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माँ कामाख्या की सेवा में समर्पित मारवाड़ी सम्मेलन गुवाहाटी मेट्रो शाखा : अम्बुबाची महापर्व पर 5 दिवसीय निःशुल्क छाता वितरण सेवा शिविर बना मानव सेवा और श्रद्धा का प्रेरणादायी उदाहरण : लगातार वर्षा के बीच 5,000 से अधिक श्रद्धालुओं को वितरित किए गए निःशुल्क छाते : ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ के भाव को किया साकार

गुवाहाटी, 26 जून : विश्वविख्यात शक्तिपीठ माँ कामाख्या धाम में आयोजित पावन अम्बुबाची महापर्व के अवसर पर श्रद्धा, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व का अनुपम संगम देखने को मिला। मारवाड़ी सम्मेलन, गुवाहाटी मेट्रो शाखा द्वारा 22 जून से 26 जून 2026 तक आयोजित पाँच दिवसीय निःशुल्क अम्ब्रेला (छाता) वितरण सेवा शिविर ने हजारों श्रद्धालुओं की यात्रा को सुगम बनाने के साथ-साथ मानव सेवा की उत्कृष्ट मिसाल प्रस्तुत की।

लगातार वर्षा के बीच माँ कामाख्या के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से चलाए गए इस सेवा अभियान के अंतर्गत 5,000 से अधिक छाते निःशुल्क वितरित किए गए। सेवा शिविर के माध्यम से देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं को वर्षा से सुरक्षा मिली और वे अधिक सहजता एवं श्रद्धा के साथ माँ के दर्शन कर सके।

सेवा ही संगठन की पहचान

मारवाड़ी सम्मेलन, गुवाहाटी मेट्रो शाखा अपनी स्थापना काल से ही समाज सेवा, मानव कल्याण, धार्मिक गतिविधियों, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, रक्तदान, राहत कार्य तथा सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों का सफलतापूर्वक संचालन करती रही है। शाखा का उद्देश्य केवल सामाजिक संगठन के रूप में कार्य करना नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग तक सेवा की भावना पहुंचाना भी है।

अम्बुबाची महापर्व के दौरान आयोजित यह सेवा शिविर उसी सतत सेवा परंपरा का एक सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया।

माँ कामाख्या के चरणों में समर्पित सेवा का अनूठा संकल्प

अम्बुबाची महापर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और आध्यात्मिक विश्वास का महापर्व है। इस अवसर पर देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु नीलाचल पर्वत स्थित माँ कामाख्या धाम पहुंचते हैं।

असम में मानसून के दौरान होने वाले इस महापर्व में लगातार वर्षा श्रद्धालुओं की यात्रा को कठिन बना देती है। ऐसे समय में मारवाड़ी सम्मेलन गुवाहाटी मेट्रो शाखा ने सेवा को ही सर्वोच्च धर्म मानते हुए पांच दिनों तक लगातार निःशुल्क छाता वितरण अभियान चलाया। यह सेवा केवल सुविधा प्रदान करने तक सीमित नहीं रही, बल्कि श्रद्धालुओं के प्रति सम्मान, संवेदना और धार्मिक समर्पण की भावना का भी जीवंत उदाहरण बनी।

5,000 से अधिक श्रद्धालुओं तक पहुँची सेवा

पाँच दिनों तक चले इस अभियान में प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने सेवा कार्य में भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान 5,000 से अधिक छाते श्रद्धालुओं के बीच वितरित किए गए।

श्रद्धालुओं ने इस सेवा कार्य की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए कहा कि वर्षा के बीच यह सहयोग उनके लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुआ और इससे उन्हें माँ कामाख्या के दर्शन करने में काफी सुविधा मिली।

गौतम गोयनका के नेतृत्व में सफल हुआ अभियान

यह सेवा शिविर शाखा के उपाध्यक्ष श्री गौतम गोयनका के नेतृत्व में आयोजित किया गया। उनके कुशल मार्गदर्शन तथा शाखा के पदाधिकारियों, सदस्यों एवं स्वयंसेवकों के सामूहिक प्रयासों से सम्पूर्ण आयोजन अत्यंत व्यवस्थित एवं सफल रहा।

शिविर के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा, वितरण व्यवस्था तथा सेवा संचालन का विशेष ध्यान रखा गया, जिससे पूरे कार्यक्रम में अनुशासन और सेवा भावना का उत्कृष्ट समन्वय देखने को मिला।

