सोनारी के सोनालीपाम में जंगली हाथियों का भारी उत्पात—एक ही रात में चार मकान तहस-नहस : अभयपुर आरक्षित वन क्षेत्र से भोजन की तलाश में आबादी के बीच पहुंचा हाथियों का झुंड—चार परिवारों के आशियाने उजड़े : प्रबीन बैश्य, भवेन बैश्य और लोहित गोगोई के मकानों को भारी नुकसान—गोवालापथार में भी एक घर बना निशाना
बाल-बाल बची घरों में मौजूद लोगों की जान—थुकुबिल, गुटीघाट और खेरबारी समेत आसपास के गांवों में हाथियों की आवाजाही से दहशत : रात में सूचना के बावजूद वनकर्मियों के मौके पर नहीं पहुंचने का ग्रामीणों का आरोप—त्वरित सुरक्षा व्यवस्था की उठी मांग

सोनारी, 22 सितंबर : सोनारी क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष की समस्या एक बार फिर गंभीर रूप में सामने आई है। अभयपुर आरक्षित वन क्षेत्र से भोजन की तलाश में आबादी वाले इलाके की ओर निकले जंगली हाथियों के एक झुंड ने बीती रात थुकुबिल क्षेत्र के सोनालीपाम और आसपास के गांवों में जमकर उत्पात मचाया। हाथियों ने एक ही रात में चार आवासीय मकानों को निशाना बनाते हुए उन्हें बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया।

राहत की बात यह रही कि हाथियों के अचानक पहुंचने और मकानों को नुकसान पहुंचाने के बावजूद घरों में मौजूद लोग किसी तरह सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे। घटना में किसी व्यक्ति के हताहत होने की सूचना नहीं है। हालांकि चार परिवारों के मकानों को हुए भारी नुकसान ने प्रभावित लोगों के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी है।

अभयपुर वन क्षेत्र से सोनालीपाम पहुंचा हाथियों का झुंड
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जंगली हाथियों का झुंड रात के समय अभयपुर आरक्षित वन क्षेत्र से निकलकर सोनालीपाम के आबादी वाले हिस्से में पहुंचा। अचानक हाथियों के गांव में घुस आने से लोगों में अफरा-तफरी मच गई।
इसके बाद हाथियों ने एक के बाद एक आवासीय मकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। ग्रामीणों के मुताबिक हाथियों ने घरों के विभिन्न हिस्सों को तोड़कर व्यापक नुकसान पहुंचाया।

प्रबीन बैश्य, भवेन बैश्य और लोहित गोगोई के मकान क्षतिग्रस्त
सोनालीपाम निवासी प्रबीन बैश्य, भवेन बैश्य और लोहित गोगोई के आवासीय मकान हाथियों के उत्पात में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। अचानक हुए इस हमले के कारण प्रभावित परिवारों को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
इसी दौरान नजदीकी गोवालापथार इलाके में भी जंगली हाथियों ने एक अन्य आवासीय मकान को निशाना बनाया और उसे नुकसान पहुंचाया। इस तरह एक ही रात में सोनालीपाम और गोवालापथार के कुल चार परिवार हाथियों के उत्पात से प्रभावित हुए।

बाल-बाल बची परिवारों की जान
रात के समय हाथियों के अचानक घरों के पास पहुंचने से प्रभावित परिवारों में भय का माहौल बन गया। मकानों को तोड़े जाने के दौरान अंदर मौजूद लोगों ने किसी तरह सुरक्षित स्थान पर पहुंचकर अपनी जान बचाई।
घटना में किसी व्यक्ति की जान नहीं गई, लेकिन मकानों को हुए व्यापक नुकसान के कारण प्रभावित परिवारों के सामने रहने और क्षतिग्रस्त घरों की मरम्मत की समस्या खड़ी हो गई है।

