अरुणाचल प्रदेश के चांगलांग में शांति की ओर बड़ा कदम : तीन एनएससीएन कैडरों ने छोड़ा उग्रवाद का रास्ता : एनएससीएन-आर के दो और एनएससीएन-आईएम के एक कैडर ने किया आत्मसमर्पण
परिवार और पुलिस की काउंसलिंग का असर : मुख्यधारा में लौटकर नया जीवन शुरू करने का लिया संकल्प

न्यूज डेस्क, 23 जून : अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती चांगलांग जिले में शांति और सामाजिक पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। लंबे समय से उग्रवादी गतिविधियों से जुड़े तीन युवाओं ने हिंसा का मार्ग त्यागकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है। इनमें एनएससीएन-आर (NSCN-R) के दो कैडर तथा एनएससीएन-आईएम (NSCN-IM) का एक कैडर शामिल है, जिन्होंने स्वेच्छा से चांगलांग जिला पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर शांतिपूर्ण जीवन अपनाने की इच्छा व्यक्त की।
यह आत्मसमर्पण केवल तीन व्यक्तियों का निर्णय नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे क्षेत्र में शांति स्थापना, सामाजिक समावेशन और उग्रवाद प्रभावित युवाओं के पुनर्वास की दिशा में एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

परिवार और समाज की भूमिका रही निर्णायक
पुलिस अधिकारियों के अनुसार,आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे थे। परिवार के सदस्यों, स्थानीय समुदाय और पुलिस प्रशासन द्वारा लगातार संवाद तथा काउंसलिंग की गई, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए।
बताया गया कि इन युवाओं ने महसूस किया कि हिंसा और अवैध गतिविधियों के रास्ते पर चलकर न तो उनका भविष्य सुरक्षित हो सकता है और न ही समाज का विकास संभव है। इसी सोच के साथ उन्होंने हथियार छोड़कर सामान्य जीवन अपनाने का फैसला किया।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि परिवारों की भूमिका इस प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण रही। परिजनों ने लगातार युवाओं को समझाया कि शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जीवन के माध्यम से भी सम्मानजनक भविष्य बनाया जा सकता है।
मुख्यधारा में लौटकर बेहतर भविष्य बनाने का संकल्प
आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं ने पुलिस अधिकारियों के समक्ष शांतिपूर्ण जीवन जीने, समाज के विकास में योगदान देने और कानून का पालन करने का संकल्प लिया। उन्होंने भविष्य में किसी भी उग्रवादी गतिविधि से दूर रहने की बात कही।
सूत्रों के अनुसार, आत्मसमर्पण के बाद इन युवाओं को राज्य सरकार और प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली पुनर्वास योजनाओं का लाभ भी मिल सकता है, जिससे उन्हें रोजगार, कौशल विकास और सामाजिक पुनर्स्थापन में सहायता मिलेगी।

चांगलांग जिला पुलिस की पुनर्वास के प्रति प्रतिबद्धता
चांगलांग जिला पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं के पुनर्वास और समाज में पुनः समावेशन के लिए हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। पुलिस का कहना है कि केवल आत्मसमर्पण करवाना ही उद्देश्य नहीं है, बल्कि इन युवाओं को सम्मानजनक जीवन प्रदान करना और उन्हें समाज का सक्रिय हिस्सा बनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि जिला प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां ऐसे युवाओं के लिए सकारात्मक वातावरण तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि वे दोबारा हिंसा के रास्ते पर न लौटें।
अन्य युवाओं से भी की गई अपील
चांगलांग पुलिस ने अभी भी विभिन्न उग्रवादी संगठनों से जुड़े स्थानीय युवाओं से हिंसा का मार्ग छोड़ने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि सरकार और प्रशासन शांति प्रक्रिया को मजबूत करने तथा युवाओं को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं।
अधिकारियों ने कहा कि जो भी युवा समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए पुनर्वास और सहायता के द्वार खुले हैं। उन्होंने युवाओं से अपने परिवार, शिक्षा और भविष्य को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।

सीमावर्ती जिलों में शांति प्रक्रिया को मिल रही मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि चांगलांग, तिराप और लोंगडिंग जैसे जिलों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान सुरक्षा बलों और प्रशासन द्वारा चलाए गए विश्वास निर्माण कार्यक्रमों का सकारात्मक प्रभाव दिखाई देने लगा है। कई मामलों में उग्रवादी संगठनों से जुड़े युवाओं ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा का रास्ता चुना है।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, विकास कार्यों, सड़क संपर्क, शिक्षा सुविधाओं और रोजगार के अवसरों में वृद्धि के कारण भी युवाओं का झुकाव अब शांतिपूर्ण जीवन की ओर बढ़ रहा है।
क्षेत्र में शांति और विकास को मिलेगा बल
चांगलांग जिला पुलिस ने विश्वास व्यक्त किया है कि इन तीन युवाओं का आत्मसमर्पण क्षेत्र में शांति और स्थिरता को और मजबूत करेगा। अधिकारियों का कहना है कि जब युवा हिंसा छोड़कर विकास और सामाजिक समरसता का मार्ग चुनते हैं, तब पूरे क्षेत्र के लिए सकारात्मक माहौल बनता है।
स्थानीय लोगों ने भी इस कदम का स्वागत करते हुए आशा व्यक्त की है कि भविष्य में और अधिक युवा उग्रवाद का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटेंगे। उनका मानना है कि शांति, शिक्षा और विकास ही क्षेत्र की वास्तविक प्रगति का आधार हैं।
शांति की नई उम्मीद
तीन एनएससीएन कैडरों का आत्मसमर्पण पूर्वोत्तर भारत में शांति और पुनर्वास प्रक्रिया की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यह घटना न केवल सुरक्षा एजेंसियों के प्रयासों की सफलता को दर्शाती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, पारिवारिक सहयोग और सकारात्मक अवसर मिलने पर भटके हुए युवा भी समाज की मुख्यधारा में लौटकर नया जीवन शुरू कर सकते हैं।
चांगलांग जिले में हुई यह पहल आने वाले समय में क्षेत्रीय शांति, सामाजिक सद्भाव और विकास की प्रक्रिया को और अधिक गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।




