Welcome to NE NEWS 24X7   Click to listen highlighted text! Welcome to NE NEWS 24X7
ASSAMCOMPENSATIONFLOODGOVERNMENTNATIONALNATURAL DISASTERREHABILITATIONSIVASAGARSTATEदेशराज्यशिवसागर

शिवसागर की विनाशकारी बाढ़ की समीक्षा के लिए पहुंची NDMA की केंद्रीय टीम—कारण, नुकसान और भविष्य की तैयारियों पर व्यापक मंथन : ब्रिगेडियर आर. गुरुंग के नेतृत्व में विशेषज्ञों ने जिला प्रशासन के साथ की समीक्षा बैठक—बाढ़ के तकनीकी कारणों से लेकर बचाव, राहत और पुनर्वास तक की ली विस्तृत जानकारी : जिला आयुक्त मृदुल यादव ने बाढ़ के प्रारंभिक कारणों और प्रभाव से कराया अवगत—DDMA ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन में पेश की आपदा और राहत कार्यों की समग्र तस्वीर

पूर्व चेतावनी प्रणाली मजबूत करने, जन-जागरूकता बढ़ाने और आपदा-सहनशील बुनियादी ढांचा विकसित करने पर जोर : मानसून में जिला स्तर पर सक्रिय निगरानी इकाई गठित करने की सलाह—‘हालिया आपदा के अनुभव से सीखकर भविष्य की बाढ़ से निपटने की क्षमता बढ़ाना मुख्य उद्देश्य’: ब्रिगेडियर आर. गुरुंग

शिवसागर, 22 सितंबर : शिवसागर जिले में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ के कारणों, व्यापक प्रभाव, प्रशासनिक प्रतिक्रिया और भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने की तैयारियों की समीक्षा के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा नामित केंद्रीय विशेषज्ञ दल मंगलवार को शिवसागर पहुंचा। NDMA के वरिष्ठ सलाहकार (M.E. एवं IRS) ब्रिगेडियर आर. गुरुंग के नेतृत्व में पहुंचे दल ने जिला प्रशासन और विभिन्न संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की।

जिला आयुक्त मृदुल यादव की उपस्थिति में जिला आयुक्त कार्यालय के चुकाफा सभाकक्ष में आयोजित बैठक में हालिया बाढ़ के संभावित एवं तकनीकी कारणों के साथ बचाव अभियान, राहत वितरण, नुकसान का आकलन, पुनर्वास और पुनर्बहाली से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर व्यापक चर्चा हुई।

समीक्षा का प्रमुख उद्देश्य हालिया आपदा से मिले अनुभवों और सामने आई चुनौतियों का विश्लेषण करते हुए भविष्य में बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक रणनीति तैयार करना रहा।

विभिन्न तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञ केंद्रीय दल में शामिल

ब्रिगेडियर आर. गुरुंग के नेतृत्व वाले केंद्रीय दल में जल प्रबंधन, मौसम विज्ञान, सुदूर संवेदन, जल विज्ञान और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल रहे।

दल में केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अधीक्षण अभियंता शशांक भूषण, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के वैज्ञानिक ‘एफ’ डॉ. सुमित दास, राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केंद्र (NRSC) के वैज्ञानिक/अभियंता एस.एफ., DMSG, RSAA डॉ. एस.वी.एस.पी. शर्मा, राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान (NIH) के वैज्ञानिक ‘जी’ एवं प्रमुख डॉ. पंकज मणि तथा उत्तर पूर्वी अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (NESAC) के वैज्ञानिक/अभियंता ‘एसजी’ डॉ. दिगंत बर्मन शामिल रहे।

इसके अलावा असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के परियोजना प्रबंधक मुक्त राम डेका, GIS विशेषज्ञ बिरेन बैश्य और इंजीनियरिंग सलाहकार (बाढ़ शमन) नव डेका ने भी समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया।

जिला आयुक्त मृदुल यादव ने बताई बाढ़ की परिस्थितियां

बैठक की शुरुआत जिला आयुक्त मृदुल यादव के स्वागत संबोधन से हुई। उन्होंने केंद्रीय दल को शिवसागर जिले में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ के प्रारंभिक कारणों और उससे उत्पन्न परिस्थितियों की जानकारी दी।

जिला आयुक्त ने बाढ़ के दौरान जिले के विभिन्न हिस्सों पर पड़े प्रभाव के साथ प्रशासन की ओर से चलाए गए बचाव अभियान, राहत कार्यों और पुनर्वास संबंधी व्यवस्थाओं से भी केंद्रीय विशेषज्ञों को अवगत कराया।

उन्होंने आपदा के दौरान विभिन्न विभागों के बीच स्थापित समन्वय और परिस्थितियों से निपटने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण भी साझा किया।

DDMA ने प्रेजेंटेशन के जरिए पेश की बाढ़ की समग्र तस्वीर

शिवसागर जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की जिला परियोजना अधिकारी डॉ. विषयलक्ष्मी गोगोई ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से हालिया बाढ़ से संबंधित विस्तृत जानकारी केंद्रीय दल के सामने प्रस्तुत की।

प्रेजेंटेशन में बाढ़ के लिए जिम्मेदार माने जा रहे विभिन्न तकनीकी कारकों, बचाव अभियान के चरणों, नुकसान के आकलन, राहत वितरण और पुनर्बहाली से संबंधित व्यवस्थाओं का विस्तृत ब्यौरा दिया गया।

इसके जरिए केंद्रीय विशेषज्ञों को बाढ़ के दौरान जिले में उत्पन्न परिस्थितियों और उनसे निपटने के लिए प्रशासन द्वारा अपनाई गई रणनीतियों की समग्र तस्वीर से अवगत कराया गया।

