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पूर्व डीआईजी प्रशांत कुमार दत्ता पर ईडी का अब तक का सबसे बड़ा शिकंजा : 53.28 करोड़ रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क : आय से अधिक संपत्ति से लेकर मनी लॉन्ड्रिंग तक के गंभीर आरोप : चार होटल, मुंबई के दो आलीशान फ्लैट और तीन कंपनियां जांच के घेरे में : करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेन-देन का खुलासा

गुवाहाटी, 27 जून : असम में चर्चित आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व डीआईजी प्रशांत कुमार दत्ता और उनके परिवार से जुड़ी लगभग 53.28 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (Provisional Attachment) कर दिया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 5(1) के तहत की गई है। ईडी की इस कार्रवाई ने एक बार फिर असम में भ्रष्टाचार और काले धन के नेटवर्क को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विजिलेंस की एफआईआर बनी ईडी जांच का आधार

प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार मामले की शुरुआत असम पुलिस की विजिलेंस एवं एंटी करप्शन शाखा द्वारा दर्ज एफआईआर से हुई थी। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दर्ज इस मामले को पीएमएलए के अंतर्गत अनुसूचित अपराध मानते हुए ईडी ने ईसीआईआर (ECIR) दर्ज कर धन शोधन के पहलुओं की गहन जांच प्रारंभ की।

27 वर्षों की सेवा के दौरान आय से कई गुना अधिक संपत्ति जुटाने का आरोप

जांच एजेंसियों के अनुसार प्रशांत कुमार दत्ता ने वर्ष 1992 से 2019 तक अपने पुलिस सेवा काल के दौरान अपनी ज्ञात आय के स्रोतों की तुलना में अत्यधिक संपत्ति अर्जित की।

जांच में सामने आया कि अधिकारी एवं उनकी पत्नी की कुल घोषित आय लगभग 7.23 करोड़ रुपये थी, जबकि घोषित व्यय लगभग 9.04 करोड़ रुपये था। इसके बावजूद जांच में लगभग 77.21 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्तियों का पता चला। उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कुल 79.01 करोड़ रुपये की असंगत (Disproportionate) संपत्ति होने का अनुमान लगाया गया है।

तीन निजी कंपनियों के माध्यम से धन को वैध बनाने का आरोप

ईडी की जांच में आरोप है कि कथित अपराध से अर्जित धन को तीन निजी कंपनियों महामाया एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड, ईशान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड और मुरारी कमोडिटीज प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से वैध संपत्ति के रूप में दर्शाने का प्रयास किया गया।

जांच में इन कंपनियों के पंजीकृत कार्यालय वास्तविक रूप से अस्तित्वहीन पाए गए। एजेंसी का आरोप है कि इन कंपनियों का उपयोग कथित रूप से अवैध धन को कानूनी निवेश का स्वरूप देने के लिए किया गया।

14.75 करोड़ रुपये की संदिग्ध नकदी का खुलासा

जांच के दौरान यह भी सामने आया कि परिवार के सदस्यों तथा संबंधित कंपनियों के बैंक खातों में लगभग 14.75 करोड़ रुपये की अज्ञात स्रोतों से प्राप्त नकदी जमा कराई गई।

इसके बाद फर्जी शेयरधारकों, कोलकाता स्थित शेल कंपनियों तथा बैंक खातों के माध्यम से कई स्तरों पर धन का लेन-देन (Layering) किया गया। अंततः इसी धन को होटल व्यवसाय और मुंबई स्थित महंगी आवासीय संपत्तियों में निवेश किया गया।

ईडी के अनुसार कंपनियों के अधिकांश शेयरधारक केवल नामधारी (Name Lenders) अथवा काल्पनिक व्यक्ति थे, जिनकी आय का कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं मिला तथा वे निवेश की गई राशि का स्रोत भी स्पष्ट नहीं कर सके।

सेवानिवृत्ति के बाद भी अपने नाम कराए 3.70 लाख शेयर

ईडी की जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है।

वर्ष 2019 में डीआईजी पद से सेवानिवृत्त होने तथा विजिलेंस मामला दर्ज हो जाने के बाद भी वित्तीय वर्ष 2022-23 में प्रशांत कुमार दत्ता ने ईशान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के लगभग 3.70 लाख शेयर कथित रूप से डमी एवं फर्जी शेयरधारकों से अपने नाम स्थानांतरित करा लिए।

इस स्थानांतरण के बाद वे कंपनी के सबसे बड़े शेयरधारक बन गए। जांच एजेंसी का कहना है कि यही कंपनी कुर्क की गई चार में से तीन होटलों की वास्तविक लाभार्थी (Beneficial Owner) है।

इन संपत्तियों पर चला ईडी का शिकंजा

प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जिन संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया गया है, उनमें प्रमुख रूप से गुवाहाटी के पलटन बाजार भार्गव, गुवाहाटी के जी.एस. रोड स्थित भार्गव इन होटल, गुवाहाटी के लोखरा चाराली स्थित होटल भार्गव (ईशान आर्केड), गुवाहाटी के बेतकुची स्थित होटल भार्गव ग्रैंड और मुंबई के अंधेरी (पश्चिम) स्थित समर्था दीप परिसर के दो आलीशान फ्लैट शामिल हैं।

इन सभी अचल संपत्तियों का कुल अनुमानित बाजार मूल्य 53.28 करोड़ रुपये बताया गया है।

पहले भी विवादों में रह चुके हैं प्रशांत कुमार दत्ता

पूर्व डीआईजी प्रशांत कुमार दत्ता का नाम इससे पहले भी असम पुलिस सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामले में सामने आ चुका है। उस प्रकरण में उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था। हालांकि वर्तमान ईडी कार्रवाई पूरी तरह आय से अधिक संपत्ति और उससे जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले से संबंधित है।

जांच अभी जारी, और बढ़ सकती है कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि यह केवल अस्थायी कुर्की (Provisional Attachment) है। मामले की जांच अभी जारी है। यदि जांच के दौरान और संपत्तियों अथवा वित्तीय लेन-देन के संबंध में नए साक्ष्य सामने आते हैं तो आगे और बड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

ईडी का कहना है कि मामले से जुड़े सभी वित्तीय लेन-देन, कंपनियों की संरचना, बैंकिंग नेटवर्क तथा अन्य संभावित लाभार्थियों की भी जांच जारी है। अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।

राज्यभर में चर्चा का विषय बनी कार्रवाई

पूर्व डीआईजी जैसे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के विरुद्ध करोड़ों रुपये की संपत्तियों पर ईडी की कार्रवाई ने पूरे असम में राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक हलकों में व्यापक चर्चा छेड़ दी है। भ्रष्टाचार के खिलाफ यह कार्रवाई राज्य की सबसे चर्चित वित्तीय जांचों में से एक मानी जा रही है। अब सभी की निगाहें ईडी की आगामी जांच और संभावित अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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