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मारवाड़ी सम्मेलन के नाम का सहारा लेकर साइबर ठगों ने रचा जाल, समाजसेवी प्रदीप खदरिया से ₹19 हजार की ठगी : दुर्घटना में फंसे परिवार की मदद के नाम पर बनाया निशाना, फर्जी कहानी सुनाकर जीता विश्वास : प्रतिष्ठित सामाजिक संस्थाओं के नाम का दुरुपयोग कर भावनाओं से खिलवाड़, समाज से सतर्क रहने की अपील

देरगांव, 8 जुलाई : साइबर अपराधी अब केवल तकनीक के जरिए ही नहीं, बल्कि लोगों की भावनाओं, सामाजिक रिश्तों और विश्वास को हथियार बनाकर भी ठगी की घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला देरगांव से सामने आया है, जहां मारवाड़ी सम्मेलन जैसे प्रतिष्ठित सामाजिक संगठन का नाम लेकर एक समाजसेवी एवं लेखक श्री प्रदीप खदरिया को करीब ₹19,000 की साइबर ठगी का शिकार बनाया गया।

कानपुर से आया फोन, मारवाड़ी सम्मेलन से जुड़ाव बताकर जीता भरोसा

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 5 जुलाई की शाम करीब 7:34 बजे कानपुर के मोबाइल नंबर 8707575599 से श्री प्रदीप खदरिया को एक फोन आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम अजय अग्रवाला बताया और स्वयं को कानपुर मारवाड़ी सम्मेलन के पूर्व अध्यक्ष का पुत्र बताया।

उसने दावा किया कि उसे श्री खदरिया का मोबाइल नंबर दिल्ली स्थित मारवाड़ी सम्मेलन के एक पदाधिकारी से मिला है। सामाजिक संगठन और परिचय का हवाला दिए जाने के कारण शुरुआत में बात भरोसेमंद प्रतीत हुई।

काजीरंगा के पास हादसे की सुनाई झूठी कहानी

फोन करने वाले व्यक्ति ने बताया कि प्रयागराज निवासी उसके रिश्तेदार अविनाश अग्रवाला अपने परिवार के साथ सिलीगुड़ी से तिनसुकिया की ओर जा रहे थे। इसी दौरान काजीरंगा के नजदीक कुठरी क्षेत्र में उनकी फोर्ड एंडेवर गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त हो गई और परिवार मुश्किल परिस्थिति में फंस गया है।

इसके बाद अजय अग्रवाला ने कथित अविनाश अग्रवाला का मोबाइल नंबर 6394277827 श्री खदरिया को दिया और मदद करने का अनुरोध किया।

मानवता दिखाकर मदद के लिए आगे आए, लेकिन ठगों ने उठाया फायदा

श्री प्रदीप खदरिया ने इंसानियत के नाते तुरंत अविनाश अग्रवाला से संपर्क किया। रात 7:37 बजे से लेकर 9:59 बजे तक दोनों के बीच 11 बार बातचीत हुई।

बातचीत के दौरान ठहरने की व्यवस्था, परिवार के भोजन, 18 महीने की बच्ची के लिए दूध और अन्य जरूरी सुविधाओं को लेकर चर्चा होती रही। इससे पूरी घटना वास्तविक प्रतीत होने लगी।

इसी बीच कथित अविनाश अग्रवाला ने मोबाइल स्क्रीन टूट जाने और ऑनलाइन भुगतान करने में असमर्थता की बात कही। उसने गाड़ी के टायर बदलने और अन्य खर्चों के नाम पर एक दुकानदार का QR कोड भेजा।

परिवार को परेशानी में समझकर श्री खदरिया ने उस QR कोड के माध्यम से लगभग ₹19,000 का भुगतान कर दिया।

पैसे मिलने के बाद बदल गया रवैया, फोन उठाना किया बंद

रात में जब कथित परिवार देरगांव नहीं पहुंचा, तो अगले दिन फिर संपर्क किया गया। उस समय अविनाश अग्रवाला ने बताया कि गाड़ी देर रात तक ठीक नहीं हो सकी और सुबह मरम्मत के बाद देरगांव पहुंचकर पूरी राशि नकद वापस कर देगा।

पूरे घटनाक्रम के दौरान श्री खदरिया की अविनाश अग्रवाला से कुल 17 बार और अजय अग्रवाला से 3 बार बातचीत हुई। लेकिन इसके बाद दोनों मोबाइल नंबरों पर कॉल जाने के बावजूद किसी ने फोन उठाना बंद कर दिया।

इसके बाद साफ हो गया कि यह पूरी घटना एक सुनियोजित साइबर ठगी थी।

“यह सिर्फ पैसों की नहीं, सामाजिक विश्वास को चोट पहुंचाने वाली घटना” — प्रदीप खदरिया

घटना के बाद श्री प्रदीप खदरिया ने कहा कि यह केवल आर्थिक नुकसान का मामला नहीं है, बल्कि समाज में बने आपसी विश्वास और मानवीय भावनाओं को चोट पहुंचाने वाली घटना है।

उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि मारवाड़ी सम्मेलन और मारवाड़ी युवा मंच जैसी प्रतिष्ठित सामाजिक संस्थाओं का नाम लेकर लोगों की संवेदनाओं का गलत फायदा उठाना बेहद गंभीर विषय है।

समाज के लोगों से सावधान रहने की अपील

श्री खदरिया ने सभी लोगों से अपील की है कि आज के डिजिटल युग में मानवता के साथ सतर्कता भी बेहद जरूरी है। किसी भी अपरिचित व्यक्ति द्वारा किसी संस्था, परिचित व्यक्ति या सामाजिक संबंधों का हवाला देकर आर्थिक सहायता मांगने पर पहले पूरी जांच-पड़ताल और पुष्टि अवश्य करें।

यह घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि साइबर अपराधी अब भावनाओं और भरोसे को भी अपना हथियार बना रहे हैं, इसलिए जागरूकता और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।

देरगांव से दीपक जैन की रिपोर्ट।

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