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राभा दिवस पर टियोक में श्रद्धा, संस्कृति और सम्मान का अनूठा संगम : विभिन्न संगठनों ने कलागुरु विष्णुप्रसाद राभा को दी भावभीनी श्रद्धांजलि, सांस्कृतिक हस्तियों का हुआ सम्मान

टियोक, 20 जून: कलागुरु विष्णुप्रसाद राभा की पुण्यतिथि पर मनाए जाने वाले “राभा दिवस” के अवसर पर पूरे असम की तरह टियोक क्षेत्र में भी श्रद्धा, सम्मान और सांस्कृतिक चेतना से परिपूर्ण विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संगठनों ने कार्यक्रम आयोजित कर महान कलाकार, स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक और जननायक विष्णुप्रसाद राभा को श्रद्धांजलि अर्पित की तथा उनके आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

असम जातीयतावादी युवा-छात्र परिषद ने तीन सांस्कृतिक हस्तियों को किया सम्मानित

राभा दिवस के अवसर पर असम जातीयतावादी युवा-छात्र परिषद, टियोक आंचलिक समिति द्वारा एक विशेष सम्मान समारोह आयोजित किया गया। समारोह में क्षेत्र के सांस्कृतिक विकास और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले तीन प्रतिष्ठित व्यक्तियों को सम्मानित किया गया।

सम्मानित होने वालों में वरिष्ठ सांस्कृतिक कर्मी एवं सेवानिवृत्त शिक्षक प्रणवज्योति बोरा, प्रख्यात नाट्यकर्मी जितेन दास तथा सांस्कृतिक कर्मी एवं शिक्षिका मौसुमी बोरा शइकिया शामिल रहीं। परिषद की ओर से उन्हें पारंपरिक फूलाम गामोसा और सम्मान-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर परिषद के विभिन्न पदाधिकारी, कार्यकर्ता तथा स्थानीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे। वक्ताओं ने कहा कि समाज और संस्कृति के संरक्षण में कार्यरत व्यक्तियों का सम्मान नई पीढ़ी को प्रेरणा देने का कार्य करता है।

टियोक शाखा साहित्य सभा ने मनाई विष्णु राभा स्मृति दिवस और निर्मलप्रभा बरदोलोई जयंती

राभा दिवस के साथ-साथ टियोक शाखा साहित्य सभा द्वारा प्रख्यात साहित्यकार डॉ. निर्मलप्रभा बरदोलोई की जयंती भी गरिमामय वातावरण में मनाई गई।

साहित्य सभा के कार्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ असमिया भाषा और संस्कृति के प्रति समर्पित सामूहिक गीत “चिर चेनेही मोर भाषा जननी” के सामूहिक गायन से हुआ। इसके बाद साहित्य सभा के अध्यक्ष रत्नेश्वर गोगोई ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया।

कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में वरिष्ठ सांस्कृतिक कर्मी एवं अभिनेता प्रणवज्योति बोरा उपस्थित रहे। समारोह के दौरान वक्ताओं ने कलागुरु विष्णुप्रसाद राभा और डॉ. निर्मलप्रभा बरदोलोई के जीवन, साहित्य, संस्कृति तथा समाज के प्रति उनके अमूल्य योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला।

गीत, कविता और विचारों के माध्यम से दी गई श्रद्धांजलि

कार्यक्रम के दौरान विभिन्न साहित्यकारों, शिक्षकों और सांस्कृतिक कर्मियों ने गीत, कविता-पाठ और विचार-विमर्श के माध्यम से दोनों महान विभूतियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। वक्ताओं ने कहा कि विष्णुप्रसाद राभा केवल एक कलाकार नहीं, बल्कि असमिया अस्मिता, सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक थे। वहीं डॉ. निर्मलप्रभा बरदोलोई का साहित्यिक योगदान आज भी नई पीढ़ी को प्रेरित करता है।

मारवाड़ी सम्मेलन, टियोक शाखा ने भी अर्पित की श्रद्धांजलि

राभा दिवस के अवसर पर मारवाड़ी सम्मेलन, टियोक शाखा ने भी कलागुरु विष्णुप्रसाद राभा की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।

सम्मेलन के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने राभा के आदर्शों, उनकी राष्ट्रवादी सोच तथा असमिया समाज, संस्कृति और कला के प्रति उनके अतुलनीय योगदान को याद किया। उपस्थित सदस्यों ने उनके दिखाए मार्ग पर चलने तथा समाज में सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए कार्य करने का संकल्प भी व्यक्त किया।

जनमानस में आज भी जीवित हैं कलागुरु विष्णुप्रसाद राभा

टियोक में विभिन्न सामाजिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक संगठनों द्वारा आयोजित कार्यक्रमों ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि कलागुरु विष्णुप्रसाद राभा केवल इतिहास का हिस्सा नहीं, बल्कि असम की सांस्कृतिक चेतना के जीवंत प्रतीक हैं। उनके विचार, संघर्ष और रचनात्मक योगदान आज भी समाज को दिशा प्रदान कर रहे हैं।

राभा दिवस पर आयोजित इन कार्यक्रमों ने क्षेत्र में सांस्कृतिक जागरूकता और सामाजिक एकता का संदेश दिया तथा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने की प्रेरणा प्रदान की।

— रिपोर्ट: बीजू कुमार तुनवाल

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