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डिमौ में तेंदुए से भिड़े 60 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग, अदम्य साहस से बचाई अपनी जान : अंधेरी शाम में तेंदुए के हमले से मचा हड़कंप : तीन बैटरी वाली टॉर्च से किया मुकाबला : गंभीर रूप से घायल बुजुर्ग अस्पताल में भर्ती

पालेंगी एरालतली गांव में दहशत : ग्रामीणों ने वन विभाग से तत्काल कार्रवाई और निगरानी बढ़ाने की उठाई मांग

शिवसागर, 29 जून : असम के शिवसागर जिले के डिमौ क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक बेहद रोमांचक और चिंताजनक घटना सामने आई है। डिमौ के पालेंगी एरालतली गांव निवासी 60 वर्ष से अधिक आयु के अच्युत चांगमाई ने अंधेरी शाम में तेंदुए के अचानक हुए हमले का अद्भुत साहस और सूझबूझ के साथ सामना किया। जानलेवा हमले के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आत्मरक्षा करते हुए तेंदुए को खदेड़ दिया। हालांकि इस संघर्ष में वह गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तत्काल डिमौ मॉडल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार जारी है।

शाम की सैर के दौरान अचानक हुआ आमना-सामना

प्राप्त जानकारी के अनुसार, अच्युत चांगमाई रोज की तरह सोमवार को भी शाम के समय टहलने के लिए निकले थे। अंधेरा होने के कारण दृश्यता कम थी। इसी दौरान अचानक उनका सामना एक तेंदुए से हो गया। इससे पहले कि वे कुछ समझ पाते, तेंदुए ने उन पर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले से कुछ पल के लिए स्थिति बेहद भयावह हो गई, लेकिन अच्युत चांगमाई ने असाधारण धैर्य और साहस का परिचय देते हुए घबराने के बजाय पूरी मजबूती से मुकाबला किया।

तीन बैटरी वाली टॉर्च बनी जीवनरक्षक हथियार

हमले के दौरान अच्युत चांगमाई के हाथ में तीन बैटरी वाली बड़ी टॉर्च थी। आत्मरक्षा के लिए उन्होंने उसी टॉर्च से तेंदुए पर लगातार वार किए। उनके अप्रत्याशित प्रतिरोध से तेंदुआ घबरा गया और अंततः वहां से भाग निकला। ग्रामीणों का कहना है कि यदि उन्होंने साहस नहीं दिखाया होता तो घटना और भी भयावह रूप ले सकती थी।

संघर्ष में गंभीर रूप से घायल, अस्पताल में उपचार जारी

तेंदुए के हमले के दौरान अच्युत चांगमाई गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों ने उन्हें तत्काल डिमौ मॉडल हॉस्पिटल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका इलाज किया जा रहा है। घटना के बाद गांव में चिंता और भय का माहौल बना हुआ है।

पालेंगी एरालतली गांव में दहशत, वन विभाग से कार्रवाई की मांग

घटना के बाद पालेंगी एरालतली गांव सहित आसपास के क्षेत्रों में लोगों में दहशत व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में तेंदुए की मौजूदगी अब लोगों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुकी है। उन्होंने वन विभाग से तत्काल क्षेत्र में गश्त बढ़ाने, तेंदुए की गतिविधियों की निगरानी करने, आवश्यक रेस्क्यू अभियान चलाने तथा ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

असम में बढ़ रहा मानव-वन्यजीव संघर्ष

असम के विभिन्न हिस्सों में पिछले कुछ समय से मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों, चाय बागानों और वन क्षेत्रों से सटे गांवों में तेंदुए, हाथी तथा अन्य जंगली जानवरों के आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश करने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इससे स्थानीय लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ी है और वन विभाग के सामने भी नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।

भौगोलिक परिस्थितियां बढ़ा रही हैं जोखिम

डिमौ और उसके आसपास के क्षेत्रों में चाय बागान, खेत, नदी किनारे के इलाके तथा घनी झाड़ियां बड़ी संख्या में मौजूद हैं। ये इलाके वन्यजीवों के प्राकृतिक आवागमन के मार्ग माने जाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि विशेषकर शाम और रात के समय ऐसे क्षेत्रों में अकेले निकलने से बचना चाहिए तथा किसी भी वन्यजीव की गतिविधि दिखाई देने पर तत्काल वन विभाग को सूचना देनी चाहिए।

साहस की मिसाल बने अच्युत चांगमाई

60 वर्ष से अधिक आयु में जिस अदम्य साहस और सूझबूझ के साथ अच्युत चांगमाई ने तेंदुए जैसे खतरनाक शिकारी का सामना किया, वह पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। उनकी बहादुरी की लोग खुलकर सराहना कर रहे हैं। हालांकि यह घटना एक गंभीर चेतावनी भी है कि डिमौ क्षेत्र में वन्यजीवों की बढ़ती आवाजाही को लेकर तत्काल प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है। ग्रामीणों ने वन विभाग से नियमित गश्त, निगरानी बढ़ाने और लोगों को सुरक्षा संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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