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चराईदेव में बाल विवाह के खिलाफ पुलिस का बड़ा अभियान, मोरानहाट में दो आरोपी गिरफ्तार : रातभर चले विशेष अभियान में पुलिस की कार्रवाई, बीएनएस, पॉक्सो और बाल विवाह निषेध अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत दो अलग-अलग मामले दर्ज : गिरफ्तार आरोपियों में 26 वर्षीय राजीव लोहार और 30 वर्षीय बबलू सांगा शामिल, दोनों को न्यायालय में किया गया पेश

एसएसपी सुरजीत सिंह पानेसर के निर्देशन में कार्रवाई, विस्तृत जांच और पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड की प्रक्रिया शुरू

शिवसागर, 27 अक्टूबर : ऊपरी असम के चराईदेव जिले में बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा पर अंकुश लगाने तथा नाबालिग बच्चों के अधिकारों, सुरक्षा और संरक्षण को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला पुलिस ने विशेष अभियान चलाते हुए दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पानेसर के निर्देशन में मोरानहाट पुलिस थाना क्षेत्र में बीती रात चलाए गए इस विशेष अभियान के दौरान पुलिस ने बाल विवाह से संबंधित दो अलग-अलग मामलों में कार्रवाई की। दोनों आरोपियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो) तथा बाल विवाह निषेध अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत मामले दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू की गई है।

मोरानहाट थाना क्षेत्र से दो आरोपी गिरफ्तार, अलग-अलग मामले दर्ज

पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, विशेष अभियान के दौरान गिरफ्तार किए गए पहले आरोपी की पहचान 26 वर्षीय राजीव लोहार के रूप में हुई है। वह चराईदेव जिले के मोरानहाट थाना अंतर्गत खुमताई कोइलागोरा निवासी नगेन लोहार का पुत्र है। राजीव लोहार के विरुद्ध मोरानहाट पुलिस थाने में मामला संख्या 58/2026 दर्ज किया गया है। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2)(m), पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 तथा बाल विवाह निषेध अधिनियम की धारा 9 के तहत कानूनी कार्रवाई की गई है।

इसी अभियान के दौरान गिरफ्तार किए गए दूसरे आरोपी की पहचान 30 वर्षीय बबलू सांगा के रूप में हुई है। वह चराईदेव जिले के मोरानहाट थाना क्षेत्र अंतर्गत उषापुर नंबर 2 सरुपथार निवासी स्वर्गीय दयाराम सांगा का पुत्र है। उसके विरुद्ध मोरानहाट पुलिस थाने में मामला संख्या 59/2026 दर्ज किया गया है। इस मामले में भी भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2)(m), पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 तथा बाल विवाह निषेध अधिनियम की धारा 9 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई है।

बीएनएस, पॉक्सो और बाल विवाह निषेध अधिनियम की गंभीर धाराओं में कार्रवाई

उल्लेखनीय है कि दोनों मामलों में पुलिस द्वारा लगाई गई कानूनी धाराएं अत्यंत गंभीर प्रकृति के अपराधों से संबंधित हैं। भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2)(m) बारह वर्ष से कम आयु की बालिका के साथ बलात्कार के अपराध में कठोर दंड का प्रावधान करती है। वहीं पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 गंभीर प्रवेशन लैंगिक हमले के लिए कठोर सजा का प्रावधान करती है। इसके अतिरिक्त बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 की धारा 9 के अंतर्गत किसी वयस्क पुरुष द्वारा बाल विवाह करना दंडनीय अपराध माना गया है।

इन कानूनी प्रावधानों के तहत मामले दर्ज किए जाने से दोनों प्रकरणों की गंभीरता का पता चलता है। पुलिस द्वारा संबंधित घटनाओं की परिस्थितियों, उपलब्ध साक्ष्यों तथा अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों की जांच की जा रही है। हालांकि, आरोपियों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगी।

दोनों आरोपियों को न्यायालय में किया गया पेश, पुलिस रिमांड की प्रक्रिया शुरू

चराईदेव जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पानेसर से प्राप्त जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों को आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद संबंधित न्यायालय के समक्ष पेश किया गया है। दोनों मामलों की विस्तृत जांच तथा आरोपियों से आगे की पूछताछ के उद्देश्य से उन्हें पुलिस रिमांड पर लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

पुलिस रिमांड मिलने की स्थिति में जांच अधिकारी संबंधित घटनाओं की परिस्थितियों, घटनाक्रम, उपलब्ध साक्ष्यों और मामलों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के संबंध में आरोपियों से पूछताछ कर सकते हैं। पुलिस का उद्देश्य दोनों मामलों से संबंधित तथ्यों की गहन जांच कर कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। फिलहाल दोनों मामलों में जांच जारी है।

बाल विवाह की रोकथाम और नाबालिगों की सुरक्षा पर विशेष जोर

चराईदेव जिले में बाल विवाह के खिलाफ चलाया गया यह विशेष अभियान नाबालिग बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा गैरकानूनी सामाजिक प्रथाओं के विरुद्ध पुलिस की कार्रवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि इससे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, स्वतंत्रता और समुचित विकास के अधिकारों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

विशेष रूप से कम उम्र में विवाह होने से बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, शैक्षणिक भविष्य और सामाजिक विकास पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है। इसी कारण बाल विवाह की रोकथाम तथा नाबालिगों को लैंगिक अपराधों से संरक्षण प्रदान करने के लिए देश में विभिन्न कानूनी प्रावधान लागू किए गए हैं। परिस्थितियों और अपराध की प्रकृति के अनुसार ऐसे मामलों में बाल विवाह निषेध अधिनियम के साथ पॉक्सो अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।

बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा के उन्मूलन के लिए कानून का प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक

चराईदेव पुलिस की इस कार्रवाई ने एक बार फिर बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा के उन्मूलन, नाबालिगों के अधिकारों की रक्षा तथा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता को रेखांकित किया है। बाल विवाह की रोकथाम के लिए पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई के साथ-साथ समाज में जागरूकता, शिक्षा तथा सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देना भी आवश्यक है।

फिलहाल मोरानहाट पुलिस थाने में दर्ज दोनों मामलों की जांच जारी है। पुलिस द्वारा जुटाए जाने वाले साक्ष्यों, पूछताछ और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। दोनों गिरफ्तार व्यक्तियों के विरुद्ध लगाए गए आरोप अभी न्यायालय में सिद्ध होना शेष हैं। चराईदेव जिले में चलाया गया यह विशेष अभियान बाल विवाह की रोकथाम और नाबालिगों के संरक्षण की दिशा में कानून के सख्त अनुपालन के महत्व को उजागर करता है।

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