दिवा लग्न में वैदिक रीति से संपन्न हुआ अनिरुद्ध–ऋतुल का विवाह : तिनसुकिया से सामाजिक परिवर्तन का प्रेरक संदेश : मारवाड़ी सम्मेलन ने गोयल परिवार को किया सम्मानित, दिवा लग्न विवाह को बताया भारतीय संस्कृति, सामाजिक सादगी और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक पहल
विधायक बोलेन चेतिया बोले—'समाज को दिन में विवाह की परंपरा अपनानी चाहिए' : सम्मेलन ने इसे सामाजिक सुधार का सशक्त अभियान बताया

तिनसुकिया, 2 जुलाई : तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश में जहां विवाह समारोह दिन-प्रतिदिन अत्यधिक खर्च, देर रात तक चलने वाले आयोजनों और दिखावे की संस्कृति से प्रभावित होते जा रहे हैं, वहीं तिनसुकिया के प्रतिष्ठित गोयल परिवार ने भारतीय संस्कृति की मूल भावना, वैदिक परंपरा और सामाजिक सादगी को पुनर्जीवित करते हुए एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। परिवार ने अपने सुपुत्र के विवाह का आयोजन रात्रि के बजाय दिन में वैदिक रीति-रिवाजों के अनुसार दिवा-लग्न में संपन्न कर समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया।

यह विवाह केवल दो परिवारों का पावन मिलन नहीं रहा, बल्कि सामाजिक सुधार, भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देने वाला एक अनुकरणीय आयोजन बन गया। इस सराहनीय पहल के लिए पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन की तिनसुकिया शाखा ने गोयल परिवार का सार्वजनिक रूप से सम्मान कर इसे समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

वैदिक परंपरा के अनुरूप संपन्न हुआ शुभ विवाह
तिनसुकिया के सुप्रसिद्ध समाजसेवी स्वर्गीय देवी दयाल गोयल के पौत्र तथा भरत लाल गोयल एवं श्रीमती सुनीता गोयल के सुपुत्र अनिरुद्ध गोयल का शुभ विवाह राजस्थान के बूंदी निवासी राजेश माहेश्वरी एवं श्रीमती गरिमा माहेश्वरी की सुपुत्री ऋतुल माहेश्वरी के साथ बुधवार, 1 जुलाई 2026 को वैदिक विधि-विधान एवं दिवा-लग्न में अत्यंत श्रद्धा, गरिमा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ।
विवाह समारोह में धार्मिक संस्कारों, वैदिक मंत्रोच्चार तथा भारतीय संस्कृति की झलक स्पष्ट रूप से दिखाई दी। समारोह में उपस्थित लोगों ने इसे आधुनिक समय में परंपरा और सामाजिक उत्तरदायित्व का सुंदर संगम बताया।

दिवा-लग्न विवाह : भारतीय संस्कृति की ओर लौटने का प्रेरक प्रयास
विवाह की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता इसका दिन में संपन्न होना रहा। लंबे समय से भारतीय समाज में अधिकांश विवाह रात्रि में आयोजित होते रहे हैं, जबकि वैदिक परंपराओं में अनेक अवसरों पर दिवा-लग्न को भी अत्यंत शुभ एवं वैज्ञानिक माना गया है।
परिवार ने बताया कि विस्तृत विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया कि विवाह ऐसा हो जो केवल पारिवारिक उत्सव न होकर समाज के लिए भी प्रेरणा बने। दिन में विवाह होने से विद्युत ऊर्जा की बचत, ध्वनि एवं प्रकाश प्रदूषण में कमी, देर रात तक होने वाली असुविधाओं से मुक्ति, महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की सुविधा तथा संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो सका।
सामाजिक जानकारों का मानना है कि इस प्रकार के आयोजन भारतीय संस्कृति की मूल भावना सादगी, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व को पुनः स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो सकते हैं।

मारवाड़ी सम्मेलन ने किया सामाजिक सम्मान
इस अभिनव एवं प्रेरणादायक पहल की सराहना करते हुए मारवाड़ी सम्मेलन तिनसुकिया शाखा का एक प्रतिनिधिमंडल विवाह स्थल होटल सॉलिटेयर ब्लिस पहुँचा।
प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व शाखा अध्यक्ष पवन केजरीवाल ने किया। उनके साथ सचिव विमल चोखानी, सह सचिव नारायण भाटीवाड़ा, संगठन मंत्री तेजपाल खंडेलवाल, सदस्य मनोज अग्रवाल एवं रमेश शर्मा उपस्थित रहे।
सम्मेलन पदाधिकारियों ने भरत गोयल एवं श्रीमती सुनीता गोयल को पारंपरिक फुलाम गामोछा पहनाकर तथा स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया और सामाजिक सुधार की इस पहल के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।
प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि समाज में ऐसे परिवारों को सम्मानित करना आवश्यक है जो नई पीढ़ी के सामने सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं। सम्मेलन भविष्य में भी दिवा-लग्न विवाह को प्रोत्साहित करने के लिए जनजागरण अभियान जारी रखेगा।

