महिला सशक्तिकरण के 50 स्वर्णिम वर्ष: रंगपुर महिला सोरा ने सादगी से मनाया स्वर्ण जयंती स्थापना दिवस : 1975 में स्व. रानू भुईयां और पुष्पलता चालीहा के नेतृत्व में शुरू हुआ था सफर : पांच दशकों से महिला उत्थान और समाजसेवा में सक्रिय : प्रलयंकारी बाढ़ के कारण स्वर्ण जयंती के भव्य कार्यक्रम स्थगित, लायंस क्लब परिसर में ध्वजारोहण कर निभाई स्थापना दिवस की औपचारिकता
स्वर्णिम इतिहास और सामाजिक गतिविधियों को किया याद : “महिला सशक्तिकरण के साथ जनसेवा को और गति देकर संस्था को अधिक सक्रिय बनाएं सदस्याएं”—अध्यक्ष गौरी भागवती : बाढ़ प्रभावित 100 से अधिक परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाकर निभाया सामाजिक दायित्व

शिवसागर, 7 सितंबर : महिलाओं को संगठित कर उनके सर्वांगीण विकास, सामाजिक भागीदारी और सशक्तिकरण की दिशा में पांच दशकों से कार्यरत शिवसागर की अग्रणी महिला सामाजिक संस्था रंगपुर महिला सोरा ने सोमवार को अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे करते हुए स्वर्ण जयंती वर्ष के स्थापना दिवस का पालन किया। वर्ष 1975 में एक महत्वाकांक्षी सामाजिक उद्देश्य के साथ शुरू हुई संस्था की यह पांच दशकों की यात्रा महिला सशक्तिकरण के साथ समाजसेवा और जनकल्याण के अनेक कार्यों की साक्षी रही है।

हालांकि संस्था के लिए यह ऐतिहासिक अवसर बड़े स्तर पर उत्सव मनाने का था, लेकिन हाल ही में शिवसागर और आसपास के क्षेत्रों में आई प्रलयंकारी बाढ़ तथा उससे उत्पन्न गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए संस्था ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए स्वर्ण जयंती से जुड़े भव्य कार्यक्रमों को फिलहाल स्थगित रखने का निर्णय लिया। इसी कारण स्थापना दिवस पर शिवसागर लायंस क्लब परिसर में एक सादगीपूर्ण कार्यक्रम आयोजित कर ध्वजारोहण के साथ स्थापना दिवस की औपचारिकता पूरी की गई।
7 सितंबर 1975 को रखी गई थी संगठन की नींव
रंगपुर महिला सोरा की स्थापना ठीक 50 वर्ष पूर्व 7 सितंबर 1975 को हुई थी। संस्था की संस्थापक अध्यक्ष स्वर्गीय रानू भुईयां तथा संस्थापक सचिव श्रीमती पुष्पलता चालीहा के नेतृत्व में महिलाओं के सर्वांगीण विकास के महत्वाकांक्षी लक्ष्य और व्यापक सामाजिक उद्देश्यों को लेकर इस महिला संगठन का गठन किया गया था।
उस दौर में महिलाओं को एक साझा सामाजिक मंच प्रदान करने, उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित करने, उनकी प्रतिभा को सामने लाने और सामाजिक गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ाने की सोच के साथ शुरू हुई यह पहल समय के साथ शिवसागर के प्रमुख सामाजिक संगठनों में अपनी पहचान बनाने में सफल रही। पांच दशकों की यात्रा में संस्था ने महिला सशक्तिकरण को अपनी गतिविधियों के केंद्र में रखते हुए समाजसेवा और जरूरतमंदों की सहायता को भी समान महत्व दिया।
आज रंगपुर महिला सोरा केवल महिलाओं के लिए एक संगठनात्मक मंच के रूप में ही नहीं, बल्कि शिवसागर के सामाजिक जीवन में सक्रिय भागीदारी निभाने वाले अग्रणी संगठनों में भी शुमार है।
गौरी भागवती ने फहराया संस्था का ध्वज
स्वर्ण जयंती स्थापना दिवस के अवसर पर शिवसागर लायंस क्लब परिसर में आयोजित कार्यक्रम में रंगपुर महिला सोरा की अध्यक्ष गौरी भागवती ने संस्था का ध्वज फहराया। ध्वजारोहण के साथ उपस्थित सदस्याओं ने संस्था की स्थापना के 50 वर्षों की उपलब्धियों, संघर्षों और सामाजिक योगदान को याद किया।
इस दौरान अध्यक्ष गौरी भागवती ने अपने संदेश में संस्था के गठन से लेकर वर्तमान समय तक की यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने उन महिलाओं के योगदान को भी स्मरण किया, जिन्होंने अलग-अलग समय में संगठन को मजबूत बनाने और इसके उद्देश्यों को समाज के बीच पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि वर्ष 1975 में जिन उद्देश्यों और आदर्शों को सामने रखकर रंगपुर महिला सोरा की स्थापना की गई थी, संस्था ने पांच दशकों के दौरान उन्हें आगे बढ़ाने का निरंतर प्रयास किया है। बदलते समय के साथ महिलाओं की भूमिका और सामाजिक जिम्मेदारियों का दायरा भी बढ़ा है, इसलिए संस्था के सामने अब अपने कार्यों को और व्यापक बनाने की जिम्मेदारी है।
