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तिनसुकिया में बड़ी आतंकी साजिश नाकाम : जागुन में खुफिया इनपुट पर पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों का संयुक्त ऑपरेशन : ULFA(I) के दो शीर्ष कैडर गिरफ्तार : 2 AK-56 राइफल, 172 कारतूस, 2 हैंड ग्रेनेड सहित भारी मात्रा में हथियार बरामद

तिनसुकिया जिले में निर्दोष नागरिकों पर बड़े हमले की आशंका को समय रहते किया गया विफल

तिनसुकिया, 26 जून : असम में आतंकवाद के खिलाफ जारी अभियान के तहत तिनसुकिया पुलिस ने केंद्रीय सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियों के सहयोग से शुक्रवार को एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (इंडिपेंडेंट) [ULFA(I)] की एक कथित बड़ी आतंकी साजिश को विफल कर दिया।

जिले के सीमावर्ती जागुन क्षेत्र में खुफिया सूचना के आधार पर चलाए गए विशेष अभियान में संगठन के दो शीर्ष सक्रिय कैडरों को गिरफ्तार किया गया। उनके कब्जे से अत्याधुनिक हथियार, भारी मात्रा में गोलाबारूद, हैंड ग्रेनेड, दवाइयां, ओपिओइड्स तथा जंगल में लंबे समय तक रहने के लिए उपयोग की जाने वाली युद्ध सामग्री बरामद हुई है।

पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि दोनों कैडरों को तिनसुकिया शहर में आम नागरिकों को निशाना बनाकर अंधाधुंध हिंसा फैलाने तथा व्यापक दहशत का माहौल बनाने का दायित्व सौंपा गया था। समय रहते हुई इस कार्रवाई ने संभावित जनहानि और बड़े आतंकी हमले की आशंका को टाल दिया।

खुफिया सूचना के बाद तैयार की गई विशेष रणनीति

विश्वसनीय खुफिया इनपुट मिलने के बाद तिनसुकिया पुलिस ने केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर एक विशेष अभियान की योजना बनाई। कई दिनों तक संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के बाद जागुन क्षेत्र में घेराबंदी कर दोनों उग्रवादियों को दबोच लिया गया। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि ऑपरेशन पूरी तरह योजनाबद्ध तरीके से संचालित किया गया, जिससे किसी प्रकार की जनहानि या मुठभेड़ की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई।

गिरफ्तार दोनों शीर्ष ULFA(I) कैडरों की पहचान

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान संगठन के सेल्फ स्टाइल्ड सेकेंड लेफ्टिनेंट सियोर असम उर्फ हुमेनज्योति बरुआ (27 वर्ष), पिता उत्तम बरुआ, निवासी पानीटोला, तिनसुकिया, तथा सेल्फ स्टाइल्ड सेकेंड लेफ्टिनेंट मनोज असम उर्फ पापू मोरान (30 वर्ष), पिता डाइसेम मोरान, निवासी बाघजान, तिनसुकिया के रूप में हुई है।

पुलिस के अनुसार दोनों लंबे समय से ULFA(I) की सक्रिय गतिविधियों से जुड़े हुए थे और संगठन के लिए संवेदनशील अभियानों में शामिल रहे हैं।

भारी मात्रा में हथियार बरामद

कार्रवाई के दौरान सुरक्षा बलों ने दोनों के कब्जे से 2 AK-56 असॉल्ट राइफल, AK श्रृंखला के 172 जिंदा कारतूस, 2 हैंड ग्रेनेड, दवाइयों की किट, सीरिंज एवं ओपिओइड्स, जंगल में जीवित रहने के लिए खाद्य सामग्री, बैकपैक और अन्य युद्ध एवं सर्वाइवल सामग्री बरामद की है।

बरामद सामग्री से स्पष्ट संकेत मिलता है कि दोनों किसी दीर्घकालिक अभियान की तैयारी में थे तथा जंगल में रहकर गुप्त गतिविधियां संचालित करने के लिए पूरी तरह तैयार थे।

निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने की थी कथित योजना

तिनसुकिया पुलिस के अनुसार प्रारंभिक पूछताछ से यह जानकारी सामने आई है कि दोनों उग्रवादियों को तिनसुकिया शहर में आम नागरिकों पर अंधाधुंध हमला कर भय और अस्थिरता का वातावरण पैदा करने का निर्देश दिया गया था।

