23 दिन बाद कब्र से निकाला गया 7 वर्षीय बच्ची का शव : उदालगुड़ी में रहस्यमयी मौत ने खड़े किए कई सवाल : पहले माना गया साइकिल हादसा, अब हत्या की आशंका ने पकड़ा जोर : पोस्टमार्टम के लिए तेजपुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया शव, पुलिस जांच तेज

उदालगुड़ी, 16 जुलाई : असम के उदालगुड़ी जिले के हरिसिंगा थाना क्षेत्र अंतर्गत कोचपारा गांव में सात वर्षीय बच्ची खुशी संगमा की रहस्यमयी मौत का मामला अब गंभीर आपराधिक जांच का विषय बन गया है। लगभग 23 दिन पहले दफनाए गए शव को जिला प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में कब्र से बाहर निकालकर पोस्टमार्टम के लिए तेजपुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि अब वैज्ञानिक एवं फॉरेंसिक जांच के आधार पर ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो सकेगी।

22 जून को हुई थी मौत, पहले साइकिल दुर्घटना समझा गया मामला
जानकारी के अनुसार 22 जून की शाम करीब छह बजे खुशी संगमा साइकिल से पास की दुकान पर सामान खरीदने निकली थी। उसकी बड़ी बहन भी पीछे-पीछे जा रही थी। कुछ ही देर बाद तेज आवाज सुनकर बहन मौके पर पहुंची तो खुशी घायल अवस्था में जमीन पर पड़ी थी। उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
बच्ची के शरीर पर कई स्थानों पर चोट के निशान थे। शुरुआत में परिजनों ने इसे साइकिल से गिरने का हादसा मान लिया और पोस्टमार्टम नहीं कराने का लिखित अनुरोध किया। इसके बाद 23 जून को बच्ची के शव को दफना दिया गया।
दो दिन बाद सामने आए संदेह, हत्या की आशंका गहराई
घटना के अगले दिनों में परिस्थितियों ने नया मोड़ ले लिया। प्रत्यक्षदर्शी बड़ी बहन और अन्य स्थानीय लोगों ने दावा किया कि घटनास्थल की स्थिति सामान्य सड़क दुर्घटना जैसी नहीं थी। उनका कहना है कि बच्ची और साइकिल अलग-अलग दिशा में पड़ी थीं, जिससे संदेह पैदा हुआ।
परिजनों ने आरोप लगाया कि गांव के पापु नाथ नामक युवक की गतिविधियां संदिग्ध थीं और घटना के समय वह आसपास मौजूद था। इसी आधार पर परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग शुरू कर दी।
परिवार का आरोप : पुलिस ने पहले शिकायत लेने से किया इनकार
मृतका की मां रंजिता संगमा ने आरोप लगाया कि 24 जून को हरिसिंगा थाने में शिकायत दर्ज कराने पहुंचने पर पुलिस ने उनकी शिकायत लेने से इनकार कर दिया। परिवार का यह भी आरोप है कि लिखित आवेदन फाड़ दिया गया। इसके बाद मामला मीडिया में आने पर पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया।
हालांकि पुलिस ने बाद में जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई और कानूनी अनुमति लेकर शव को कब्र से निकालने की कार्रवाई की।
23 दिन बाद कब्र से निकाला गया शव
जिला प्रशासन की अनुमति और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में पुलिस ने गुरुवार सुबह कब्र खोदकर बच्ची का शव बाहर निकाला। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक परीक्षण के लिए तेजपुर मेडिकल कॉलेज भेजा गया।
पुलिस का कहना है कि मेडिकल बोर्ड द्वारा की जा रही जांच से यह स्पष्ट होगा कि बच्ची की मौत दुर्घटना से हुई या उसके पीछे कोई आपराधिक घटना थी।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने क्या कहा ?
उदालगुड़ी के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नयनमणि बर्मन ने प्रेस वार्ता में बताया कि प्रारंभ में परिजनों ने स्वयं इसे सड़क दुर्घटना मानते हुए पोस्टमार्टम नहीं कराने का अनुरोध किया था। बाद में परिवार ने दोबारा पोस्टमार्टम की इच्छा जताई, जिसके बाद पुलिस ने जिला दंडाधिकारी से अनुमति मांगी। अनुमति मिलने पर मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में शव को निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। उन्होंने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट आने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
आरोपी को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी
स्थानीय लोगों का दावा है कि संदेह के घेरे में आया युवक पापु नाथ स्थानीय वीडीपी (Village Defence Party) सचिव का पुत्र है। कुछ ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि वह नशीले पदार्थों का आदी है और पहले भी विवादित गतिविधियों में शामिल रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट होगी सबसे अहम साक्ष्य
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार शव को दफनाने के बाद निकाले जाने की स्थिति में पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि मेडिकल रिपोर्ट में किसी प्रकार की हिंसा, बाहरी चोट या अन्य आपराधिक संकेत मिलते हैं, तो उसी आधार पर आगे भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।




