शिवसागर जिले में ऐतिहासिक यमुना जलाशय की सफाई और पुनरुत्थान परियोजना : जिला आयुक्त की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक सम्पन्न : जून तक काम पूरा करने के निर्देश
अतिक्रमणकारी परिवारों की पहचान करने और इस बीच शिनाख्त किए गए 14 कचरा फेंकने वाले परिवारों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए

शिवसागर, 19 मई : शिवसागर शहर के ऐतिहासिक महत्व के यमुना जलाशय की सफाई और पुनरुत्थान परियोजना को गति देने के लिए जिला आयुक्त मृदुल यादव, आईएएस की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में परियोजना की वर्तमान स्थिति, तकनीकी चुनौतियों और आने वाली बाधाओं पर विस्तृत चर्चा हुई।
जिला आयुक्त कार्यालय के चुकाफा सभाकक्ष में हुई इस बैठक में अंतर-विभागीय समन्वय पर जोर देते हुए जिला प्रशासन ने निर्देश दिया कि मानसून से पहले 2.9 किलोमीटर लंबे यमुना कैनाल की मेटेका (जलकुंभी) और जलीय खरपतवारों की पूरी सफाई सुनिश्चित की जाए। इसमें जल संसाधन विभाग, लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी (पीएचई), लोक निर्माण विभाग (पीडबल्यूडी), विद्युत विभाग और नगर पालिका को मिलकर काम करने के लिए सख्त निर्देश दिए गए।
परियोजना की प्रमुख प्रगति और लक्ष्य के बारे में चर्चा करते हुए बैठक में बताया गया कि अब तक 2.9 किलोमीटर में से 2.0 किलोमीटर हिस्से की सफाई पूरी हो चुकी है। परियोजना के तहत कुल 33,000 घन मीटर कीचड़ (सिल्ट) निकालने का लक्ष्य रखा गया है। खनन कार्य को चरणबद्ध तरीके से तेज करने पर जोर दिया गया। जून माह के अंत तक पूरे काम को पूरा करने के लिए ठेकेदार को कड़ी चेतावनी दी गई।
साथ ही, स्थानीय स्तर पर बाधा पैदा करने वाले पेड़ों की शाखाओं को काटने के निर्देश भी दिए गए। परियोजना की कुल लागत लगभग 9.27-9.28 करोड़ रुपये है, जो राज्य आपदा प्रबंधन कोष (एसडीएमएफ) के तहत स्वीकृत है। यह काम शिवसागर के विधायक अखिल गोगोई की पहल पर शुरू किया गया था।
यमुना जलाशय आहोम काल (1731-1734) का है, जिसे रानी अंबिका ने स्वर्गदेव शिव सिंह के शासनकाल में बनवाया था। यह लगभग 3.5 किलोमीटर लंबा है और शिवसागर बोरपुखुरी के चारों ओर एक प्राकृतिक घेरा बनाता है। यमुना जलाशय का ऐतिहासिक और पर्यावरणीय महत्व है। यह जलाशय प्राचीन जल प्रबंधन प्रणाली का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो मंदिरों की नींव को नम रखकर भूकंप प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता था। दशकों की उपेक्षा, अतिक्रमण और कचरा डालने से इसकी क्षमता काफी कम हो गई थी। हाल ही में दो विशाल कछुओं की मौत के बाद सफाई अभियान और तेज हुआ था।
बैठक में जलाशय क्षेत्र में अतिक्रमणकारी परिवारों की पहचान करने और इस बीच शिनाख्त किए गए 14 कचरा फेंकने वाले परिवारों को नोटिस जारी करने और अन्य बाधाओं को दूर करने पर भी चर्चा हुई।
बैठक में अतिरिक्त जिला आयुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की मुख्य कार्यकारी अधिकारी मीनाक्षी पार्मे, शिवसागर राजस्व सर्कल के सर्कल अधिकारी (संलग्न) इंडिका गोगोई, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की परियोजना अधिकारी विजयलक्ष्मी गोगोई सहित संबंधित सभी विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद थे।
जिला आयुक्त मृदुल यादव ने कहा कि यह परियोजना न केवल ऐतिहासिक जलाशय को पुनर्जीवित करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक विरासत को भी मजबूत बनाएगी। जिला आयुक्त ने इस परियोजना कार्य से संबंधित सभी विभागीय अधिकारियों को काम में तेजी लाकर इसे जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।
यह परियोजना शिवसागर के सांस्कृतिक और पर्यटन विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगी, जिसमें जलकुंभी हटाना, गाद निकालना, किनारों पर बाड़ लगाना, लाइटिंग और मशीन बोट्स से ऑक्सीजन बढ़ाना शामिल है। स्थानीय लोगों ने इस पहल का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि भविष्य में इसे और बेहतर बनाया जाएगा।