विधायक बोलेन चेतिया ने की पहल की मुक्तकंठ से सराहना
समारोह में सदिया के विधायक बोलेन चेतिया भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। सम्मेलन की ओर से उनका भी पारंपरिक फुलाम गामोछा पहनाकर सम्मान किया गया।
अपने संबोधन में विधायक बोलेन चेतिया ने कहा कि मैं पहली बार मारवाड़ी समाज में दिन के समय विवाह संपन्न होते हुए देख रहा हूँ। यह वास्तव में अनुकरणीय पहल है। समाज को इससे प्रेरणा लेकर दिन में विवाह की परंपरा को बढ़ावा देना चाहिए। इससे अनावश्यक आडंबर, फिजूलखर्ची और कई सामाजिक समस्याओं में कमी आएगी। साथ ही पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा बचत और संसाधनों के समुचित उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा। मैं गोयल परिवार को इस सामाजिक कार्य के लिए हार्दिक बधाई देता हूँ।
उन्होंने कहा कि यदि समाज इस प्रकार की सकारात्मक सोच अपनाए तो आने वाली पीढ़ियों को बेहतर सामाजिक वातावरण प्राप्त होगा।

परिवार ने बताया क्यों लिया दिवा-लग्न में विवाह का निर्णय
परिवार की ओर से अंजनी गोयल ने बताया कि परिवार के सभी सदस्यों ने विस्तृत चर्चा के बाद दिन में विवाह कराने का निर्णय लिया था।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में सादगी और संस्कार सर्वोपरि हैं। यदि विवाह सामाजिक संदेश देने का माध्यम बन सके तो उसका महत्व और बढ़ जाता है। उन्होंने सम्मेलन द्वारा इस पहल का सम्मान किए जाने पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान पूरे परिवार के लिए अत्यंत गर्व और प्रेरणा का विषय है।

सीए शशिभूषण गोयल : समाज को आगे आना होगा
इस अवसर पर सीए शशिभूषण गोयल ने कहा कि पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन की तिनसुकिया शाखा जिस प्रकार दिवा-लग्न के विवाह आयोजन को प्रोत्साहित कर रही है, वह अत्यंत सराहनीय है। समाज के सभी परिवारों को इस दिशा में आगे आना चाहिए। इससे सामाजिक सादगी, सांस्कृतिक मूल्यों और पारिवारिक सौहार्द को नई मजबूती मिलेगी तथा आने वाली पीढ़ी भी भारतीय परंपराओं से जुड़ी रहेगी।
उन्होंने कहा कि सामाजिक परिवर्तन किसी सरकारी आदेश से नहीं, बल्कि समाज के जागरूक परिवारों की पहल से आता है।
समाजबंधुओं ने बताया अनुकरणीय कदम
समारोह में उपस्थित समाज के वरिष्ठजनों, युवाओं एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी गोयल परिवार की इस पहल की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।
सभी ने एक स्वर में कहा कि विवाह जैसे महत्वपूर्ण संस्कार यदि सादगी, संस्कृति और सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ संपन्न हों तो समाज में सकारात्मक परिवर्तन की नई धारा प्रवाहित हो सकती है। लोगों ने इसे केवल एक विवाह नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना का अभियान बताया।
दिवा-लग्न विवाह क्यों बन सकता है भविष्य की नई सामाजिक दिशा
विशेषज्ञों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार दिन में विवाह की परंपरा को बढ़ावा मिलने से अनेक सकारात्मक परिवर्तन संभव हैं —
– बिजली एवं ऊर्जा की उल्लेखनीय बचत।
– ध्वनि एवं प्रकाश प्रदूषण में कमी।
– अनावश्यक खर्च और आडंबर पर नियंत्रण।
– बुजुर्गों, महिलाओं एवं बच्चों की सुविधा।
– देर रात होने वाली सड़क दुर्घटनाओं एवं सुरक्षा संबंधी जोखिमों में कमी।
– वैदिक परंपराओं एवं भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण।
– पर्यावरण संरक्षण तथा टिकाऊ सामाजिक जीवनशैली को बढ़ावा।
सामाजिक परिवर्तन की नई शुरुआत
तिनसुकिया में संपन्न यह दिवा-लग्न विवाह केवल एक पारिवारिक समारोह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह संदेश देकर गया कि यदि समाज सकारात्मक सोच के साथ अपनी परंपराओं का आधुनिक संदर्भों में पुनर्स्मरण करे, तो सामाजिक सुधार की दिशा में बड़े परिवर्तन संभव हैं।
गोयल परिवार की यह पहल आने वाले समय में अन्य परिवारों के लिए भी प्रेरणा बन सकती है। मारवाड़ी सम्मेलन द्वारा इस सामाजिक संदेश का सम्मान किए जाने से स्पष्ट है कि अब समाज केवल भव्य आयोजनों की नहीं, बल्कि संस्कार, सादगी, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे मूल्यों को भी नई प्राथमिकता देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।




