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मारवाड़ी सम्मेलन तिनसुकिया शाखा की प्रेरणादायी पहल : दिवा लग्न में वैदिक विवाह को बढ़ावा देने वाले अग्रवाल परिवार का सम्मान : सम्मेलन प्रतिनिधिमंडल ने फूलाम गमछा और स्मृति-चिन्ह भेंट कर किया अभिनंदन, समाज से वैदिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का आह्वान

भारतीय संस्कृति और सनातन वैवाहिक परंपराओं के संरक्षण की दिशा में अनूठा प्रयास, नवदंपति रौनक अग्रवाल एवं प्रीति अग्रवाल को दी शुभकामनाएं

तिनसुकिया, 8 जुलाई : भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों एवं अति प्राचीन वैदिक विवाह परंपराओं के संरक्षण और पुनर्जीवन की दिशा में मारवाड़ी सम्मेलन तिनसुकिया शाखा द्वारा लगातार सकारात्मक पहल की जा रही है। इसी कड़ी में दिवा लग्न (दिन के शुभ मुहूर्त) में वैदिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह संपन्न करने वाले अग्रवाल परिवार का सम्मेलन द्वारा विशेष सम्मान किया गया।

दिवा लग्न विवाह को प्रोत्साहन देने की पहल

भारतीय वैदिक परंपरा में दिवा लग्न में विवाह को विशेष महत्व दिया गया है। इसी परंपरा को पुनः समाज में प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मारवाड़ी सम्मेलन तिनसुकिया शाखा द्वारा ऐसे परिवारों को सम्मानित करने की परंपरा शुरू की गई है, जो भारतीय संस्कृति से जुड़े रीति-रिवाजों को अपनाकर समाज के सामने प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं।

इसी उद्देश्य के तहत समाजबंधु स्वर्गीय बनारसी लाल अग्रवाल एवं स्वर्गीय रमेति देवी अग्रवाल के पौत्र तथा मामन कुमार अग्रवाल एवं श्रीमती पुष्पा अग्रवाल के सुपुत्र चिरंजीव रौनक अग्रवाल और समाजबंधु स्वर्गीय बनारसी लाल अग्रवाल एवं स्वर्गीय सिंगोरी देवी अग्रवाल की पौत्री तथा स्वर्गीय विनोद अग्रवाल एवं श्रीमती गीता अग्रवाल की सुपुत्री प्रीति अग्रवाल के दिवा लग्न में वैदिक विधि-विधान से संपन्न हुए शुभ विवाह के अवसर पर दोनों परिवारों का अभिनंदन किया गया।

फूलाम गमछा ओढ़ाकर किया सम्मान, भेंट किया स्मृति-चिन्ह

इस सराहनीय निर्णय और भारतीय परंपरा के प्रति समर्पण को सम्मान देने के लिए मारवाड़ी सम्मेलन तिनसुकिया शाखा का प्रतिनिधिमंडल विवाह स्थल पर पहुंचा। सम्मेलन की ओर से दोनों परिवारों के अभिभावकों को असम की सांस्कृतिक पहचान फूलाम गमछा ओढ़ाकर सम्मानित किया गया और स्मृति-चिन्ह भेंट कर शुभकामनाएं दी गईं।

कार्यक्रम के दौरान सम्मेलन के जनसंपर्क अधिकारी दीपक बजाज ने स्मृति-चिन्ह का वाचन किया।

सम्मेलन पदाधिकारियों ने दी नवदंपति को शुभकामनाएं

इस अवसर पर मारवाड़ी सम्मेलन तिनसुकिया शाखा के अध्यक्ष पवन केजड़ीवाल, सचिव बिमल चौखानी, संयुक्त सचिव मनोज अग्रवाल, वरिष्ठ सदस्य अशोक अग्रवाल एवं जनसंपर्क अधिकारी दीपक बजाज ने संयुक्त रूप से वर-वधू के परिजनों को स्मृति-चिन्ह प्रदान कर उनका अभिनंदन किया।

सम्मेलन के पदाधिकारियों ने नवदंपति रौनक अग्रवाल एवं प्रीति अग्रवाल के उज्ज्वल दांपत्य जीवन की मंगलकामना करते हुए कहा कि आधुनिक समय में भी अपनी जड़ों, संस्कारों और वैदिक परंपराओं से जुड़े रहना समाज के लिए प्रेरणादायी संदेश है।

अध्यक्ष पवन केजड़ीवाल ने वैदिक परंपराओं को बताया समाज की अमूल्य धरोहर

इस अवसर पर मारवाड़ी सम्मेलन तिनसुकिया शाखा के अध्यक्ष पवन केजड़ीवाल ने अपने संबोधन में अग्रवाल परिवार की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपराएं हमारी सबसे बड़ी पहचान और अमूल्य धरोहर हैं। आधुनिकता के इस दौर में भी दिवा लग्न में वैदिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह संपन्न करना न केवल हमारी प्राचीन संस्कृति के प्रति सम्मान को दर्शाता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है।

उन्होंने कहा कि हमारे पूर्वजों ने जो संस्कार और परंपराएं हमें विरासत में दी हैं, उनका संरक्षण करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। दिवा लग्न विवाह पर्यावरण, सामाजिक सुविधा और पारिवारिक मूल्यों की दृष्टि से भी एक सराहनीय पहल है। ऐसे आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं।

अध्यक्ष पवन केजड़ीवाल ने समाज के सभी परिवारों से अपील करते हुए कहा कि वे भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और वैदिक विवाह पद्धति को बढ़ावा देने में आगे आएं। मारवाड़ी सम्मेलन ऐसे प्रत्येक परिवार का सम्मान करता रहेगा, जो समाज में संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण के लिए प्रेरणादायी उदाहरण प्रस्तुत करेंगे।

उन्होंने नवदंपति रौनक अग्रवाल एवं प्रीति अग्रवाल को सुखमय वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं देते हुए दोनों परिवारों के प्रति आभार व्यक्त किया।

समाज ने सम्मेलन की पहल को बताया अनुकरणीय

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित समाजबंधुओं ने भारतीय संस्कृति एवं वैदिक विवाह परंपराओं के संरक्षण हेतु मारवाड़ी सम्मेलन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास आने वाली पीढ़ियों को अपनी गौरवशाली संस्कृति और संस्कारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

वहीं अग्रवाल परिवार की ओर से भी सम्मेलन के उपस्थित सभी सदस्यों का फूलाम गमछा पहनाकर अभिनंदन किया गया और इस सम्मान के लिए आभार व्यक्त किया गया।

संस्कृति और संस्कारों के संरक्षण का आह्वान

मारवाड़ी सम्मेलन तिनसुकिया शाखा ने समाज के सभी परिवारों से भारतीय संस्कृति, सनातन परंपराओं और वैदिक विवाह पद्धति के संरक्षण एवं संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। सम्मेलन ने कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही अपनी प्राचीन परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाया जा सकता है।

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