असम विधानसभा बजट सत्र के पहले दिन जोरदार हंगामा : अखिल गोगोई और मंत्री पीयूष हजारिका आमने-सामने : पुलिस थानों में FIR दर्ज नहीं होने के आरोप से गरमाया सदन, गृह विभाग के जवाब पर विपक्ष ने उठाए सवाल : शिक्षा व्यवस्था और कृत्रिम बाढ़ के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा : लाइफ जैकेट पहनकर विधानसभा पहुंचे शिवसागर विधायक
अखिल बोले— “असम पुलिस भाजपा की निजी एजेंसी की तरह काम कर रही”; पीयूष का पलटवार— “गलत तथ्य देने पर अदालत तक जाएंगे”

गुवाहाटी, 6 जुलाई : असम विधानसभा के बजट सत्र के पहले ही दिन सोमवार को सदन का माहौल उस समय गर्म हो गया, जब गृह विभाग और पुलिस व्यवस्था से जुड़े एक सवाल को लेकर शिवसागर के विधायक एवं राइजर दल के अध्यक्ष अखिल गोगोई और संसदीय कार्य मंत्री पीयूष हजारिका के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। प्रश्नकाल के दौरान शुरू हुई यह बहस धीरे-धीरे आरोप-प्रत्यारोप और व्यक्तिगत टिप्पणियों तक पहुंच गई, जिसके बाद विधानसभा अध्यक्ष रंजीत कुमार दास को बीच-बचाव करते हुए सदन का माहौल शांत कराना पड़ा।

थानों में FIR दर्ज नहीं होने का मुद्दा विधानसभा में उठा
प्रश्नकाल के दौरान विधायक अखिल गोगोई ने गृह विभाग से जुड़े सरकारी जवाब पर पूरक प्रश्न उठाते हुए राज्य की पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।
उन्होंने पूछा कि 1 जुलाई 2024 से 30 जून 2026 तक असम के विभिन्न पुलिस थानों में कितनी जनरल डायरी (GD) एंट्री दर्ज की गईं, उनमें से कितने मामलों को FIR के रूप में पंजीकृत किया गया और दर्ज मामलों में कितनों में प्रारंभिक जांच, मेडिकल परीक्षण तथा आगे की कानूनी कार्रवाई की गई।
अखिल गोगोई ने आरोप लगाया कि राज्य के कई थानों में आम नागरिकों की शिकायतों को FIR के रूप में दर्ज नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि गंभीर मामलों में भी लोगों को न्याय पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
उनका आरोप था कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों में अपराध दर कम दिखाने के लिए FIR दर्ज करने की संख्या को नियंत्रित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि FIR दर्ज ही नहीं होगी तो अपराध के आंकड़े अपने आप कम दिखाई देंगे।

“सरकार की पसंद के मामले ही दर्ज हो रहे”— अखिल गोगोई
अखिल गोगोई ने सदन में आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान समय में पुलिस व्यवस्था निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रही है।
उन्होंने कहा कि आम जनता द्वारा दी गई कई शिकायतें दर्ज नहीं होतीं, जबकि सरकार या सत्ताधारी दल से जुड़े मामलों में तुरंत कार्रवाई होती है।
अखिल गोगोई ने आरोप लगाया कि असम पुलिस अब जनता की सुरक्षा करने वाली संस्था के बजाय सत्ता के दबाव में काम करने वाली व्यवस्था बनती जा रही है।

