ASSAMGOVERNMENTHEALTH SERVICESJORHATLAKHIMPURLocal Newsराज्यलोकल न्यूज़

लखीमपुर मेडिकल कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पल्लव बोरा का अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र रद्द : राज्य स्तरीय जांच समिति और CID की जांच में फर्जी प्रमाणपत्र का मामला साबित होने का दावा : अनुसूचित जाति संग्रामी युवा परिषद ने की कड़ी कार्रवाई और सेवा से हटाने की मांग

न्यूज डेस्क, 16 जुलाई : असम में आरक्षित वर्ग के लिए जारी किए जाने वाले जाति प्रमाणपत्रों की सत्यता को लेकर एक महत्वपूर्ण कार्रवाई सामने आई है। लखीमपुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (LMCH) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पल्लव बोरा का अनुसूचित जाति (Scheduled Caste) प्रमाणपत्र आधिकारिक रूप से रद्द किए जाने के बाद अनुसूचित जाति संग्रामी युवा परिषद ने इस निर्णय का स्वागत किया है। संगठन का आरोप है कि फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर आरक्षित पद प्राप्त कर वास्तविक पात्र अभ्यर्थियों के अधिकारों का हनन किया गया।

संगठन का दावा : शिकायत के बाद शुरू हुई थी जांच

अनुसूचित जाति संग्रामी युवा परिषद के अध्यक्ष संजीव दास ने जारी बयान में कहा कि उनकी संस्था द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के आधार पर अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशालय ने मामले की जांच शुरू कराई थी।

उनके अनुसार, जांच राज्य स्तरीय जाति पुनरीक्षण समिति (State Level Scrutiny Committee) तथा असम पुलिस की अपराध अन्वेषण शाखा (CID) को सौंपी गई थी।

जांच में क्या सामने आया ?

संगठन का दावा है कि राज्य स्तरीय पुनरीक्षण समिति तथा CID की जांच में यह निष्कर्ष निकला कि डॉ. पल्लव बोरा द्वारा प्रस्तुत अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र वैध नहीं था। इसके बाद समिति की सिफारिश पर जोरहाट के जिला आयुक्त (DC) ने संबंधित जाति प्रमाणपत्र को निरस्त कर दिया।

साथ ही संबंधित सरकारी विभागों तथा लखीमपुर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य को भी आवश्यक प्रशासनिक एवं कानूनी कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया है।

गांव में जांच का भी किया गया उल्लेख

संजीव दास ने कहा कि डॉ. पल्लव बोरा मूल रूप से जोरहाट जिले के रंगदई गांव के निवासी हैं। संगठन का दावा है कि गांव में किए गए तथ्यात्मक सत्यापन से भी यह स्पष्ट हुआ कि वे अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित नहीं हैं और कथित रूप से फर्जी तरीके से प्रमाणपत्र प्राप्त किया गया था।

हालांकि, डॉ. पल्लव बोरा की ओर से इस कार्रवाई पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने आने की पुष्टि नहीं हो सकी है।

सिर्फ प्रमाणपत्र रद्द नहीं, नौकरी समाप्त करने और गिरफ्तारी की मांग

संगठन ने मांग की है कि केवल प्रमाणपत्र रद्द करना पर्याप्त नहीं है। यदि किसी व्यक्ति ने फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर सरकारी सेवा प्राप्त की है तो उसके विरुद्ध सेवा नियमों और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हुए सरकारी सेवा समाप्त की जाए और आर्थिक लाभ की जांच की जाए तथा आवश्यक होने पर आपराधिक मामला दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए।

‘फर्जी जाति प्रमाणपत्र का बड़ा नेटवर्क सक्रिय’

संजीव दास ने आरोप लगाया कि राज्य में एक संगठित गिरोह सक्रिय है, जो गैर-अनुसूचित जाति के लोगों के लिए कथित रूप से फर्जी अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र तैयार कराता है।

उन्होंने दावा किया कि संगठन ने ऐसे सैकड़ों मामलों की पहचान कर संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायतें दर्ज कराई हैं। उनके अनुसार कई प्रमाणपत्र पहले ही रद्द किए जा चुके हैं, जबकि कुछ मामलों में प्रमाणपत्र फर्जी पाए जाने के बावजूद संबंधित लोग अभी भी सरकारी सेवा में बने हुए हैं।

2018 में जारी हुआ था जांच का आदेश

संगठन द्वारा साझा दस्तावेजों के अनुसार, 11 जून 2018 को अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशालय ने TAD/BC/855/2013/152 आदेश के माध्यम से इस मामले की जांच राज्य स्तरीय पुनरीक्षण समिति और CID को सौंपने का निर्देश दिया था।

जांच के दौरान डॉ. पल्लव बोरा को समिति के समक्ष उपस्थित होकर अपने अनुसूचित जाति होने के समर्थन में दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर भी दिया गया। संगठन का दावा है कि वे समिति के समक्ष ऐसा कोई स्वीकार्य दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके।

असम में प्रमाणपत्र सत्यापन पर बढ़ी सख्ती

हाल के महीनों में असम में विभिन्न प्रकार के फर्जी प्रमाणपत्रों के मामलों पर प्रशासन ने कार्रवाई तेज की है। विशेष रूप से निवास, आय और आरक्षण से जुड़े दस्तावेजों के दुरुपयोग के मामलों में जांच और सत्यापन अभियान चलाए जा रहे हैं। हाल ही में जोरहाट में भी फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर सरकारी भर्ती से जुड़े एक अलग मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Click to listen highlighted text!
error: Content is protected !!