थुकुबिल से खेरबारी तक लगातार बना हुआ है खतरा
स्थानीय लोगों का कहना है कि अभयपुर आरक्षित वन क्षेत्र से सटे गांवों में जंगली हाथियों का प्रवेश कोई नई घटना नहीं है। थुकुबिल, गुटीघाट, खेरबारी, सोनालीपाम और गोवालापथार सहित आसपास के कई गांव समय-समय पर जंगली हाथियों की आवाजाही से प्रभावित होते रहे हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक भोजन की तलाश में वन क्षेत्र से बाहर निकलने वाले हाथी अक्सर आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच जाते हैं। इसके कारण विशेष रूप से रात के समय ग्रामीणों को भय और अनिश्चितता के बीच रहना पड़ता है।
लोगों का कहना है कि हाथियों की लगातार आवाजाही के कारण न केवल संपत्ति, बल्कि ग्रामीणों की जान पर भी खतरा बना रहता है।

पूर्व में भी सामने आ चुकी हैं जान जाने की घटनाएं
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस इलाके में मानव-हाथी संघर्ष लंबे समय से चिंता का विषय बना हुआ है और पूर्व में जंगली हाथियों के हमलों में लोगों की जान जाने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं।
इसके बावजूद वन क्षेत्र से सटे गांवों में हाथियों की आवाजाही लगातार जारी रहने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ती जा रही है। सोनालीपाम की ताजा घटना के बाद आसपास के गांवों में भी लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर भय का माहौल है।
ग्रामीणों ने संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष रूप से रात के समय निगरानी बढ़ाने और हाथियों के आबादी वाले इलाके में प्रवेश करने पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।

वन विभाग के खिलाफ ग्रामीणों में नाराजगी
घटना के बाद स्थानीय लोगों ने वन विभाग की प्रतिक्रिया को लेकर भी नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का आरोप है कि पास में ही बैगोम वन विभाग का कार्यालय होने के बावजूद हाथियों के गांव में प्रवेश करने की सूचना रात में विभाग को दी गई, लेकिन कोई वनकर्मी समय पर घटनास्थल पर नहीं पहुंचा।
ग्रामीणों का कहना है कि जंगली हाथियों के उत्पात के दौरान वन विभाग की तत्काल सहायता बेहद जरूरी थी, लेकिन कथित तौर पर सहायता नहीं मिलने के कारण लोगों को स्वयं ही भय और जोखिम के बीच परिस्थितियों का सामना करना पड़ा।
हालांकि वनकर्मियों के मौके पर नहीं पहुंचने संबंधी ग्रामीणों के आरोप पर वन विभाग का पक्ष सामने आना बाकी है।

प्रभावित गांवों के लिए त्वरित सुरक्षा व्यवस्था की मांग
एक ही रात में चार मकानों को नुकसान पहुंचाए जाने से स्थानीय लोगों में चिंता और नाराजगी दोनों बढ़ गई हैं। ग्रामीणों ने वन विभाग से मानव-हाथी संघर्ष से प्रभावित गांवों के लिए अधिक प्रभावी और त्वरित सुरक्षा व्यवस्था तैयार करने की मांग की है।
उनका कहना है कि हाथियों की आवाजाही वाले संवेदनशील इलाकों की नियमित निगरानी, रात में त्वरित प्रतिक्रिया और खतरे की स्थिति में ग्रामीणों को समय पर सतर्क करने की व्यवस्था मजबूत की जानी चाहिए।
मानव-हाथी संघर्ष ने फिर बढ़ाई चिंता
सोनालीपाम और गोवालापथार की ताजा घटना ने एक बार फिर अभयपुर आरक्षित वन क्षेत्र से सटे गांवों में मानव-हाथी संघर्ष की गंभीर समस्या को सामने ला दिया है। लगातार आबादी वाले इलाकों तक पहुंच रहे जंगली हाथियों के कारण ग्रामीणों में जान-माल की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
एक ही रात में चार परिवारों के आशियाने क्षतिग्रस्त होने के बाद अब प्रभावित लोगों और आसपास के गांवों की नजर वन विभाग तथा प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी है।