पुलिस का कहना है कि प्रस्तावित हमले की प्रकृति से यह संकेत मिलता है कि इसका उद्देश्य केवल जनहानि करना नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में आतंक का माहौल बनाना और कानून-व्यवस्था को चुनौती देना भी था।

बाहरी प्रभाव और विदेशी कनेक्शन की भी जांच

जांच एजेंसियों का मानना है कि हमले की कथित योजना और उसकी कार्यप्रणाली से बाहरी तत्वों के प्रभाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी कारण पूरे मामले की जांच कई स्तरों पर की जा रही है।

सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या इस साजिश को सीमा पार से किसी प्रकार का मार्गदर्शन, प्रशिक्षण अथवा रसद समर्थन प्राप्त था।

म्यांमार से अरुणाचल के रास्ते असम आने की आशंका

जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार प्रारंभिक पूछताछ में संकेत मिले हैं कि दोनों उग्रवादी म्यांमार से अरुणाचल प्रदेश के रास्ते असम में दाखिल हुए थे।

हालांकि इस संबंध में अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन पुलिस एवं केंद्रीय एजेंसियां पूरे रूट, सीमा पार संपर्कों तथा संभावित सहयोगियों की गहन जांच कर रही हैं।

स्विफ्ट कार के माध्यम से प्रवेश करने की जांच

सूत्रों के अनुसार दोनों उग्रवादी AR-20A-5892 नंबर की स्विफ्ट कार के माध्यम से असम में प्रवेश किए थे। पुलिस ने वाहन के स्वामित्व, उसकी आवाजाही तथा उससे जुड़े व्यक्तियों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है।

यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस वाहन का उपयोग केवल परिवहन के लिए किया गया था अथवा इसके माध्यम से हथियार और अन्य सामग्री भी पहुंचाई गई थी।

जागुन क्यों है सुरक्षा एजेंसियों के लिए अहम?

जागुन क्षेत्र असम और अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित होने के कारण लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए संवेदनशील माना जाता रहा है। घने जंगल, दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां तथा सीमावर्ती संपर्क मार्ग उग्रवादी संगठनों के लिए कई बार आवाजाही का माध्यम रहे हैं।

इसी कारण पिछले कुछ वर्षों में इस पूरे क्षेत्र में पुलिस, सेना तथा केंद्रीय एजेंसियों ने खुफिया निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत किया है।

पहले भी टूट चुका है ULFA(I) का नेटवर्क

गौरतलब है कि हाल के महीनों में तिनसुकिया और आसपास के इलाकों में ULFA(I) के खिलाफ कई महत्वपूर्ण अभियान चलाए गए हैं। अप्रैल 2026 में असम पुलिस और अरुणाचल प्रदेश पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में संगठन से जुड़े सात संदिग्ध लिंकमैन गिरफ्तार किए गए थे।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि लगातार की जा रही कार्रवाई से संगठन के स्थानीय नेटवर्क और रसद तंत्र को कमजोर करने में सफलता मिल रही है।

पूरे मॉड्यूल का पर्दाफाश करने में जुटीं एजेंसियां

पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि गिरफ्तार दोनों उग्रवादियों को स्थानीय स्तर पर किसने सहयोग दिया, हथियार और विस्फोटक किस माध्यम से उपलब्ध कराए गए तथा उनके संपर्क में कौन-कौन लोग थे।

इसके अलावा बरामद हथियारों, विस्फोटकों, दवाइयों, इलेक्ट्रॉनिक सामग्री तथा अन्य वस्तुओं की फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

कानूनी कार्रवाई शुरू, जांच जारी

तिनसुकिया पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों के विरुद्ध संबंधित कानूनी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर विधिसम्मत कार्रवाई शुरू कर दी गई है। केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से मामले के प्रत्येक पहलू की गहन जांच जारी है।

पुलिस का कहना है कि यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

समय रहते टली संभावित बड़ी त्रासदी

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बरामद हथियारों, गोलाबारूद और हैंड ग्रेनेड की मात्रा को देखते हुए यदि समय रहते यह कार्रवाई नहीं होती तो तिनसुकिया जिले में गंभीर जनहानि हो सकती थी।

पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों की इस संयुक्त कार्रवाई को हाल के समय की सबसे महत्वपूर्ण आतंकवाद विरोधी सफलताओं में से एक माना जा रहा है। इस ऑपरेशन ने न केवल संभावित आतंकी हमले को विफल किया, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि सुरक्षा एजेंसियां राज्य में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरी सतर्कता और समन्वय के साथ कार्य कर रही हैं।

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