिगनेटेड सीनियर एडवोकेट का सम्मान प्रदान किया।
यह सम्मान केवल उन अधिवक्ताओं को मिलता है जिन्होंने अपने कार्य, ज्ञान और नैतिक मूल्यों से न्याय व्यवस्था में असाधारण योगदान दिया हो।
बार एसोसिएशन और अधिवक्ता संगठनों के मजबूत स्तंभ
ओंकारमल माहेश्वरी केवल सफल अधिवक्ता ही नहीं थे, बल्कि अधिवक्ता संगठनों के भी मजबूत नेतृत्वकर्ता रहे।
उन्होंने जोरहाट बार एसोसिएशन के पांच बार अध्यक्ष के रूप में कार्य किया।
वर्ष 2009 में अखिल असम अधिवक्ता संघ (All Assam Lawyers Association) के अध्यक्ष निर्वाचित हुए।
बार काउंसिल ऑफ असम के सदस्य रहे।
पूर्वोत्तर राज्यों में अधिवक्ताओं के संगठनों को मजबूत बनाने में उल्लेखनीय भूमिका निभाई।
उनका मानना था कि अधिवक्ता केवल मुकदमे लड़ने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज का नैतिक मार्गदर्शक भी होता है।
राजनीति में भी निभाई जिम्मेदारी
ओंकारमल माहेश्वरी सामाजिक जीवन तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने 1968 में जोरहाट नगरपालिका चुनाव लड़ा और तत्कालीन डबल मेंबर प्रणाली में पार्षद निर्वाचित हुए।
इसके बाद 1973 में सिंगल मेंबर प्रणाली के अंतर्गत पुनः चुनाव लड़ा और प्रतिष्ठित उम्मीदवार स्वर्गीय शिवकिशन बाहेती को पराजित कर पुनः पार्षद बने।
उनका उद्देश्य राजनीति नहीं, बल्कि जनसेवा था।
शिक्षा जगत से भी रहा गहरा जुड़ाव
वकालत के साथ-साथ शिक्षा क्षेत्र में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा।
उन्होंने कुछ समय तक जेबी कॉलेज में अध्यापन किया।
इसके अलावा डीसीबी कॉलेज, सीकेबी कॉलेज, जोरहाट कॉलेज सहित अनेक शिक्षण संस्थानों की संचालन समितियों में सदस्य के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वे शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी माध्यम मानते थे।
समाजसेवा उनका जीवन धर्म था
ओंकारमल माहेश्वरी अनेक सामाजिक संगठनों से जुड़े रहे।
वे माहेश्वरी सभा जोरहाट के अध्यक्ष, माहेश्वरी सेवा न्यास के अध्यक्ष, श्री मारवाड़ी ठाकुरबाड़ी प्रबंधन समिति से जुड़े रहे, अपर असम चैंबर ऑफ कॉमर्स में सक्रिय भूमिका निभाई, नवयुवक मंडल के संरक्षक रहे।
इसके साथ ही विभिन्न ट्रस्टों एवं सामाजिक संस्थाओं के संविधान निर्माण में मार्गदर्शक बने।
उन्होंने अनेक संस्थाओं की ट्रस्ट डीड और संविधान तैयार करने में विधिक सहयोग दिया।
देरगांव मारवाड़ी पंचायत धर्मशाला के निर्माण में अमूल्य योगदान
देरगांव मारवाड़ी पंचायत धर्मशाला के मुख्य ट्रस्टी, प्रख्यात लेखक एवं साहित्यकार प्रदीप खदरिया ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि अधिवक्ता ओंकारमल माहेश्वरी मूलतः देरगांव की धरती के पुत्र थे।
उन्होंने कहा कि कार्य के कारण वे बाद में जोरहाट में बस गए, लेकिन उनका मन सदैव देरगांव में ही बसता रहा।
उन्होंने कहा कि देरगांव का कोई भी समाजबंधु किसी समस्या या कानूनी सलाह के लिए उनके पास जाता था तो वे बिना किसी स्वार्थ के उसका मार्गदर्शन करते थे। उन्होंने कभी किसी को निराश नहीं लौटाया।
धर्मशाला के संविधान निर्माण में निभाई ऐतिहासिक भूमिका
प्रदीप खदरिया ने बताया कि देरगांव मारवाड़ी पंचायत धर्मशाला के संविधान निर्माण में ओंकारमल माहेश्वरी की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इतना ही नहीं वर्षों तक धर्मशाला ट्रस्टी चुनाव के निर्वाचन अधिकारी रहे। हर चुनाव को निष्पक्ष, पारदर्शी और गरिमामय ढंग से सम्पन्न कराया। समाज में लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत किया। उनका यह योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।
