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डिमौ में शराब और नशे के बढ़ते कारोबार के खिलाफ आटसा का मोर्चा : मुख्यमंत्री और शिवसागर के अभिभावक मंत्री को सौंपा ज्ञापन : चाय बागानों के आसपास अवैध शराब एवं नशीले पदार्थों की बिक्री पर तत्काल रोक लगाने की मांग

युवाओं के भविष्य पर मंडरा रहे खतरे को लेकर आंदोलन की चेतावनी : कार्रवाई नहीं होने पर होगा व्यापक जनआंदोलन

शिवसागर, 2 जुलाई : शिवसागर जिले के चाय बागान बहुल क्षेत्रों में बढ़ते अवैध शराब और नशीले पदार्थों के कारोबार को लेकर असम चाय जनजाति छात्र संस्था (आटसा) की डिमौ शाखा ने राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित करते हुए कड़ा रुख अपनाया है। संगठन ने गुरुवार को डिमौ सह जिला आयुक्त कार्यालय के सामने धरना प्रदर्शन करते हुए जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के अंत में सह जिला आयुक्त के जरिए असम के मुख्यमंत्री तथा शिवसागर जिले के अभिभावक मंत्री बिमल बोरा को अलग-अलग ज्ञापन सौंपकर चाय बागानों एवं आसपास के क्षेत्रों में तेजी से फैल रहे अवैध शराब और नशीले पदार्थों के कारोबार पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने तथा दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो यह समस्या आने वाले समय में चाय जनजाति समुदाय के युवाओं और पूरे समाज के लिए गंभीर संकट का रूप ले सकती है।

चाय बागानों में बढ़ती नशाखोरी पर जताई गंभीर चिंता

आटसा डिमौ शाखा के अध्यक्ष विश्वनाथ नाग तथा सचिव अमन मिर्धा द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन में कहा गया है कि हाल के वर्षों में चाय बागानों की लाइनों तथा आसपास के क्षेत्रों में अवैध शराब के निर्माण, बिक्री और विदेशी एवं स्थानीय मादक पदार्थों के कारोबार में चिंताजनक वृद्धि हुई है। संगठन के अनुसार इस अवैध कारोबार का सबसे अधिक दुष्प्रभाव चाय जनजाति समुदाय के युवाओं पर पड़ रहा है, जो तेजी से नशे की गिरफ्त में आते जा रहे हैं। इससे सामाजिक, आर्थिक और पारिवारिक जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

शराब की दुकानों को लेकर भी उठाए सवाल

ज्ञापन में संगठन ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार द्वारा बड़ी संख्या में स्थानीय शराब की दुकानों के लिए लाइसेंस जारी किए जाने के बाद अनेक व्यवसायियों ने चाय बागानों के निकट घनी आबादी वाले क्षेत्रों में शराब की दुकानें संचालित करनी शुरू कर दी हैं। संगठन का दावा है कि स्थानीय लोगों से लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि इन दुकानों के कारण क्षेत्र में नशाखोरी बढ़ रही है और युवा वर्ग तेजी से इसकी चपेट में आ रहा है।

आटसा का कहना है कि चाय बागानों के समीप इस प्रकार की दुकानों का संचालन सामाजिक दृष्टि से उचित नहीं है और इससे क्षेत्र में अपराध तथा कानून-व्यवस्था संबंधी समस्याओं की आशंका भी बढ़ रही है।

‘युवाओं का भविष्य दांव पर’

संगठन ने ज्ञापन में कहा है कि यह केवल शराब अथवा मादक पदार्थों की बिक्री का मामला नहीं है, बल्कि चाय जनजाति समुदाय की नई पीढ़ी के भविष्य, सामाजिक सुरक्षा और समुदाय के समग्र विकास से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है। यदि समय रहते इस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में इसके दूरगामी और गंभीर सामाजिक परिणाम सामने आ सकते हैं।

आटसा ने कहा कि नशे की बढ़ती प्रवृत्ति शिक्षा, रोजगार, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक समरसता को भी प्रभावित कर रही है, जिसे रोकना सरकार और प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

मुख्यमंत्री और अभिभावक मंत्री से की ये प्रमुख मांगें

आटसा ने मुख्यमंत्री एवं शिवसागर के अभिभावक मंत्री से मांग की है कि चाय बागानों एवं आसपास संचालित सभी अवैध शराब अड्डों तथा नशीले पदार्थों के कारोबार के विरुद्ध तत्काल विशेष अभियान चलाया जाए। इसके साथ ही चाय बागानों के समीप संचालित शराब दुकानों की समीक्षा कर संवेदनशील क्षेत्रों में उनके संचालन पर रोक लगाने की भी मांग की गई है।

संगठन ने यह भी आग्रह किया कि पुलिस, आबकारी विभाग तथा जिला प्रशासन के संयुक्त अभियान के माध्यम से ऐसे क्षेत्रों में नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।

जनआंदोलन की दी चेतावनी

आटसा डिमौ शाखा ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की, तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन शुरू करेगा। संगठन का कहना है कि युवाओं के भविष्य की रक्षा और चाय बागान क्षेत्रों को नशामुक्त बनाने के लिए उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक अवैध शराब और नशीले पदार्थों के कारोबार पर प्रभावी अंकुश नहीं लगाया जाता।

प्रशासन के विभिन्न विभागों को भी भेजी गई ज्ञापन की प्रतिलिपि

संगठन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ज्ञापन की प्रतिलिपि शिवसागर के जिला आयुक्त, जिला पुलिस अधीक्षक, डिमौ के सहायक पुलिस अधीक्षक, आबकारी विभाग तथा डिमौ थाना प्रभारी को भी भेजी है। संगठन ने सभी संबंधित विभागों से समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने की अपील करते हुए कहा कि केवल सामूहिक प्रयासों से ही चाय बागान क्षेत्रों को नशे के बढ़ते प्रभाव से बचाया जा सकता है।

नशामुक्त समाज की दिशा में सामूहिक पहल की आवश्यकता

आटसा ने अपने ज्ञापन के माध्यम से कहा कि चाय जनजाति समुदाय की सामाजिक उन्नति, युवाओं के सुरक्षित भविष्य और क्षेत्र में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सरकार, प्रशासन और समाज के सभी वर्गों को मिलकर प्रभावी कदम उठाने होंगे। संगठन ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र ठोस कार्रवाई करेगी, जिससे चाय बागान क्षेत्रों में बढ़ रहे अवैध शराब और नशीले पदार्थों के कारोबार पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

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