विश्व पर्यावरण दिवस पर टियोक में हरित क्रांति का संकल्प : विद्यालयों, सामाजिक संगठनों और काजीरंगा विश्वविद्यालय में व्यापक वृक्षारोपण अभियान : 10 हजार पौधों के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा जनआंदोलन, विद्यार्थियों से लेकर सामाजिक संगठनों तक ने लिया पर्यावरण संरक्षण का संकल्प

टियोक, 5 जून : विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शुक्रवार को टियोक विधानसभा क्षेत्र हरियाली, जागरूकता और पर्यावरण संरक्षण के संदेश से सराबोर रहा। क्षेत्र के विभिन्न शिक्षण संस्थानों, सामाजिक संगठनों, साहित्यिक संस्थाओं तथा असम काजीरंगा विश्वविद्यालय में वृक्षारोपण, पर्यावरण जागरूकता एवं स्वच्छता संबंधी विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और स्वच्छ पर्यावरण के महत्व से अवगत कराया गया।

दिनभर चले कार्यक्रमों में विद्यार्थियों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए प्रकृति संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। विभिन्न स्थानों पर सैकड़ों पौधे लगाए गए तथा लोगों को अधिक से अधिक वृक्ष लगाने और उनकी देखभाल करने का संदेश दिया गया।
शिक्षण संस्थानों में गूंजा हरित भविष्य का संदेश
टियोक क्षेत्र के प्रमुख शिक्षण संस्थानों में विश्व पर्यावरण दिवस को विशेष रूप से मनाया गया। काकोजान कॉलेज, टियोक सी.के.बी. कॉलेज सहित विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किए गए। शिक्षकों और विद्यार्थियों ने परिसर में पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।

कार्यक्रमों के दौरान वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के कारण पर्यावरण गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में वृक्षारोपण केवल एक औपचारिकता नहीं बल्कि मानव अस्तित्व की आवश्यकता बन गया है।
असम साहित्य सभा टियोक शाखा ने दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर असम साहित्य सभा, टियोक शाखा द्वारा भी शाखा कार्यालय परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। साहित्यकारों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पौधारोपण करते हुए लोगों से प्रकृति संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की अपील की।
वक्ताओं ने कहा कि साहित्य और संस्कृति का मूल आधार प्रकृति है तथा पर्यावरण संरक्षण के बिना मानव सभ्यता का संतुलित विकास संभव नहीं है।

मारवाड़ी सम्मेलन टियोक शाखा की सक्रिय भागीदारी
मारवाड़ी सम्मेलन टियोक शाखा द्वारा भी विभिन्न स्थानों पर वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर शाखा के सचिव बीजू कुमार तुनवाल ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने लोगों से अधिकाधिक वृक्ष लगाने की अपील करते हुए कहा—
“आइए हम सभी मिलकर अधिक से अधिक पेड़ लगाएं। पेड़ हमारे जीवन का आधार हैं। वे हमें शुद्ध वायु प्रदान करते हैं, पर्यावरण को संतुलित रखते हैं तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करते हैं।”
उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके संरक्षण और नियमित देखभाल की जिम्मेदारी भी समाज को मिलकर निभानी होगी।
लाचित सेना का विशेष अभियान, 10 हजार पौधों का लक्ष्य
विश्व पर्यावरण दिवस पर लचित सेना द्वारा टियोक राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास विशेष वृक्षारोपण अभियान चलाया गया। संगठन के सदस्यों ने सड़क किनारे पौधे लगाकर हरित गलियारा विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की।
वहीं जांजीमुख और जुबिन साउथ सपरी क्षेत्र में बच्चों, युवाओं एवं स्थानीय नागरिकों की सक्रिय सहभागिता से 10,000 पौधे लगाने का अभियान निरंतर जारी है। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर भी बड़ी संख्या में पौधारोपण कर अभियान को और गति प्रदान की गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अभियान केवल वृक्षारोपण तक सीमित नहीं है बल्कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर जनजागरूकता पैदा करने का भी एक प्रभावी माध्यम बन रहा है।
असम काजीरंगा विश्वविद्यालय में हुआ भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर असम काजीरंगा विश्वविद्यालय में भी व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में कुलपति मुरारी लाल गौर, रजिस्ट्रार, विभिन्न विभागों के अधिकारी, शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में स्काउट एवं गाइड के विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए पौधे लगाए और पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति मुरारी लाल गौर ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए वृक्षारोपण सबसे प्रभावी और सरल उपायों में से एक है।
उन्होंने कहा कि पेड़ हमें शुद्ध ऑक्सीजन प्रदान करते हैं, तापमान को नियंत्रित रखते हैं तथा पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को केवल एक दिन नहीं, बल्कि पूरे वर्ष पौधारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण के कार्यों से जुड़ना चाहिए। उन्होंने लोगों से लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने और पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
स्वच्छ, सुरक्षित और हरित भविष्य के लिए सामूहिक जिम्मेदारी जरूरी
दिनभर आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या किसी एक संगठन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का दायित्व है।
उन्होंने कहा कि यदि आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ वायु, शुद्ध जल और सुरक्षित प्राकृतिक वातावरण प्रदान करना है तो आज से ही प्रकृति के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक उपयोग में कमी तथा स्वच्छता को अपनाकर ही पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना किया जा सकता है।
विश्व पर्यावरण दिवस पर टियोक विधानसभा क्षेत्र और असम काजीरंगा विश्वविद्यालय में आयोजित इन कार्यक्रमों ने लोगों के भीतर प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और पर्यावरण संरक्षण की भावना को और अधिक मजबूत किया। विभिन्न संगठनों और संस्थानों की यह सामूहिक पहल हरित, स्वच्छ और सतत भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।