‘आपदा के अनुभव से सीखना समीक्षा का मुख्य उद्देश्य’

NDMA के वरिष्ठ सलाहकार ब्रिगेडियर आर. गुरुंग ने जिला प्रशासन और संबंधित विभागों से बाढ़ के दौरान सामने आई चुनौतियों और उनसे निपटने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत जानकारी ली।

उन्होंने कहा कि हालिया आपदा के अनुभवों से सीख लेते हुए भविष्य में संभावित बाढ़ से निपटने की क्षमता को और मजबूत करना इस समीक्षा प्रक्रिया का प्रमुख उद्देश्य है।

उनके अनुसार, आपदा के दौरान सामने आई व्यावहारिक चुनौतियों, तकनीकी समस्याओं और प्रशासनिक अनुभवों का विश्लेषण भविष्य की बाढ़ प्रबंधन रणनीति तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Early Warning System को और मजबूत करने पर जोर

बैठक में भविष्य में बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली (Early Warning System) को अधिक प्रभावी और मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया।

ब्रिगेडियर आर. गुरुंग ने संभावित खतरे की सूचना समय रहते संबंधित विभागों और आम लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था को सुदृढ़ करने की आवश्यकता बताई।

इसके साथ ही आपदा के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने, संभावित बाढ़ के दौरान अपनाई जाने वाली सावधानियों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने और स्थानीय स्तर पर समुदायों की तैयारी मजबूत करने की जरूरत भी रेखांकित की गई।

आपदा-सहनशील बुनियादी ढांचे की जरूरत

समीक्षा के दौरान आपदा-सहनशील बुनियादी ढांचे (Disaster-Resilient Infrastructure) के विकास पर भी विशेष चर्चा हुई।

विशेषज्ञों ने बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से बार-बार प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में भविष्य की आधारभूत संरचनाओं की योजना तैयार करते समय आपदा जोखिम, क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों और संभावित प्रभावों को ध्यान में रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

इसका उद्देश्य भविष्य में प्राकृतिक आपदा आने की स्थिति में बुनियादी ढांचे को होने वाले नुकसान को कम करना और आवश्यक सेवाओं को यथासंभव सुचारु बनाए रखना है।

मानसून में सक्रिय निगरानी इकाई बनाने की सलाह

ब्रिगेडियर आर. गुरुंग ने मानसून के दौरान जिला स्तर पर एक सक्रिय निगरानी इकाई गठित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

इस व्यवस्था के जरिए मौसम, नदियों के जलस्तर और संभावित बाढ़ संबंधी परिस्थितियों की लगातार निगरानी करते हुए जोखिम बढ़ने की स्थिति में समय रहते आवश्यक कदम उठाने पर जोर दिया गया।

बैठक में बेहतर तकनीकी निगरानी के साथ विभिन्न विभागों के बीच सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान और समन्वित प्रतिक्रिया को भी प्रभावी बाढ़ प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण माना गया।

वैज्ञानिक और तकनीकी पहलुओं पर विशेषज्ञों ने दिए सुझाव

केंद्रीय दल में शामिल विशेषज्ञों ने अपने-अपने क्षेत्रों के अनुभव के आधार पर जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के साथ कई सुझाव साझा किए।

बैठक में जल प्रबंधन, मौसम संबंधी सूचनाओं के बेहतर उपयोग, सुदूर संवेदन तकनीक, बाढ़ के वैज्ञानिक आकलन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण, GIS और बाढ़ शमन जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

विशेषज्ञों ने तकनीकी एवं वैज्ञानिक सूचनाओं का प्रभावी उपयोग करते हुए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप भविष्य की कार्ययोजना तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

प्रशासन और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

समीक्षा बैठक में जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सतीश चंद्र ठाकुरिया, मंडलीय वन अधिकारी चिरंजीव पी., नाजिरा की सह-जिला आयुक्त प्रतिभा मेश्राम, डिमौ की सह-जिला आयुक्त लुकुमणि बोरा, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की मुख्य कार्यकारी अधिकारी मीनाक्षी पेर्मे तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ऋषभ हांस उपस्थित रहे।

इसके अलावा सहायक आयुक्त पर्शिया खनिकर और अन्वेषा ठाकुर, निर्वाचन अधिकारी गणेश चंद्र बड़ो, विभिन्न राजस्व चक्रों के चक्र अधिकारी तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी और कर्मचारी भी बैठक में शामिल हुए।

भविष्य की बाढ़ प्रबंधन रणनीति पर रहा मुख्य फोकस

केंद्रीय दल की समीक्षा का मुख्य फोकस हालिया विनाशकारी बाढ़ के दौरान सामने आई परिस्थितियों, तकनीकी चुनौतियों और प्रशासनिक अनुभवों का अध्ययन कर भविष्य के लिए अधिक प्रभावी रणनीति विकसित करने पर रहा।

बैठक में पूर्व चेतावनी तंत्र, बेहतर अंतर-विभागीय समन्वय, जन-जागरूकता, वैज्ञानिक एवं तकनीकी निगरानी, आपदा-सहनशील आधारभूत संरचना और मानसून के दौरान सक्रिय निगरानी व्यवस्था को भविष्य की बाढ़ प्रबंधन रणनीति के महत्वपूर्ण घटकों के रूप में रेखांकित किया गया।

केंद्रीय विशेषज्ञ दल की समीक्षा से प्राप्त तकनीकी निष्कर्ष और सुझाव भविष्य में शिवसागर जिले की बाढ़ प्रबंधन एवं आपदा प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने की दिशा में उपयोगी आधार बनने की उम्मीद है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!