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शिवसागर में मिली टैरेंटुला प्रजाति की विषैली ‘भालुकी’ चिलोब्रैकिस मकड़ी : साहसिक रेस्क्यू अभियान में पकड़ी गई खतरनाक मकड़ी, वन विभाग को सौंपा गया : दिखौमुख के एक घर से बरामद हुई विषैली मकड़ी : पूरे जिले में चर्चा का विषय बना रेस्क्यू

शिवसागर, 20 जून : शिवसागर जिले सहित समूचे ऊपरी असम में लंबे समय से लोगों के बीच भय और चिंता का कारण बनी टैरेंटुला प्रजाति की विषैली ‘भालुकी’ चिलोब्रैकिस मकड़ी (Chilobrachys Tarantula) को शनिवार को एक साहसिक अभियान के तहत सुरक्षित रूप से पकड़ लिया गया। शिवसागर शहर के थाना मुख क्षेत्र निवासी वन्यजीव प्रेमी एवं रेस्क्यूकर्ता मृण्मय ज्योति दास ने सूझबूझ और साहस का परिचय देते हुए इस खतरनाक मकड़ी का सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया। बाद में मकड़ी को शिवसागर वन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया, जहां से इसे सुरक्षित प्राकृतिक आवास में छोड़े जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

दिखौमुख के घर में दिखाई दी खतरनाक मकड़ी

जानकारी के अनुसार यह विषैली मकड़ी शिवसागर जिले के दिखौमुख क्षेत्र निवासी विनय चेतिया के घर में देखी गई थी। मकड़ी के घर के भीतर होने की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई। इसके बाद मृण्मय ज्योति दास को इसकी जानकारी दी गई। सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंचे और पूरी सावधानी बरतते हुए मकड़ी को सुरक्षित तरीके से पकड़ने में सफल रहे।

रेस्क्यू अभियान के दौरान किसी भी व्यक्ति को नुकसान नहीं पहुंचा और मकड़ी को बिना किसी दुर्घटना के नियंत्रित कर लिया गया। इस सफल अभियान के बाद स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली।

क्या है ‘भालुकी’ चिलोब्रैकिस मकड़ी?

स्थानीय भाषा में ‘भालुकी मकड़ी’ के नाम से पहचानी जाने वाली यह मकड़ी टैरेंटुला (Tarantula) समूह और चिलोब्रैकिस (Chilobrachys) वंश से संबंधित मानी जाती है। यह प्रजाति भारत, बांग्लादेश, म्यांमार और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई क्षेत्रों में पाई जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार चिलोब्रैकिस समूह की मकड़ियां सामान्यतः मनुष्यों पर हमला नहीं करतीं, लेकिन यदि इन्हें खतरा महसूस हो तो ये आक्रामक हो सकती हैं। इनके दंश से व्यक्ति को तीव्र दर्द, सूजन, मांसपेशियों में ऐंठन, एलर्जी, संक्रमण तथा कई अन्य जटिल चिकित्सकीय समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

ऊपरी असम में पहले भी सामने आ चुके हैं दंश के कई मामले

शिवसागर जिले के डिमौ क्षेत्र सहित ऊपरी असम के कई इलाकों में ‘भालुकी’ मकड़ी के काटने के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार इस मकड़ी के दंश के कारण कई व्यक्तियों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा और कुछ मामलों में अस्पताल में भर्ती तक कराना पड़ा।

हाल के वर्षों में डिमौ और आसपास के क्षेत्रों में ऐसे मामलों में वृद्धि देखे जाने के बाद चिकित्सकीय और वैज्ञानिक स्तर पर भी इस मकड़ी को लेकर विशेष अध्ययन और जागरूकता अभियान चलाए गए हैं। विशेषज्ञों ने लोगों को ऐसे जीवों से दूरी बनाए रखने और इनके दिखाई देने पर तुरंत संबंधित विभाग को सूचना देने की सलाह दी है।

वन विभाग करेगा सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास

रेस्क्यू के तुरंत बाद मृण्मय ज्योति दास ने मकड़ी को शिवसागर वन विभाग के अधिकारियों के हवाले कर दिया। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस मकड़ी को किसी ऐसे वन क्षेत्र में छोड़ा जाएगा जहां उसका प्राकृतिक आवास उपलब्ध हो और वह मानव बस्तियों से दूर रह सके।

वन विभाग का कहना है कि वन्यजीवों का संरक्षण और मानव सुरक्षा दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। इसलिए ऐसे जीवों को मारने के बजाय सुरक्षित तरीके से उनके प्राकृतिक आवास में पुनर्स्थापित किया जाना चाहिए।

मृण्मय ज्योति दास के साहस की हो रही सराहना

इस सफल रेस्क्यू अभियान के बाद पूरे शिवसागर जिले में मृण्मय ज्योति दास की जमकर सराहना हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस विषैली मकड़ी को नहीं पकड़ा जाता तो किसी व्यक्ति के घायल होने या गंभीर दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था।

क्षेत्र के लोगों ने उनके साहस, जिम्मेदारी और वन्यजीव संरक्षण के प्रति समर्पण की प्रशंसा करते हुए इसे एक अनुकरणीय कार्य बताया है।

विशेषज्ञों की अपील : स्वयं पकड़ने की कोशिश न करें

वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों ने आम जनता से अपील की है कि यदि घर, बगीचे या आसपास के क्षेत्रों में ऐसी किसी विषैली मकड़ी अथवा अन्य वन्यजीव की मौजूदगी दिखाई दे तो उसे स्वयं पकड़ने का प्रयास न करें। इससे दुर्घटना होने की संभावना बढ़ सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग, प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम अथवा संबंधित विशेषज्ञों को सूचना दी जानी चाहिए, ताकि जीव और मानव—दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

मानव सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण का बना उदाहरण

दिखौमुख में हुई इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि जागरूकता, धैर्य और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर खतरनाक परिस्थितियों का भी सुरक्षित समाधान निकाला जा सकता है। विषैली ‘भालुकी’ चिलोब्रैकिस मकड़ी का यह सफल रेस्क्यू न केवल शिवसागर बल्कि पूरे ऊपरी असम में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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