स्वर्ण जयंती का उत्सव होना था भव्य, बाढ़ के कारण कार्यक्रम स्थगित
अध्यक्ष गौरी भागवती ने कहा कि किसी भी संस्था के लिए अपनी स्थापना के 50 वर्ष पूरे करना अत्यंत गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि होती है। रंगपुर महिला सोरा के लिए भी स्वर्ण जयंती वर्ष को विभिन्न कार्यक्रमों के साथ उत्साह और धूमधाम से मनाने की तैयारी थी।
लेकिन हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ ने शिवसागर सहित विभिन्न इलाकों में बड़े पैमाने पर जनजीवन को प्रभावित किया। अनेक परिवारों को भारी नुकसान उठाना पड़ा और बड़ी संख्या में लोग प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुए। ऐसी परिस्थिति में संस्था ने भव्य आयोजन करने के बजाय सामाजिक संवेदनशीलता को प्राथमिकता दी।
इसी को ध्यान में रखते हुए स्वर्ण जयंती वर्ष के प्रस्तावित कार्यक्रमों को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। स्थापना दिवस पर केवल ध्वजारोहण और सीमित कार्यक्रम के माध्यम से संस्था के 50 वर्ष पूरे होने की औपचारिकता निभाई गई।
“जनसेवा को और अधिक गति देने की जरूरत”
अपने संबोधन में गौरी भागवती ने संस्था की सदस्याओं से आने वाले समय में रंगपुर महिला सोरा को और अधिक सक्रिय बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में काम करने के साथ संस्था को जनसेवा के क्षेत्र में भी अपनी गतिविधियों का विस्तार करना चाहिए।
उन्होंने सदस्याओं से संगठन की पांच दशकों की विरासत को आगे बढ़ाने, आपसी सहयोग और समन्वय को मजबूत करने तथा समाज के जरूरतमंद वर्गों तक पहुंचने का आग्रह किया। उनका कहना था कि स्वर्ण जयंती केवल संस्था की पिछली उपलब्धियों को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए नई जिम्मेदारियां तय करने और सामाजिक सरोकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करने का भी अवसर है।
संस्था की पांच दशक लंबी यात्रा में अलग-अलग पीढ़ियों की महिलाओं का योगदान रहा है। वर्तमान नेतृत्व के सामने इस विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के साथ बदलते सामाजिक परिवेश के अनुरूप संगठन की गतिविधियों को विस्तार देने की जिम्मेदारी भी है।
बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंची रंगपुर महिला सोरा
स्वर्ण जयंती वर्ष के बीच आई बाढ़ के दौरान रंगपुर महिला सोरा ने उत्सव से अधिक प्रभावित लोगों की सहायता को प्राथमिकता दी। संस्था की सह सचिव वासवदत्ता गोगोई ने बताया कि हाल में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान संगठन की ओर से विभिन्न बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत अभियान चलाया गया।
उन्होंने बताया कि संस्था की सदस्याओं ने प्रभावित इलाकों में पहुंचकर 100 से अधिक बाढ़ पीड़ित परिवारों के बीच राहत सामग्री का वितरण किया। आपदा के कठिन समय में संगठन ने पीड़ित परिवारों तक सहायता पहुंचाकर अपने सामाजिक दायित्व को निभाने का प्रयास किया।
संस्था का मानना है कि समाज के संकट के समय सामाजिक संगठनों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। इसी सोच के अनुरूप रंगपुर महिला सोरा की सदस्याओं ने स्वर्ण जयंती के उत्सव से पहले बाढ़ पीड़ितों की जरूरतों को महत्व देते हुए राहत कार्य में सक्रिय भागीदारी निभाई।
पांच दशक की विरासत के साथ भविष्य की योजनाओं पर मंथन
स्थापना दिवस कार्यक्रम केवल बीते 50 वर्षों की उपलब्धियों को याद करने तक सीमित नहीं रहा। ध्वजारोहण और अध्यक्ष के संदेश के बाद उपस्थित सदस्याओं ने संस्था के भविष्य की गतिविधियों और कार्यक्रमों को लेकर भी विस्तार से चर्चा की।
