विश्व धरोहर की दिशा में शिवसागर की पहल का आटासू ने किया स्वागत, ऐतिहासिक स्थलों को अतिक्रमण मुक्त करने की उठाई मांग : केंद्रीय अध्यक्ष बसंत गोगोई बोले—‘रंगपुरिया और असमिया होने के नाते आज हम गौरवान्वित’, मुख्यमंत्री की पहल पर जताया आभार : रंगघर, तलातल घर और रंगनाथ मंदिर से जुड़ी भूमि के संरक्षण पर जोर, कथित अतिक्रमण को लेकर उठाए गंभीर सवाल
‘विश्व धरोहर की मान्यता से पहले प्राचीन स्मारकों की भूमि हो अतिक्रमण मुक्त, ऐतिहासिक धरोहरों के गौरव और स्वाभिमान की हो रक्षा’ - बसंत गोगोई

शिवसागर, 5 सितंबर : ऐतिहासिक रंगपुर–शिवसागर को यूनेस्को विश्व धरोहर की मान्यता दिलाने की दिशा में आगे बढ़ी प्रक्रिया का ऑल ताई आहोम स्टूडेंट्स यूनियन (आटासू) ने स्वागत किया है। संगठन ने इसे शिवसागर के साथ पूरे असम के लिए गौरवपूर्ण अवसर बताते हुए मुख्यमंत्री की पहल के प्रति आभार व्यक्त किया। हालांकि इसके साथ ही आटासू ने शिवसागर के प्राचीन स्मारकों और उनसे जुड़ी भूमि पर कथित अतिक्रमण का गंभीर मुद्दा उठाते हुए सरकार से विरासत संरक्षण के लिए ठोस और समयबद्ध कदम उठाने की मांग की है।

शिवसागर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए आटासू के केंद्रीय अध्यक्ष बसंत गोगोई ने कहा कि विश्व धरोहर की दिशा में शिवसागर का आगे बढ़ना लंबे समय से चली आ रही एक महत्वपूर्ण आकांक्षा को नई उम्मीद देता है। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक अवसर पर उन्हें एक ‘रंगपुरिया और असमिया’ के रूप में गर्व महसूस हो रहा है।
‘लंबे समय से उठाते आए हैं ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण की मांग’
बसंत गोगोई ने कहा कि आटासू के एक सक्रिय कार्यकर्ता के रूप में वह लंबे समय से शिवसागर के प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण की मांग उठाते रहे हैं। संगठन लगातार यह मांग करता आया है कि शिवसागर की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत को आधार बनाकर इसे विश्व धरोहर क्षेत्र के रूप में मान्यता दिलाने की दिशा में प्रयास किए जाएं।
उन्होंने कहा कि इन ऐतिहासिक संसाधनों को केवल पर्यटन स्थलों के रूप में नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इतिहास, अध्ययन और शोध के महत्वपूर्ण स्रोतों के रूप में भी वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित तरीके से संरक्षित और विकसित किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री की पहल का स्वागत, चराईदेव का किया उल्लेख
आटासू अध्यक्ष ने कहा कि संगठन की लंबे समय से चली आ रही मांग की दिशा में सरकार की ओर से कदम उठाया जाना स्वागत योग्य है। शिवसागर को वैश्विक विरासत पहचान दिलाने के लिए की जा रही पहल को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा के प्रति आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार चराईदेव के मैदामों को विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त हुआ, उसी प्रकार आहोम शासन और स्थापत्य की महत्वपूर्ण विरासत को अपने भीतर समेटे शिवसागर का इस प्रतिष्ठित मान्यता की दिशा में आगे बढ़ना असम के लोगों के लिए खुशी और गौरव की बात है।
‘विश्वस्तरीय विरासत से पहले अतिक्रमण मुक्त हों स्मारकों की जमीनें’
विश्व धरोहर की दिशा में हुई प्रगति का स्वागत करते हुए बसंत गोगोई ने सरकार के सामने एक महत्वपूर्ण मांग रखी। उन्होंने कहा कि शिवसागर को विश्वस्तरीय विरासत क्षेत्र के रूप में विकसित करने के साथ यहां के प्राचीन स्मारकों और उनसे जुड़ी भूमि को कथित अतिक्रमण से मुक्त कराना भी जरूरी है।
उन्होंने विशेष रूप से रंगघर, तलातल घर और रंगनाथ मंदिर से जुड़े क्षेत्रों का उल्लेख करते हुए सरकार से इन स्थलों की जमीन की वास्तविक स्थिति की जांच कराने और अतिक्रमण पाए जाने पर कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की।
रंगनाथ मंदिर की भूमि को लेकर गंभीर आरोप
बसंत गोगोई ने आरोप लगाया कि एक प्रभावशाली व्यक्ति ने रंगनाथ मंदिर से संबंधित भूमि के एक हिस्से पर कथित रूप से अतिक्रमण कर रखा है। उनके मुताबिक पुरातत्व विभाग की ओर से बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद संबंधित भूमि खाली नहीं की गई है।
उन्होंने दावा किया कि ऐतिहासिक स्मारकों से जुड़ी जमीन पर कथित कब्जे के मामलों में केवल बाहरी लोग नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर के कुछ शिक्षित और प्रभावशाली लोग भी शामिल हैं।
ये आरोप फिलहाल आटासू और उसके केंद्रीय अध्यक्ष की ओर से लगाए गए हैं। संबंधित व्यक्ति अथवा विभाग का पक्ष सामने आने और आधिकारिक जांच के बाद ही इन दावों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
प्रशासनिक अधिकारियों और लाट मंडलों की भूमिका पर भी सवाल
आटासू अध्यक्ष ने कुछ प्रशासनिक अधिकारियों और लाट मंडलों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कथित प्रशासनिक शह के कारण ऐतिहासिक स्थलों से संबंधित जमीनों पर अतिक्रमण की स्थिति बनी हुई है।
संगठन ने सरकार से इन आरोपों की निष्पक्ष और गंभीर जांच कराने तथा यह सुनिश्चित करने की मांग की कि किसी भी ऐतिहासिक अथवा पुरातात्विक महत्व की भूमि पर अवैध कब्जा बरकरार न रहे।