इन संयोजकों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका

सेवा शिविर के सफल संचालन में श्री पीयूष गनेरीवाल, श्री हरीश अग्रवाल तथा श्री राजेश गुप्ता ने संयोजक के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इन तीनों ने आयोजन की योजना तैयार करने, वितरण व्यवस्था सुनिश्चित करने, स्वयंसेवकों के समन्वय तथा सम्पूर्ण सेवा अभियान को सुचारु रूप से संचालित करने में उल्लेखनीय योगदान दिया।

स्वयंसेवकों ने दिया सेवा और संस्कार का परिचय

अभियान के दौरान शाखा के अनेक पदाधिकारियों, सदस्यों एवं स्वयंसेवकों ने पूरे समर्पण के साथ सेवा कार्य में भाग लिया। सभी स्वयंसेवकों ने श्रद्धालुओं का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें निःशुल्क अम्ब्रेला उपलब्ध कराए।

उनकी विनम्रता, अनुशासन और सेवाभाव ने मारवाड़ी समाज की संस्कृति, सहयोग और सामाजिक उत्तरदायित्व की गौरवशाली परंपरा को सशक्त रूप से प्रस्तुत किया।

सामाजिक उत्तरदायित्व और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम

मारवाड़ी सम्मेलन गुवाहाटी मेट्रो शाखा का यह सेवा अभियान केवल एक वितरण कार्यक्रम नहीं था, बल्कि समाज के प्रति संगठन की संवेदनशीलता और धार्मिक आस्था का जीवंत उदाहरण भी बना।

सेवा शिविर ने यह संदेश दिया कि सच्ची भक्ति केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं होती, बल्कि जरूरतमंदों की सहायता, श्रद्धालुओं की सुविधा और मानवता की सेवा में भी ईश्वर की उपासना निहित होती है।

गौतम गोयनका का संबोधन

शाखा के उपाध्यक्ष श्री गौतम गोयनका ने कहा कि “माँ कामाख्या” की असीम कृपा से हमें श्रद्धालुओं की सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। मारवाड़ी सम्मेलन सदैव ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ के सिद्धांत पर कार्य करता आया है। अम्बुबाची महापर्व जैसे दिव्य अवसर पर श्रद्धालुओं की छोटी-सी सहायता भी हमारे लिए माँ की सेवा के समान है। भविष्य में भी शाखा समाजहित, जनकल्याण और धार्मिक सेवा के ऐसे कार्य पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ करती रहेगी।

शाखाध्यक्ष एवं सचिव ने दी शुभकामनाएं

मारवाड़ी सम्मेलन गुवाहाटी मेट्रो शाखा के शाखाध्यक्ष अमित कुमार कंसल एवं सचिव नवीन हरलालका ने पांच दिवसीय निःशुल्क छाता वितरण सेवा शिविर के सफल आयोजन पर सभी पदाधिकारियों, संयोजकों, स्वयंसेवकों एवं सहयोगी सदस्यों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने कहा कि माँ कामाख्या की असीम कृपा, समाजबंधुओं के सहयोग तथा स्वयंसेवकों की निस्वार्थ सेवा भावना से यह अभियान अत्यंत सफल रहा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में भी शाखा “नर सेवा ही नारायण सेवा” के मूल मंत्र को आत्मसात करते हुए समाजहित एवं जनकल्याण के ऐसे सेवा कार्य पूरे समर्पण और श्रद्धाभाव के साथ निरंतर संचालित करती रहेगी।

शाखा ने सभी सहयोगियों का जताया आभार

मारवाड़ी सम्मेलन गुवाहाटी मेट्रो शाखा के पदाधिकारियों ने इस सेवा अभियान को सफल बनाने वाले सभी स्वयंसेवकों, शुभाकांक्षी सहयोगियों, दानदाताओं तथा प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े सभी महानुभावों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समाज के सहयोग और माँ कामाख्या की कृपा से भविष्य में भी ऐसे जनकल्याणकारी एवं सेवा कार्य निरंतर आयोजित किए जाते रहेंगे।

सेवा, श्रद्धा और समर्पण का प्रेरणादायी संदेश

पाँच दिवसीय निःशुल्क छाता वितरण सेवा शिविर ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि जब सामाजिक संगठन धार्मिक आस्था और सेवा भावना के साथ कार्य करते हैं, तब उनका प्रत्येक प्रयास समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है।

मारवाड़ी सम्मेलन, गुवाहाटी मेट्रो शाखा का यह सेवा अभियान न केवल हजारों श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी सिद्ध हुआ, बल्कि यह संदेश भी दे गया कि “मानव सेवा ही सबसे बड़ी साधना है और समाज के प्रति समर्पण ही सच्ची श्रद्धा का स्वरूप है।”

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