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शिवसागर में समग्र शिक्षा की शौचालय निर्माण योजना पर गंभीर सवाल, RTI के दो जवाबों में अलग-अलग आंकड़ों का दावा : 1.02 करोड़ रुपये की केंद्रीय योजना में अनियमितता का आरोप : मिशन डायरेक्टर कार्यालय के जवाब में 34 स्कूल, जिला कार्यालय के RTI जवाब में केवल 24 का उल्लेख : आमगुड़ी नव निर्माण समिति का दावा—10 शौचालयों से जुड़े करीब 30 लाख रुपये का हिसाब सवालों के घेरे में : 7 हाईस्कूलों को लेकर भी कथित विरोधाभास

मुख्यमंत्री विशेष सतर्कता प्रकोष्ठ में शिकायत, प्रधानमंत्री कार्यालय को भी भेजा पत्र : CBI जांच की मांग, निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होने पर हाईकोर्ट में PIL की चेतावनी

शिवसागर, 1 सितंबर : शिवसागर जिले में समग्र शिक्षा के तहत विद्यालयों में शौचालय निर्माण के लिए स्वीकृत करीब 1 करोड़ 2 लाख रुपये की केंद्रीय योजना को लेकर गंभीर अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। आमगुड़ी नव निर्माण समिति ने सूचना का अधिकार (RTI) के तहत गुवाहाटी स्थित मिशन डायरेक्टर कार्यालय और शिवसागर जिला समग्र शिक्षा कार्यालय से प्राप्त जानकारियों में कथित तौर पर बड़ा अंतर होने का दावा करते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

समिति के अध्यक्ष दिगंत सैकिया का आरोप है कि वर्ष 2022-23 के दौरान विद्यालयों में शौचालय निर्माण से जुड़ी इस योजना के क्रियान्वयन में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। उनका दावा है कि दोनों कार्यालयों से RTI के जरिए मिले दस्तावेजों का मिलान करने पर 10 विद्यालयों का अंतर सामने आया है और इनसे जुड़े करीब 30 लाख रुपये से अधिक की राशि के इस्तेमाल को लेकर सवाल खड़े होते हैं।

हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक जांच के निष्कर्ष अभी सामने नहीं आए हैं। ऐसे में कथित राशि की हेराफेरी अथवा गबन को जांच पूरी होने से पहले स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता।

एक योजना, दो RTI जवाब और स्कूलों की संख्या में 10 का अंतर

दिगंत सैकिया के मुताबिक उन्होंने समग्र शिक्षा के तहत शिवसागर जिले के विद्यालयों में शौचालय निर्माण के लिए किए गए आवंटन से संबंधित जानकारी RTI के माध्यम से मांगी थी।

उनका दावा है कि गुवाहाटी स्थित मिशन डायरेक्टर कार्यालय से प्राप्त RTI जानकारी के अनुसार शिवसागर जिले के 34 विद्यालयों में शौचालय निर्माण के लिए धन आवंटित किया गया था।

इसके विपरीत, सैकिया का आरोप है कि इसी योजना से संबंधित शिवसागर जिला समग्र शिक्षा कार्यालय के RTI जवाब में केवल 24 विद्यालयों में धन आवंटित किए जाने का उल्लेख किया गया।

इस तरह राज्य और जिला स्तर से प्राप्त कथित आंकड़ों में 10 विद्यालयों का अंतर सामने आने का दावा किया गया है। समिति ने सवाल उठाया है कि यदि दोनों सूचनाएं एक ही योजना और संबंधित अवधि से जुड़ी हैं तो विद्यालयों की संख्या में इतना बड़ा अंतर किस वजह से आया।

10 शौचालय और करीब 30 लाख रुपये को लेकर उठाए सवाल

आमगुड़ी नव निर्माण समिति ने 34 और 24 विद्यालयों के बीच इसी अंतर को कथित वित्तीय अनियमितता के आरोप का प्रमुख आधार बनाया है।

दिगंत सैकिया का दावा है कि शेष 10 शौचालयों के निर्माण से जुड़ी करीब 30 लाख रुपये की राशि का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने इस राशि के इस्तेमाल को लेकर गबन अथवा दुरुपयोग की आशंका जताते हुए संबंधित वित्तीय एवं निर्माण रिकॉर्ड की विस्तृत जांच की मांग की है।