पीयूष हजारिका का जवाब— “असम पुलिस पर सबसे ज्यादा सवाल अखिल उठाते हैं”
अखिल गोगोई के आरोपों पर संसदीय कार्य मंत्री पीयूष हजारिका ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि असम पुलिस के लिए बार-बार “फर्जी मामला” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने वाले सबसे बड़े व्यक्ति खुद अखिल गोगोई हैं।
पीयूष हजारिका ने कहा कि अखिल गोगोई लगातार पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं, लेकिन उनके खिलाफ भी राज्य के अलग-अलग थानों में कई मामले दर्ज हैं।
मामलों की संख्या को लेकर सदन में तीखी नोकझोंक
बहस के दौरान अखिल गोगोई ने कहा कि उनके खिलाफ पूरे असम में कुल 165 मामले दर्ज किए गए थे और उनमें से करीब 50 मामलों में अदालत से उन्हें राहत मिल चुकी है।
इसके जवाब में मंत्री पीयूष हजारिका ने कहा कि चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे में अखिल गोगोई ने अपने खिलाफ अलग संख्या में मामलों का उल्लेख किया था।
उन्होंने कहा कि सदन में दिए गए आंकड़ों और चुनावी हलफनामे में अंतर होने की स्थिति में वे इस विषय को अदालत तक ले जाने पर विचार करेंगे।
इस मुद्दे को लेकर दोनों नेताओं के बीच काफी देर तक तीखी बहस जारी रही।

सदन के बाहर भी जारी रही जुबानी जंग
विधानसभा के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए अखिल गोगोई ने कहा कि उन्होंने आज सदन में ऐसे सवाल उठाए जिनसे सरकार असहज हो गई।
उन्होंने दावा किया कि गृह विभाग से जुड़े सवालों का सीधा जवाब देने के बजाय उन्हें ही निशाना बनाने की कोशिश की गई।
दूसरी ओर मंत्री पीयूष हजारिका ने अखिल गोगोई पर कटाक्ष करते हुए उन्हें “सर्वज्ञानी” बताया और कहा कि तथ्यों को सही तरीके से पेश किया जाना चाहिए।
शिक्षा व्यवस्था पर भी सरकार को घेरा
बजट सत्र के पहले दिन अखिल गोगोई ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर हमला बोला।
उन्होंने शिक्षा मंत्री डॉ. रणोज पेगु के कामकाज पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे की मांग की।
अखिल गोगोई ने दावा किया कि पिछले चार वर्षों में असम के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में भारी कमी आई है।
उन्होंने कहा कि सरकारी आंकड़ों के आधार पर वे यह साबित कर सकते हैं कि राज्य की सरकारी शिक्षा व्यवस्था कमजोर हुई है।
उन्होंने शिक्षा मंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि सरकार को वास्तविक स्थिति स्वीकार करनी चाहिए और शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए कदम उठाने चाहिए।

लाइफ जैकेट पहनकर विधानसभा पहुंचे अखिल गोगोई, कृत्रिम बाढ़ पर जताया विरोध
बजट सत्र के पहले दिन अखिल गोगोई एक अलग अंदाज में विधानसभा पहुंचे। उन्होंने लाइफ जैकेट पहनकर और हाथ में प्लेकार्ड लेकर विधानसभा परिसर में प्रवेश किया।
उनके साथ राइजर दल के दूसरे विधायक मेहबूब मुख्तार भी मौजूद रहे।
अखिल गोगोई ने कहा कि गुवाहाटी महानगर और शिवसागर शहर में कृत्रिम बाढ़ की समस्या गंभीर होती जा रही है।
उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान कब और कहां जलभराव हो जाए, इसका कोई भरोसा नहीं रहता, इसलिए वे प्रतीकात्मक विरोध के रूप में लाइफ जैकेट पहनकर विधानसभा आए हैं।

शिवसागर की जलभराव समस्या पर सरकार से समाधान की मांग
अखिल गोगोई ने कहा कि ऐतिहासिक शिवसागर शहर लंबे समय से कृत्रिम बाढ़ की समस्या झेल रहा है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने और नागरिकों को राहत देने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं।
उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी गंभीर समस्या है।
पहले दिन ही सरकार-विपक्ष में टकराव के संकेत
बजट सत्र के पहले ही दिन गृह विभाग, पुलिस व्यवस्था, शिक्षा और कृत्रिम बाढ़ जैसे मुद्दों पर हुई जोरदार बहस से साफ संकेत मिले हैं कि आने वाले दिनों में सदन में सरकार और विपक्ष के बीच कई बड़े मुद्दों पर तीखा टकराव देखने को मिल सकता है।




