महंगाई की आग भड़की : आसू का राज्यव्यापी आंदोलन, 22 मई को सड़कों पर उतरेगा छात्र संगठन

गुवाहाटी, 20 मई : आवश्यक वस्तुओं की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम जनता को त्राहि-त्राहि कर दिया है। इस संकट के बीच ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) ने केंद्र और असम सरकार दोनों पर तीखा हमला बोलते हुए राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा कर दी है। संगठन के अध्यक्ष उत्पल शर्मा ने चेतावनी दी है कि यदि महंगाई पर तुरंत नियंत्रण नहीं किया गया तो छात्र संगठन सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन छेड़ देगा।
उत्पल शर्मा ने कहा है कि बाजार आग की तरह जल रहा है। आवश्यक अत्यावश्यकीय वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं। आम लोगों पर आर्थिक बोझ असहनीय हो गया है। केंद्र और राज्य सरकार दोनों ही महंगाई नियंत्रित करने में पूरी तरह विफल साबित हुई हैं। उन्होंने आगे कहा कि अब आंदोलन अपरिहार्य हो गया है। 22 मई को पूरे असम में विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे, जिसमें सरकार से महंगाई कम करने और आम जनता को राहत देने के ठोस कदम उठाने की मांग की जाएगी।
महंगाई का तांडव: क्या-क्या महंगा हुआ?
हाल के दिनों में असम के बाजारों में कई जरूरी वस्तुओं की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है। चावल, दाल, खाद्य तेल, चीनी, सब्जियां, फल, सूखे मेवे, दूध और एलपीजी सिलेंडर समेत कई आइटम्स की कीमतें बढ़ गई हैं।
गुवाहाटी जैसे शहरों में चीनी का भाव 48 रूपये से बढ़कर 50 रूपये प्रति किलो हो गया। खाद्य तेल के दाम 5 से 10 रूपये प्रति लीटर तक बढ़े है। 26 किलो चावल का थैला 1,100 से बढ़कर लगभग ₹1,250 रूपये पहुंच गया। दूध (अमूल और मदर डेयरी) के दाम ₹2 प्रति लीटर बढ़े।
ईंधन की कीमतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। पेट्रोल और डीजल महंगे होने से परिवहन लागत बढ़ी, जिसका सीधा असर दैनिक जरूरी वस्तुओं पर पड़ा। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और भारतीय रुपए की डॉलर के मुकाबले कमजोरी को भी इस महंगाई का एक बड़ा कारण बताया जा रहा है। कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत ₹3,000 पार कर गई है, जिससे छोटे होटल, रेस्तरां और चाय की दुकानें संकट में हैं।
आसू का आरोप और चेतावनी : आसू अध्यक्ष उत्पल शर्मा और महासचिव समीरान फुकन ने संयुक्त बयान में कहा कि चुनाव समाप्त होते ही कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। सरकार की उदासीनता और निष्क्रियता को लेकर उन्होंने तीखी आलोचना की। संगठन का कहना है कि मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार इस बोझ से बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। यदि तुरंत राहत नहीं दी गई तो “लोगों को सड़कों पर उतरना पड़ेगा”।
आसू ने पहले भी महंगाई के खिलाफ आवाज उठाई है। संगठन का इतिहास छात्र आंदोलनों और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय भूमिका निभाने का रहा है। इस बार भी उन्होंने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन लोकतांत्रिक तरीके से होगा, लेकिन सरकार को चेतावनी दी कि जनता की पीड़ा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
सरकार की प्रतिक्रिया : असम सरकार ने महंगाई पर नजर रखने के लिए कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने हाल ही में स्थिति की समीक्षा की और असामान्य मूल्य वृद्धि पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिसमें व्यापार लाइसेंस रद्द करना भी शामिल है। हालांकि आसू का कहना है कि ये प्रयास अपर्याप्त हैं।
आम जनता की परेशानी बढ़ती जा रही है। 22 मई का प्रदर्शन असम की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है। यदि सरकार ने समय रहते कदम नहीं उठाए तो महंगाई का यह मुद्दा बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है। नागरिकों से अपील की जा रही है कि वे सतर्क रहें और बाजार में उचित मूल्य की जांच करें।