सादगी, विनम्रता और सेवा का पर्याय थे ओंकारमल जी
उन्हें जानने वाले लोग बताते हैं कि वे अत्यंत सरल, सहज और अनुशासित व्यक्ति थे। उन्होंने कभी पद, प्रतिष्ठा या सम्मान का प्रदर्शन नहीं किया।
समाज का कोई भी व्यक्ति उनकी सहायता के लिए पहुंचता तो वे निःस्वार्थ भाव से उसका मार्गदर्शन करते। उनके व्यक्तित्व में विद्वता और विनम्रता का अद्भुत संतुलन दिखाई देता था।
प्रशासन और अधिवक्ता समुदाय ने व्यक्त किया शोक
जिला आयुक्त जय शिवानी ने उनके निधन पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि उनका जीवन अनुकरणीय और प्रेरणादायक रहा।
जोरहाट वकील संस्था के अध्यक्ष हेमेन बरुवा ने कहा कि हमने केवल एक वरिष्ठ अधिवक्ता नहीं, बल्कि अपने अभिभावक को खो दिया है।
ऑल असम लॉयर्स एसोसिएशन के सदस्य सीमांत बरठाकुर ने कहा कि काम के प्रति उनकी निष्ठा, अनुशासन और दायित्वबोध आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा है।
अनेक संस्थाओं ने दी श्रद्धांजलि
उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करने वालों में प्रमुख रूप से श्री मारवाड़ी ठाकुरबाड़ी प्रबंधन समिति जोरहाट, जोरहाट माहेश्वरी सभा, माहेश्वरी महिला संगठन जोरहाट, माहेश्वरी युवा संगठन जोरहाट, नवयुवक मंडल जोरहाट, अपर असम चैंबर ऑफ कॉमर्स, मारवाड़ी सम्मेलन, जोरहाट शाखा, मारवाड़ी युवा मंच जोरहाट शाखा, मारवाड़ी युवा मंच जोरहाट प्रगति शाखा, बाबा रामदेव सेवा समिति जोरहाट, जोरहाट जिला साहित्य सभा, जोरहाट बार एसोसिएशन, देरगांव मारवाड़ी समाज, पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन, पूर्वोत्तर प्रादेशिक माहेश्वरी सभा सहित विभिन्न अधिवक्ता संगठन, सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाएं और अनेकों शिक्षण संस्थान शामिल हैं।
‘समाज गौरव’ सहित अनेक सम्मानों से हुए सम्मानित
उनकी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें समय-समय पर अनेक प्रतिष्ठित सम्मान मिले। वर्ष 2009 में नवयुवक मंडल ने उन्हें ‘समाज गौरव’ सम्मान से अलंकृत किया। इसके अतिरिक्त अनेक सामाजिक, शैक्षणिक और धार्मिक संस्थाओं ने भी उन्हें सम्मानित किया।
इतना ही नहीं, ऐतिहासिक बालीबाट पुरानी मस्जिद की ओर से भी उन्हें विशेष सम्मान प्रदान किया गया था, जो उनके सर्वधर्म समभाव और सामाजिक स्वीकार्यता का प्रतीक माना जाता है।
परिवार भी बना समाज के लिए प्रेरणा
ओंकारमल माहेश्वरी ने अपने दोनों पुत्रों को उच्च शिक्षा दिलाई। उनके बड़े पुत्र डॉ. प्रदीप सोमानी चिकित्सा क्षेत्र में प्रतिष्ठित नाम हैं, जबकि दूसरे पुत्र सीए दिलीप सोमानी चार्टर्ड अकाउंटेंसी के क्षेत्र में अपनी पहचान रखते हैं।
वहीं उनके पौत्र परीक्षित सोमानी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उभरते हुए लॉन टेनिस खिलाड़ी हैं।
एक युग का अंत
ओंकारमल माहेश्वरी का निधन केवल एक वरिष्ठ अधिवक्ता का निधन नहीं, बल्कि न्याय, नैतिकता, समाजसेवा और मानवीय मूल्यों के एक युग का अवसान माना जा रहा है।
उन्होंने अपने जीवन से यह सिद्ध किया कि सफलता केवल पद और प्रतिष्ठा से नहीं, बल्कि समाज के प्रति समर्पण, ईमानदारी, सादगी और सेवा भावना से प्राप्त होती है।
उनकी स्मृतियां, उनके सिद्धांत और उनके द्वारा स्थापित आदर्श आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा बने रहेंगे। उनके जाने से उत्पन्न रिक्तता की भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं दिखती। असम का विधि जगत, सामाजिक क्षेत्र और विशेष रूप से देरगांव एवं जोरहाट का मारवाड़ी समाज उन्हें सदैव कृतज्ञता और सम्मान के साथ स्मरण करता रहेगा।
देरगांव से दीपक जैन की रिपोर्ट।