अल्पाहार के साथ हुई इस अनौपचारिक लेकिन महत्वपूर्ण चर्चा में संस्था को भविष्य में और अधिक सक्रिय बनाने तथा महिला सशक्तिकरण और जनसेवा से संबंधित गतिविधियों को गति देने पर विचार-विमर्श किया गया। स्वर्ण जयंती वर्ष के स्थगित कार्यक्रमों और आगामी सामाजिक गतिविधियों को लेकर भी सदस्याओं के बीच विचार साझा किए गए।
संस्था की सदस्याओं ने इस बात पर जोर दिया कि रंगपुर महिला सोरा के 50 वर्ष पूरे होना केवल उत्सव का विषय नहीं, बल्कि संगठन की सामाजिक जिम्मेदारी को नए संकल्प के साथ आगे बढ़ाने का अवसर भी है। संस्थापक सदस्यों द्वारा पांच दशक पहले जिस उद्देश्य से संगठन की नींव रखी गई थी, उसे वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुरूप और मजबूत बनाने की जरूरत है।
महिला सशक्तिकरण से समाजसेवा तक विस्तृत हुआ दायरा
रंगपुर महिला सोरा की पांच दशकों की यात्रा यह भी दर्शाती है कि महिलाओं द्वारा संचालित सामाजिक संगठन समय के साथ समाज में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। महिलाओं के सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से शुरू हुई संस्था ने वर्षों के दौरान सामाजिक सरोकार और जनसेवा को भी अपनी गतिविधियों का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया।
विशेष रूप से आपदा जैसी परिस्थितियों में जरूरतमंद परिवारों के बीच पहुंचकर सहायता प्रदान करना संगठन की इसी सामाजिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। स्वर्ण जयंती वर्ष के भव्य आयोजनों को बाढ़ की परिस्थिति के कारण स्थगित कर राहत एवं जनसेवा को प्राथमिकता देना भी संस्था की इसी सोच का परिचायक रहा।
स्थापना के 50 वर्ष बाद आज रंगपुर महिला सोरा शिवसागर में महिला नेतृत्व और सामाजिक भागीदारी का एक स्थापित मंच बन चुका है। संस्था के सामने अब अगली पीढ़ी की महिलाओं को संगठन से जोड़ने, महिला सशक्तिकरण के अभियान को आगे बढ़ाने और समाज की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप सेवा गतिविधियों को विस्तार देने की चुनौती और अवसर दोनों हैं।

संस्था की पदाधिकारी और सदस्याएं रहीं उपस्थित
स्वर्ण जयंती स्थापना दिवस के सादगीपूर्ण आयोजन में रंगपुर महिला सोरा की अध्यक्ष गौरी भागवती, सचिव रुनजून भागवती, सह सचिव वासवदत्ता गोगोई, कोषाध्यक्ष प्रणामिका गोस्वामी तथा सांस्कृतिक समिति की जूरी भागवती सहित संस्था की कई सदस्याएं उपस्थित रहीं।
इस अवसर पर मीना शर्मा, मंजुला सैकिया, ज्योति दत्ता, अर्पणा बोरपुजारी, उदीपी बोरकाकोटी, पूरबी बरुआ और लखिमा दत्ता ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सभी ने संस्था की पांच दशक लंबी यात्रा को गौरवपूर्ण उपलब्धि बताते हुए भविष्य में संगठन को और अधिक सशक्त एवं सक्रिय बनाने को लेकर विचार साझा किए।
50 वर्ष पूरे, अब नए अध्याय की ओर रंगपुर महिला सोरा
7 सितंबर 1975 को स्वर्गीय रानू भुईयां और पुष्पलता चालीहा के नेतृत्व में शुरू हुआ रंगपुर महिला सोरा का सफर अब अपने 50 स्वर्णिम वर्ष पूरे कर चुका है। इन पांच दशकों में समय बदला, पीढ़ियां बदलीं और सामाजिक परिस्थितियां भी बदलीं, लेकिन महिलाओं के सर्वांगीण विकास और समाज के प्रति जिम्मेदारी का संस्था का मूल उद्देश्य आज भी कायम है।
प्राकृतिक आपदा के कारण स्वर्ण जयंती का उत्सव भले ही फिलहाल सादगी तक सीमित रहा हो, लेकिन संस्था ने इसी अवसर को सेवा, संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी के संदेश से जोड़ दिया। बाढ़ प्रभावित 100 से अधिक परिवारों की सहायता और स्थापना दिवस पर महिला सशक्तिकरण के साथ जनसेवा को और गति देने का संकल्प संस्था के आगामी सफर की दिशा को भी रेखांकित करता है।
स्वर्ण जयंती के इस पड़ाव पर रंगपुर महिला सोरा अब अपने गौरवशाली अतीत की विरासत के साथ भविष्य की ओर बढ़ रहा है—जहां पांच दशकों का अनुभव, महिला शक्ति, सामाजिक संवेदना और जनसेवा की भावना संगठन की आगे की यात्रा का आधार बनेगी।