उनका कहना है कि जांच में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि इन 10 विद्यालयों के लिए वास्तव में राशि जारी हुई थी या नहीं, यदि हुई तो किस खाते अथवा एजेंसी को भुगतान किया गया, निर्माण कार्य हुआ या नहीं और जारी राशि के उपयोग से संबंधित प्रमाणपत्र एवं बिल-वाउचर कहां हैं।

सात हाईस्कूलों को लेकर भी RTI जवाबों में कथित विरोधाभास

दिगंत सैकिया ने RTI से मिली सूचनाओं में एक अन्य कथित विरोधाभास का भी दावा किया है।

उनके मुताबिक शिवसागर समग्र शिक्षा कार्यालय की ओर से दिए गए जवाब में कथित रूप से कहा गया कि हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी स्कूलों के लिए इस मद में राशि आवंटित नहीं की गई थी।

दूसरी ओर, उनका दावा है कि गुवाहाटी स्थित मिशन डायरेक्टर कार्यालय से प्राप्त दस्तावेजों में सात हाईस्कूलों के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज हैं।

समिति ने सवाल उठाया है कि यदि जिला कार्यालय के अनुसार हाईस्कूलों के लिए राशि आवंटित ही नहीं हुई थी तो राज्य स्तर से प्राप्त रिकॉर्ड में सात हाईस्कूलों के नाम किस आधार पर दर्ज हैं। समिति ने इस कथित विरोधाभास की भी स्वतंत्र जांच की मांग की है।

स्वीकृति आदेश से लेकर उपयोगिता प्रमाणपत्र तक जांचने की मांग

दिगंत सैकिया का कहना है कि वास्तविक स्थिति केवल विद्यालयों की संख्या की तुलना से स्पष्ट नहीं होगी। इसके लिए योजना से जुड़े पूरे वित्तीय और निर्माण रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है।

समिति ने संबंधित योजना के स्वीकृति आदेश, फंड रिलीज ऑर्डर, उपयोगिता प्रमाणपत्र, निर्माण कार्य की माप पुस्तिका, बिल-वाउचर, जीएसटी संबंधी दस्तावेज और विद्यालयवार खर्च के रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।

इसके साथ ही संबंधित 34 विद्यालयों में शौचालय निर्माण का भौतिक सत्यापन कराने की मांग भी उठाई गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि रिकॉर्ड में दिखाए गए निर्माण कार्य वास्तव में जमीन पर पूरे हुए हैं या नहीं और उनकी गुणवत्ता एवं लागत स्वीकृत प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं।

GST और पंपसेट से जुड़े वाउचर पर भी सवाल

समिति अध्यक्ष का आरोप है कि मामला केवल शौचालय निर्माण योजना तक सीमित नहीं है। उनके मुताबिक शिवसागर समग्र शिक्षा कार्यालय के अंतर्गत विभिन्न मदों में खर्च किए गए करोड़ों रुपये के वित्तीय लेन-देन की भी व्यापक जांच की जरूरत है।

उन्होंने कुछ खरीद और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों पर सवाल उठाते हुए GST तथा पंपसेट से संबंधित वाउचर उपलब्ध नहीं कराए जाने का भी आरोप लगाया है।

सैकिया का कहना है कि सार्वजनिक धन से संचालित योजनाओं में प्रत्येक भुगतान, खरीद, निर्माण और संबंधित लाभार्थी विद्यालय का रिकॉर्ड पारदर्शी होना चाहिए। यदि सभी दस्तावेजों और भुगतान का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाता है तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

मुख्यमंत्री विशेष सतर्कता प्रकोष्ठ में शिकायत

दिगंत सैकिया के मुताबिक कथित अनियमितताओं को लेकर मामला अब केवल RTI तक सीमित नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इस संबंध में मुख्यमंत्री के विशेष सतर्कता प्रकोष्ठ में शिकायत दर्ज कराई जा चुकी है।

उनका कहना है कि शिकायत के साथ RTI से प्राप्त दस्तावेजों और कथित विसंगतियों से जुड़ी जानकारियां भी संबंधित स्तर पर रखी गई हैं, ताकि पूरे मामले की जांच की जा सके।

समिति ने मांग की है कि राज्य और जिला स्तर पर उपलब्ध मूल रिकॉर्ड का मिलान कर यह निर्धारित किया जाए कि किस स्तर से उपलब्ध कराई गई जानकारी सही है और आंकड़ों में अंतर आने का वास्तविक कारण क्या है।

प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा पत्र, CBI जांच की मांग

दिगंत सैकिया ने बताया कि उन्होंने मामले की जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को भी पत्र भेजा है।

