चराईदेव में जापानी इंसेफेलाइटिस का बढ़ता खतरा: एक ही दिन में दो लोगों की मौत से मचा हड़कंप : मिरीपथार और भाटी लंगपतिया के दो परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़ : डिब्रूगढ़ में इलाज के दौरान गगन बुढ़ागोहांई और दुदुल गोगोई ने तोड़ा दम : ग्रामीणों में दहशत का माहौल : स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में

शिवसागर, 2 जून : ऊपरी असम के चराईदेव जिले में जापानी इंसेफेलाइटिस (JE) अथवा इंसेफेलाइटिस सदृश घातक बीमारी ने एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। मंगलवार को जिले से सामने आई दो मौतों की खबर ने पूरे इलाके में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। एक ही दिन में सोनारी के निकट मिरीपथार निवासी गगन बुढ़ागोहांई तथा भाटी लंगपतिया क्षेत्र निवासी दुदुल गोगोई की डिब्रूगढ़ में उपचार के दौरान मृत्यु हो गई।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार दोनों मरीज पिछले कुछ दिनों से तेज बुखार और गंभीर न्यूरोलॉजिकल लक्षणों से पीड़ित थे। स्थिति बिगड़ने पर उन्हें बेहतर उपचार के लिए डिब्रूगढ़ के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां चिकित्सकों के प्रयासों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। दोनों मौतों के बाद संबंधित गांवों में शोक और दहशत का माहौल व्याप्त है।
ग्रामीणों का कहना है कि मानसून के आगमन के साथ क्षेत्र में मच्छरों का प्रकोप बढ़ा है और पिछले कुछ सप्ताहों से बुखार तथा इंसेफेलाइटिस जैसे लक्षणों वाले मरीजों की संख्या में वृद्धि देखी जा रही है। ऐसे में एक ही दिन में दो लोगों की मौत ने लोगों की चिंताओं को और गंभीर कर दिया है।
जापानी इंसेफेलाइटिस क्या है ?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जापानी इंसेफेलाइटिस एक गंभीर वायरल रोग है, जो मुख्य रूप से संक्रमित क्यूलेक्स (Culex) प्रजाति के मच्छरों के काटने से फैलता है। यह बीमारी विशेष रूप से धान के खेतों, जलभराव वाले क्षेत्रों और सूअर पालन वाले इलाकों में अधिक पाई जाती है। गंभीर मामलों में वायरस सीधे मस्तिष्क को प्रभावित करता है, जिससे मरीज को तेज बुखार, सिरदर्द, मानसिक भ्रम, दौरे, बेहोशी, लकवा तथा मृत्यु तक का सामना करना पड़ सकता है।
असम लंबे समय से संवेदनशील राज्य
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अधिकारियों के अनुसार असम लंबे समय से जापानी इंसेफेलाइटिस से प्रभावित राज्यों में शामिल रहा है। वर्ष 2025 में राज्य में सैकड़ों मामले सामने आए थे और कई जिलों में मौतें दर्ज की गई थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि देश के कुल जापानी इंसेफेलाइटिस मामलों का बड़ा हिस्सा असम से आता है और यह रोग अब राज्य के अधिकांश जिलों तक फैल चुका है।
स्वास्थ्य संबंधी अध्ययनों में भी असम को एक एंडेमिक (स्थायी रूप से प्रभावित) क्षेत्र माना गया है, जहां जापानी इंसेफेलाइटिस और एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) वर्षों से सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
गगन बुढ़ागोहांई और दुदुल गोगोई की मौत के बाद स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई गांवों में समय पर जांच, नियमित फॉगिंग, मच्छर नियंत्रण अभियान और जन-जागरूकता कार्यक्रम पर्याप्त रूप से नहीं चलाए जा रहे हैं।
स्थानीय नागरिक संगठनों ने मांग की है कि प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएं, घर-घर सर्वेक्षण कराया जाए, मच्छरजनित रोगों की जांच तेज की जाए तथा लोगों को बीमारी से बचाव के उपायों के बारे में जागरूक किया जाए।
विशेषज्ञों की सलाह
चिकित्सकों ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को लगातार तेज बुखार, असहनीय सिरदर्द, उल्टी, मानसिक भ्रम, दौरे, बेहोशी या शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत निकटतम अस्पताल ले जाया जाए। समय पर उपचार मिलने से मरीज की जान बचने की संभावना बढ़ जाती है।
साथ ही लोगों को मच्छरदानी के उपयोग, घर के आसपास जलभराव रोकने, स्वच्छता बनाए रखने तथा बच्चों एवं बुजुर्गों की विशेष निगरानी रखने की सलाह दी गई है।
पूरे जिले में बढ़ी चिंता
मिरीपथार के गगन बुढ़ागोहांई और भाटी लंगपतिया के दुदुल गोगोई की एक ही दिन हुई मौत ने चराईदेव जिले को झकझोर कर रख दिया है। ग्रामीणों का मानना है कि यदि समय रहते व्यापक रोकथाम उपाय नहीं किए गए तो मानसून के दौरान स्थिति और गंभीर हो सकती है।
फिलहाल पूरे क्षेत्र की नजर स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई है। दोनों मौतों ने एक बार फिर यह संकेत दे दिया है कि जापानी इंसेफेलाइटिस और इंसेफेलाइटिस सदृश रोगों के खिलाफ लड़ाई में सतर्कता, त्वरित चिकित्सा व्यवस्था और प्रभावी जनजागरूकता अभियान की अत्यंत आवश्यकता है।




