नाजिरा थाना से महज 20 मीटर दूर इंसानियत शर्मसार : आम का लालच देकर नाबालिग को कमरे में ले जाने का आरोप : सैलून संचालक गिरफ्तार : POCSO एक्ट के तहत मामला दर्ज : अदालत ने भेजा न्यायिक हिरासत में

शिवसागर, 7 जून : शिवसागर जिले के नाजिरा क्षेत्र में एक संवेदनशील और चिंताजनक मामला सामने आया है। नाजिरा आदर्श पुलिस थाना से महज लगभग 20 मीटर की दूरी पर स्थित बोरतोल तीनआली क्षेत्र में एक नाबालिग के साथ कथित यौन उत्पीड़न की घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।
घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपी की पहचान राजेश ठाकुर (लगभग 40 वर्ष) के रूप में हुई है, जो बिहार मूल का निवासी बताया जा रहा है और नाजिरा थाना के समीप एक सैलून संचालित करता है। वह बोरतोल तीनआली इलाके में किराए के एक कमरे में रहता था।
आरोप है कि आरोपी ने शनिवार शाम एक लगभग दस वर्षीय नाबालिग को आम खिलाने का लालच देकर अपने किराए के कमरे में बुलाया। कमरे में ले जाने के बाद उसने दरवाजा बंद कर कथित रूप से यौन उत्पीड़न किया। घटना के बाद नाबालिग ने घर पहुंचकर परिजनों को पूरी बात बताई।
घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस थाने में घटना की जानकारी देते हुए एफआईआर दर्ज कराई। शिकायत मिलने के बाद नाजिरा आदर्श पुलिस थाना की पुलिस ने तत्काल जांच शुरू की और आरोपी को देर रात उसके किराए के घर से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस ने आरोपी को न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया गया। पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपी के खिलाफ बाल यौन अपराध संरक्षण अधिनियम (POCSO Act), 2012 तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की प्रासंगिक धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
वहीं नाजिरा पुलिस द्वारा पीड़ित नाबालिग बच्चे की आवश्यक स्वास्थ्य जांच करवाने के बाद उसके माता पिता के हवाले कर दिया गया।
यह घटना इसलिए भी चर्चा का विषय बनी हुई है क्योंकि कथित अपराध पुलिस थाना परिसर से बेहद कम दूरी पर घटित हुआ। स्थानीय लोगों ने घटना पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए दोषी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है तथा सभी पहलुओं की गहनता से पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
नोट: कानून के अनुसार नाबालिग पीड़ित की पहचान गोपनीय रखी गई है तथा उसकी पहचान से संबंधित किसी भी विवरण का प्रकाशन नहीं किया गया है।




