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शिवसागर के विवादित M-One यूनिसेक्स पार्लर पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई : सील करने पहुंची मजिस्ट्रेट टीम, लेकिन खाली मिला परिसर; जांच के बीच पार्लर खाली होने पर उठे सवाल

शिवसागर, 5 जून : शिवसागर शहर के बी.जी. रोड स्थित चर्चित एवं विवादित M-One यूनिसेक्स पार्लर को सील करने के उद्देश्य से शुक्रवार को जिला प्रशासन, नगर निकाय तथा अन्य विभागों के अधिकारियों की एक संयुक्त टीम मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में मौके पर पहुंची। मजिस्ट्रेट इंडिका गोगोई के नेतृत्व में शिवसागर नगरपालिका के सीईओ देवब्रत शर्मा तथा नगरपालिका प्रशासन के इंस्पेक्टर रिजु रहमान शामिल थे।

हालांकि प्रशासन की कार्रवाई के दौरान पार्लर का परिसर पहले से ही खाली पाया गया, जिसके चलते अधिकारियों ने पार्लर को सील करने के बजाय वहां लगे मुख्य साइनबोर्ड को औपचारिक रूप से हटाकर कार्रवाई पूरी की।

सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई उस मामले के सिलसिले में की गई जिसमें कथित अनैतिक गतिविधियों के आरोपों के आधार पर पहले ही एक आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। इसी प्रकरण में दर्ज मामला संख्या 66/2026 के तहत शिवसागर पुलिस ने पार्लर की संचालिका मैना हजारिका को गिरफ्तार किया था। स्थानीय स्तर पर इस घटना ने व्यापक चर्चा और विवाद को जन्म दिया था।

जानकारी के अनुसार शिवसागर पुलिस ने मामले की विस्तृत जांच के बाद आरोपों, साक्ष्यों तथा अन्य तथ्यों से संबंधित एक विस्तृत प्रतिवेदन जिला आयुक्त को सौंपा था। पुलिस की रिपोर्ट में पार्लर में कथित रूप से संचालित गतिविधियों को लेकर गंभीर टिप्पणियां किए जाने की बात सामने आई है। इसी रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन ने आगे की कार्रवाई शुरू की और संबंधित प्रतिष्ठान को सील करने की प्रक्रिया आरंभ की गई।

लेकिन प्रशासनिक टीम के पहुंचने से पहले ही भवन मालिक द्वारा विवादों में घिरे M-One यूनिसेक्स पार्लर को पूरी तरह खाली करा दिया गया। बताया जा रहा है कि पार्लर में मौजूद सामान भी हटा लिया गया था और परिसर उपयोग में नहीं था। परिणामस्वरूप अधिकारियों के पास सील करने के लिए कोई सक्रिय व्यावसायिक प्रतिष्ठान नहीं बचा।

मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में प्रशासनिक दल ने स्थल का निरीक्षण किया और बाद में पार्लर के नाम से लगा मुख्य बोर्ड हटाकर औपचारिक कार्रवाई दर्ज की। पूरे घटनाक्रम का सबसे चर्चित पहलू यह बन गया है कि जिस पार्लर के खिलाफ पुलिस जांच अभी जारी है और जहां से कथित तौर पर दो ग्राहकों, दो कर्मचारियों तथा संचालिका को गिरफ्तार किया गया था, वह प्रतिष्ठान आखिर जांच प्रक्रिया के दौरान इतनी जल्दी कैसे खाली कर दिया गया।

स्थानीय लोगों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि मामला जांचाधीन था तो पार्लर को पूरी तरह खाली करने और संचालन से जुड़े साक्ष्यों को हटाने की अनुमति कैसे मिली।

कई लोगों का मानना है कि इस पहलू की भी अलग से जांच होनी चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि परिसर खाली करने की प्रक्रिया किन परिस्थितियों में हुई। फिलहाल जिला प्रशासन और पुलिस की ओर से मामले की जांच जारी होने की बात कही जा रही है।

शहर में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है और लोगों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि जांच में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं तथा संबंधित पक्षों के खिलाफ क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर शहर में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की निगरानी, लाइसेंसिंग व्यवस्था और कथित अवैध गतिविधियों पर प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

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