“यूसीसी सभी नागरिकों को समान अधिकार प्रदान करेगा” : बिमल बोरा
असम में सामाजिक सुधार की दिशा में ऐतिहासिक और युगांतकारी कदम : शिवसागर जिला भाजपा की प्रेस वार्ता में विधायक बिमल बोरा ने समान नागरिक संहिता की आवश्यकता और महत्व को विस्तार से समझाया

शिवसागर, 2 जून : टिंगखांग विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं असम सरकार के पूर्व मंत्री बिमल बोरा ने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) को असम के सामाजिक सुधार और समान अधिकारों की दिशा में एक ऐतिहासिक एवं युगांतकारी कदम बताया है। मंगलवार को शिवसागर जिला भाजपा कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि यूसीसी लागू होने से देश के सभी नागरिकों को समान अधिकार और समान न्याय सुनिश्चित होगा।
प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए बिमल बोरा ने कहा कि भाजपा नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने लगातार तीसरी बार असम की सत्ता संभालने के बाद सुशासन और सामाजिक सुधार को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। उन्हीं निर्णयों में समान नागरिक संहिता एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने अपने पहले ही मंत्रिमंडल की बैठक में असम में यूसीसी लागू करने का निर्णय लिया और विधानसभा के प्रथम सत्र में इसे प्रस्तुत कर सरकार ने एक साहसिक पहल की है।
डॉ. आंबेडकर के ‘एक देश, एक कानून’ के विचार का उल्लेख
बिमल बोरा ने भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1948 में संविधान सभा में ही उन्होंने “एक देश, एक कानून” की अवधारणा का समर्थन किया था। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के नीति-निर्देशक तत्वों के अंतर्गत अनुच्छेद 44 में भी समान नागरिक संहिता का उल्लेख किया गया है।
उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 14 सभी नागरिकों को समानता का अधिकार प्रदान करता है, लेकिन विभिन्न धर्मों के अलग-अलग पर्सनल लॉ के कारण एक ही देश के नागरिकों को अलग-अलग कानूनी अधिकार और सुविधाएं प्राप्त होती रही हैं। यूसीसी लागू होने के बाद यह असमानता समाप्त होगी और सभी नागरिकों को एक समान कानूनी व्यवस्था के अंतर्गत अधिकार प्राप्त होंगे।
विवाह और परिवार व्यवस्था को मिलेगा मजबूत आधार
विवाह संस्था की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए विधायक ने कहा कि विवाह केवल एक कानूनी अनुबंध नहीं, बल्कि समाज की सांस्कृतिक और नैतिक नींव है। विभिन्न पर्सनल लॉ के कारण विवाह और पारिवारिक व्यवस्था से जुड़े कई मामलों में असंगतियां देखने को मिलती हैं।
इस संदर्भ में उन्होंने मुस्लिम समाज में पूर्व में प्रचलित ‘तीन तलाक’ प्रथा का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी व्यवस्थाओं से कई बार महिलाओं के अधिकार प्रभावित होते थे। उनके अनुसार समान नागरिक संहिता महिलाओं को अधिक सुरक्षा और न्याय प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगी।
महिलाओं के अधिकार होंगे अधिक सुरक्षित
बिमल बोरा ने कहा कि यूसीसी लागू होने से समाज में न्याय, समानता और स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा। विवाह, तलाक, संपत्ति के अधिकार, गोद लेने जैसे विषयों पर सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार होने से समाज अधिक संगठित, न्यायपूर्ण और संतुलित बनेगा।
उन्होंने कहा कि यह कानून किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी नागरिकों को समान अधिकार और समान न्याय प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने यूसीसी के विभिन्न प्रावधानों, इसमें शामिल विषयों तथा कानून का उल्लंघन करने पर संभावित दंडात्मक व्यवस्थाओं के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।
असम के सामाजिक विकास में नया अध्याय : वितोपन रायदोंगिया
इस अवसर पर शिवसागर जिला भाजपा के अध्यक्ष वितोपन रायदोंगिया ने कहा कि समान नागरिक संहिता असम के सामाजिक विकास और समान अधिकारों की स्थापना की दिशा में एक नए अध्याय की शुरुआत करेगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे यूसीसी के संबंध में सही जानकारी प्राप्त करें और किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रम से दूर रहें।
प्रेस वार्ता में भाजपा के जिला अध्यक्ष वितोपन रायदोंगिया, जिला महासचिव चंदन बुढ़ागोहांई, भाजपा नेत्री डॉ. असमी गोगोई तथा दीपिका दुवरी सहित पार्टी के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।




