तेजपुर में शिवसागर के युवक अमृतपाल सिंह की रहस्यमय मौत—परिवार ने उठाए गंभीर सवाल, CID जांच की मांग : मिशन चाराली में हुई मौत को लेकर गहराया रहस्य—परिवार ने आत्महत्या के दावे पर जताया संदेह, निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग : मानसिक प्रताड़ना और दबाव का आरोप—बहन का दावा, मौत से पहले फोन और मैसेज के जरिए रोते हुए साझा की थी पीड़ा : मौत के बाद भी फेसबुक अकाउंट सक्रिय रहने का दावा—फोटो, कमेंट और अन्य सामग्री डिलीट किए जाने पर डिजिटल साक्ष्य प्रभावित होने की आशंका
शिवसागर सदर थाने में दी गई थी शिकायत—घटना तेजपुर की होने के कारण जांच के लिए तेजपुर पुलिस को स्थानांतरित : ऑल असम सिख यूथ एसोसिएशन के अध्यक्ष रविंदर सिंह और सचिव इश्मीत सिंह भी आए सामने—मोबाइल, कॉल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया की फॉरेंसिक जांच की मांग

शिवसागर, 23 सितंबर : तेजपुर के मिशन चाराली इलाके में शिवसागर निवासी युवक अमृतपाल सिंह की रहस्यमय परिस्थितियों में हुई मौत को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मृतक के परिजनों के साथ सिख समाज और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने घटना की परिस्थितियों पर संदेह जताते हुए मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। परिवार चाहता है कि मामले की जांच किसी उच्चस्तरीय एजेंसी अथवा CID से कराई जाए और मौत से पहले तथा उसके बाद के पूरे घटनाक्रम को जांच के दायरे में लिया जाए।
परिवार का कहना है कि मामले को केवल आत्महत्या मानकर जांच सीमित नहीं की जानी चाहिए। मौत से पहले कथित मानसिक दबाव, युवक के फोन और मैसेज के जरिए परिवार से किए गए संवाद, व्यक्तिगत संबंधों से जुड़े आरोप तथा मौत के बाद उसके फेसबुक अकाउंट पर कथित गतिविधियों सहित प्रत्येक पहलू की वैज्ञानिक जांच होनी चाहिए। हालांकि परिवार और संगठनों द्वारा लगाए गए आरोपों की अभी स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

परिवार ने आत्महत्या के दावे पर उठाए सवाल
अमृतपाल सिंह के परिजनों ने उसकी मौत की परिस्थितियों पर गंभीर संदेह व्यक्त किया है। परिवार का कहना है कि इसे सामान्य आत्महत्या का मामला मान लेना उचित नहीं होगा और किसी अन्य व्यक्ति की संभावित भूमिका अथवा किसी सुनियोजित साजिश की आशंका सहित सभी पहलुओं की जांच होनी चाहिए।
परिवार द्वारा जताई गई हत्या अथवा साजिश की आशंका फिलहाल एक आरोप और जांच की मांग है। अमृतपाल की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की कोई भूमिका थी या नहीं, इसका तथ्यात्मक निर्धारण पुलिस अथवा सक्षम जांच एजेंसी को उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर करना होगा।
बहन का आरोप—मौत से पहले मानसिक दबाव में था अमृतपाल
अमृतपाल की बहन ने आरोप लगाया है कि मौत से पहले उनके भाई को मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था और कथित दबाव तथा प्रताड़ना के कारण वह गंभीर तनाव से गुजर रहा था। उनका दावा है कि अमृतपाल ने मौत से पहले फोन और मैसेज के माध्यम से रोते हुए अपनी परेशानी और उस पर कथित रूप से बनाए जा रहे दबाव के बारे में बताया था।
परिवार का कहना है कि उनके पास कुछ संदेशों और संवाद से संबंधित ऐसी जानकारियां हैं, जो अमृतपाल की मौत से पहले की मानसिक स्थिति को समझने में महत्वपूर्ण हो सकती हैं। परिजनों ने इन संदेशों, कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल सामग्री को सुरक्षित कर उनकी वैज्ञानिक तथा फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की है।

व्यक्तिगत संबंध को लेकर भी परिवार ने लगाए आरोप
परिजनों के मुताबिक, अमृतपाल सिंह का अनुश्री बोरा नामक युवती के साथ संबंध था। परिवार ने आरोप लगाया है कि संबंधित युवती की ओर से अमृतपाल पर अपने परिवार से अलग होने अथवा परिवार को छोड़ने का कथित दबाव बनाया जा रहा था। परिजनों ने इस आरोप को अमृतपाल की मौत से पहले की परिस्थितियों से जोड़ते हुए पुलिस से इसकी भी विस्तृत जांच करने की मांग की है।
हालांकि इस आरोप पर संबंधित युवती का पक्ष उपलब्ध नहीं है और परिवार के दावों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है। ऐसे में जांच पूरी होने से पहले इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
मौत के बाद फेसबुक अकाउंट सक्रिय रहने का दावा
इस मामले में अमृतपाल सिंह के सोशल मीडिया अकाउंट को लेकर भी परिवार ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। परिजनों का दावा है कि अमृतपाल की मौत के बाद और यहां तक कि उसके अंतिम संस्कार के दौरान भी उसका फेसबुक अकाउंट सक्रिय दिखाई दिया था।
परिवार ने आरोप लगाया है कि इस दौरान अकाउंट से कुछ तस्वीरें, कमेंट और अन्य जानकारियां कथित रूप से डिलीट की गईं। परिजनों का कहना है कि यदि युवक की मौत के बाद किसी अन्य व्यक्ति ने उसका अकाउंट एक्सेस कर सामग्री हटाई है, तो इसकी जांच जरूरी है क्योंकि इससे संभावित डिजिटल साक्ष्य प्रभावित होने का सवाल उठता है।