उनका तर्क है कि चूंकि मामला केंद्रीय योजना और सार्वजनिक धन से संबंधित है, इसलिए इसकी व्यापक और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उन्होंने पूरे प्रकरण की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग उठाई है।

समिति का कहना है कि केवल आरटीआई के दोनों जवाबों का मिलान ही नहीं, बल्कि संबंधित वित्तीय रिकॉर्ड, भुगतान, निर्माण स्थल और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए।

2022-23 में जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों की भूमिका जांचने की मांग

समिति ने वर्ष 2022-23 के दौरान संबंधित योजना के क्रियान्वयन से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच की भी मांग की है।

दिगंत सैकिया का कहना है कि उस अवधि में जिम्मेदारी संभाल रहे कनिष्ठ अभियंताओं, जिला मिशन समन्वयक तथा अन्य संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही की जांच की जानी चाहिए।

उन्होंने मांग की कि यदि निष्पक्ष जांच में किसी अधिकारी अथवा अन्य व्यक्ति की वित्तीय अनियमितता में संलिप्तता प्रमाणित होती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए।

इसके साथ ही उन्होंने संबंधित अधिकारियों की संपत्तियों की जांच करने तथा किसी प्रकार की अवैध संपत्ति अथवा वित्तीय अनियमितता प्रमाणित होने की स्थिति में कानून के तहत आवश्यक कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर संपत्ति जब्त करने की मांग भी उठाई है।

‘निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो हाईकोर्ट में PIL’

आमगुड़ी नव निर्माण समिति ने मामले को आगे न्यायिक स्तर तक ले जाने की चेतावनी भी दी है।

दिगंत सैकिया ने कहा कि यदि आरोपों की जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और सही दिशा में नहीं होती है तो वे न्यायिक हस्तक्षेप की मांग करेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में कथित अनियमितताओं को लेकर गौहाटी हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर करने का रास्ता अपनाया जाएगा।

समिति का कहना है कि मामला सरकारी विद्यालयों के बुनियादी ढांचे और सार्वजनिक धन से जुड़ा होने के कारण इसकी वास्तविकता सामने आना जरूरी है।

34 या 24 स्कूल—आखिर सही आंकड़ा कौन सा?

पूरे प्रकरण का केंद्रीय सवाल फिलहाल यही है कि यदि गुवाहाटी स्थित मिशन डायरेक्टर कार्यालय के RTI जवाब में शिवसागर जिले के 34 विद्यालयों के लिए शौचालय निर्माण का उल्लेख है तो जिला समग्र शिक्षा कार्यालय के जवाब में कथित रूप से 24 विद्यालयों की ही जानकारी क्यों दी गई।

इसी प्रकार सात हाईस्कूलों के संबंध में दोनों स्तरों से मिली कथित विरोधाभासी जानकारी का कारण भी स्पष्ट होना बाकी है।

इन दोनों सवालों का जवाब राज्य और जिला स्तर के मूल सरकारी रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेजों तथा विद्यालयवार निर्माण कार्यों के सत्यापन से ही सामने आ सकता है।

आरोप गंभीर, लेकिन आधिकारिक जांच के निष्कर्ष का इंतजार

दिगंत सैकिया और आमगुड़ी नव निर्माण समिति की ओर से लगाए गए आरोप गंभीर हैं, लेकिन फिलहाल कथित 30 लाख रुपये की हेराफेरी या गबन को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। इसके लिए संबंधित RTI दस्तावेजों, सरकारी वित्तीय रिकॉर्ड, भुगतान विवरण और निर्माण कार्यों का स्वतंत्र सत्यापन आवश्यक होगा।

यह भी संभव है कि दोनों RTI जवाबों में अंतर किसी प्रशासनिक, वर्गीकरण अथवा रिकॉर्ड संबंधी कारण से उत्पन्न हुआ हो। दूसरी ओर, यदि जांच में वास्तविक वित्तीय विसंगतियां सामने आती हैं तो संबंधित अधिकारियों एवं अन्य जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करने का सवाल उठेगा।

अब इस पूरे मामले में समग्र शिक्षा, शिवसागर के संबंधित अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष भी बेहद महत्वपूर्ण है। विभाग की ओर से आरोपों और RTI आंकड़ों में कथित अंतर पर विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आने तथा सक्षम जांच एजेंसी द्वारा मूल दस्तावेजों की पड़ताल किए जाने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि यह मामला रिकॉर्ड संबंधी विसंगति है या इसके पीछे वास्तव में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई है।

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