रंगघर की जमीन पर सरकारी विभाग के कथित कब्जे का भी आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बसंत गोगोई ने रंगघर से संबंधित भूमि के एक हिस्से पर एक सरकारी विभाग द्वारा कथित अतिक्रमण किए जाने का मुद्दा भी उठाया।
आटासू ने सरकार से इस मामले में वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यदि जांच में किसी प्रकार का अतिक्रमण सामने आता है, तो संबंधित भूमि को मुक्त कर ऐतिहासिक स्थल की मूल सीमा और स्वरूप की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय मान्यता के साथ जमीनी संरक्षण भी जरूरी
बसंत गोगोई ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में शिवसागर को विश्वस्तरीय विरासत क्षेत्र के रूप में स्थापित करना चाहती है, तो अंतरराष्ट्रीय मान्यता हासिल करने की प्रक्रिया के साथ जमीनी स्तर पर विरासत संरक्षण को भी समान प्राथमिकता देनी होगी।
उनके मुताबिक ऐतिहासिक स्मारकों की भूमि की सीमाओं को सुरक्षित करना, कथित अतिक्रमण की जांच कर उसे हटाना, स्मारकों के आसपास के क्षेत्रों का उचित प्रबंधन करना और उनके मूल ऐतिहासिक स्वरूप को संरक्षित रखना इस दिशा में अत्यंत आवश्यक है।
‘ऐतिहासिक गौरव और स्वाभिमान की रक्षा करे सरकार’
आटासू ने एक ओर रंगपुर–शिवसागर को विश्व धरोहर की मान्यता दिलाने की दिशा में उठाए गए कदम का स्वागत करते हुए सरकार और मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया, वहीं संगठन का कहना है कि इस पहल के बाद सरकार की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।
बसंत गोगोई ने सरकार से शिवसागर के प्राचीन स्मारकों, उनकी जमीन और ऐतिहासिक पहचान के संरक्षण के लिए गंभीरता से काम करने की मांग करते हुए कहा कि इन धरोहरों के गौरव और स्वाभिमान की रक्षा की जानी चाहिए।
आटासू का कहना है कि विश्व धरोहर की दिशा में रंगपुर–शिवसागर का आगे बढ़ना निश्चित रूप से एक ऐतिहासिक अवसर है, लेकिन इसकी वास्तविक सार्थकता तभी होगी जब सदियों पुरानी आहोम विरासत को जमीनी स्तर पर भी सुरक्षित रखा जाए और आने वाली पीढ़ियों के लिए उसका वैज्ञानिक, व्यवस्थित और दीर्घकालिक संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।