फेसबुक लॉगिन से लेकर मोबाइल तक साइबर फॉरेंसिक जांच की मांग
परिवार चाहता है कि तकनीकी जांच के जरिए यह पता लगाया जाए कि अमृतपाल की मौत के बाद उसका फेसबुक अकाउंट कब-कब सक्रिय हुआ, अकाउंट को किन डिवाइसों से एक्सेस किया गया और कौन-सी सामग्री हटाई अथवा बदली गई।
इसके साथ ही मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, मैसेज, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा उनकी साइबर और डिजिटल फॉरेंसिक जांच कराने की मांग की गई है। परिवार का मानना है कि इन तकनीकी साक्ष्यों की जांच से मौत से पहले और बाद की घटनाओं की कड़ियों को समझने में मदद मिल सकती है।
शिवसागर सदर थाने से तेजपुर पुलिस को स्थानांतरित हुआ मामला
जानकारी के मुताबिक, अमृतपाल सिंह की मौत को लेकर प्रारंभिक शिकायत शिवसागर सदर पुलिस थाने में दी गई थी। चूंकि मौत की घटना तेजपुर में हुई थी, इसलिए शिकायत को आगे की जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई के लिए तेजपुर पुलिस को स्थानांतरित कर दिया गया।
परिवार ने पुलिस की अब तक की कार्रवाई को लेकर असंतोष व्यक्त किया है। परिजनों का कहना है कि शिकायत दिए जाने के तीन-चार दिन बाद तक उन्हें किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली, जिससे उनकी चिंता और बढ़ी। उनका कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच में अधिक तत्परता दिखाई जानी चाहिए।

ऑल असम सिख यूथ एसोसिएशन ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
इस बीच ऑल असम सिख यूथ एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष रविंदर सिंह और सचिव इश्मीत सिंह भी परिवार के समर्थन में सामने आए हैं। दोनों पदाधिकारियों ने अमृतपाल की मां और बहन द्वारा दिए गए बयानों का उल्लेख करते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
संगठन के पदाधिकारियों ने परिवार द्वारा जताई गई सुनियोजित हत्या की आशंका का उल्लेख करते हुए कहा है कि आरोपों की वास्तविकता का पता केवल निष्पक्ष और विस्तृत जांच से ही लगाया जा सकता है। संगठन ने संभावित डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड, मैसेज और सोशल मीडिया गतिविधियों की तकनीकी जांच कराने की भी मांग की है।
सिख समाज और अन्य संगठनों ने भी उठाए सवाल
सिख समाज के प्रतिनिधियों के साथ ऊपरी असम थलुवा मुस्लिम कल्याण परिषद से जुड़े प्रतिनिधियों ने भी मामले में पुलिस-प्रशासन से विस्तृत जांच की मांग की है। उनका कहना है कि घटना से जुड़े प्रत्येक पहलू की पारदर्शी तरीके से पड़ताल होनी चाहिए, ताकि मौत को लेकर उठ रहे सवालों का तथ्यात्मक जवाब सामने आ सके।
वहीं उजनी असम थलुवा मुस्लिम परिषद के केंद्रीय अध्यक्ष फरीद इस्लाम हजारिका, मृतक के परिवार, सिख समाज, ऑल असम सिख यूथ एसोसिएशन और अन्य स्थानीय संगठनों ने पूरे मामले की जांच किसी उच्चस्तरीय एजेंसी अथवा CID से कराने की मांग की है।

CID जांच से सच सामने लाने की मांग
परिवार और संगठनों का कहना है कि उच्चस्तरीय एवं तकनीकी जांच से ही अमृतपाल की मौत से पहले हुए कथित संवाद, मानसिक दबाव और प्रताड़ना के आरोप, व्यक्तिगत संबंधों से जुड़े दावे तथा मौत के बाद सोशल मीडिया अकाउंट पर हुई कथित गतिविधियों जैसे सवालों का जवाब मिल सकता है।
उनकी मांग है कि जांच एजेंसी डिजिटल साक्ष्यों को तत्काल सुरक्षित करे और आवश्यकता पड़ने पर तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से मोबाइल तथा सोशल मीडिया डेटा का विश्लेषण कर पूरे घटनाक्रम की समयरेखा तैयार करे।

आरोपों की आधिकारिक पुष्टि बाकी—जांच के निष्कर्ष होंगे महत्वपूर्ण
फिलहाल अमृतपाल सिंह की मौत को लेकर परिवार की ओर से जताई गई सुनियोजित हत्या की आशंका, मानसिक प्रताड़ना और दबाव के आरोप तथा डिजिटल साक्ष्यों से कथित छेड़छाड़ के दावे जांच के विषय हैं और इन्हें प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
आरोपों में नामित पक्ष का विस्तृत पक्ष और तेजपुर पुलिस की ओर से मामले पर आधिकारिक जानकारी सामने आना भी महत्वपूर्ण है। पुलिस अथवा किसी सक्षम जांच एजेंसी की जांच के निष्कर्ष के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अमृतपाल सिंह की मौत किन परिस्थितियों में हुई और परिवार द्वारा उठाए गए सवालों तथा आरोपों का उपलब्ध साक्ष्यों से क्या संबंध है।




