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ग्रामीण भारत के भविष्य के निर्माता तैयार : एकल अभियान शिवसागर का 10 दिवसीय ‘आचार्य-आचार्या प्रारंभिक वर्ग’ संपन्न : 36 प्रशिक्षित आचार्य-आचार्याएं अब गांव-गांव पहुंचाएंगे शिक्षा, संस्कार और जागरूकता का संदेश

सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण का लिया संकल्प; पंचमुखी शिक्षा के माध्यम से ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने का आह्वान

शिवसागर, 15 जुलाई : ग्रामीण और वनवासी क्षेत्रों में शिक्षा, संस्कार तथा सामाजिक जागरण की अलख जगाने वाले एकल अभियान शिवसागर अंचल द्वारा आयोजित 10 दिवसीय ‘आचार्य-आचार्या प्रारंभिक वर्ग’ का मंगलवार को शिवसागर नगर स्थित आशीर्वाद भवन में सफलतापूर्वक समापन हुआ। 5 जुलाई से 14 जुलाई 2026 तक आयोजित इस आवासीय प्रशिक्षण वर्ग में कुल 36 आचार्य-आचार्याओं को शिक्षण कौशल, संगठनात्मक कार्यपद्धति, नेतृत्व विकास, व्यक्तित्व निर्माण, ग्राम विकास, सामाजिक जागरण तथा भारतीय संस्कृति पर आधारित पंचमुखी शिक्षा प्रणाली का व्यावहारिक एवं सैद्धांतिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

एकल अभियान का उद्देश्य दूरस्थ एवं वनवासी क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, संस्कार, स्वास्थ्य जागरूकता, ग्राम विकास और आत्मनिर्भर समाज निर्माण का संदेश पहुंचाना है। इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए प्रतिवर्ष इस प्रकार के प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए जाते हैं, ताकि प्रशिक्षित आचार्य अपने-अपने गांवों में शिक्षा और सामाजिक परिवर्तन के वाहक बन सकें।

प्रबुद्ध अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति

समापन समारोह में वरिष्ठ अधिवक्ता एवं एकल अभियान शिवसागर अंचल समिति के अध्यक्ष विष्णु शर्मा, अंचल समिति के सचिव अजय अग्रवाल, वरिष्ठ पत्रकार मनोज बोरठाकुर, मीडिया प्रभारी संजय पारीक, केंद्रीय ई-शिक्षा प्रमुख रमेश लिम्बु, केंद्रीय रथ योजना प्रमुख राधाकांत साह, शिवसागर अंचल महिला समिति की अध्यक्षा सुमन शर्मा, राष्ट्रीय सेविका समिति की जिला कार्यवाहिका हिमाद्री ओझा, योग प्रशिक्षक रमेन कुर्मी तथा ऊपरी असम भाग कार्यालय प्रमुख नरेन मुंडा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने प्रशिक्षु आचार्य-आचार्याओं को समाज सेवा, राष्ट्र निर्माण और संस्कारयुक्त शिक्षा के क्षेत्र में समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया।

अंचल अभियान प्रमुख जूनमनी कुर्मी के संचालन में आयोजित समापन समारोह में बिंदावती गुवाला द्वारा वर्ग प्रतिवेदन का पाठ किया गया। वहीं प्रशिक्षु आचार्य आचार्याओं द्वारा सामूहिक योगाभ्यास का प्रदर्शन किया गया।

“एकल अभियान केवल शिक्षा नहीं, सामाजिक परिवर्तन का आंदोलन” : विष्णु शर्मा

अध्यक्ष विष्णु शर्मा ने कहा कि एकल अभियान केवल विद्यालय संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह गांव-गांव में सामाजिक परिवर्तन का व्यापक अभियान है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षित आचार्य-आचार्याएं दूरदराज़ क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा देने के साथ-साथ समाज में जागरूकता, संस्कार, आत्मविश्वास और राष्ट्रीय चेतना का भी संचार करेंगे। उन्होंने सभी प्रशिक्षुओं से सेवा, अनुशासन और समर्पण को जीवन का मूल मंत्र बनाने का आग्रह किया।

निरंतर सीखना ही श्रेष्ठ शिक्षक की पहचान : रमेश लिम्बु

केंद्रीय ई-शिक्षा प्रमुख रमेश लिम्बु ने एकल अभियान की कार्यप्रणाली, उद्देश्य और शिक्षा व्यवस्था पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि समय के साथ स्वयं को निरंतर अद्यतन रखना प्रत्येक आचार्य का दायित्व है। उन्होंने प्रशिक्षुओं को सतत अध्ययन एवं आत्मविकास के लिए प्रेरित किया।

शिक्षक केवल पाठ नहीं पढ़ाता, व्यक्तित्व गढ़ता है : मनोज बोरठाकुर

वरिष्ठ पत्रकार तथा सेवानिवृत्त शिक्षक मनोज बोरठाकुर ने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत शिक्षा से होती है और शिक्षक इस परिवर्तन के सबसे महत्वपूर्ण वाहक होते हैं। उन्होंने एक सेवानिवृत्त शिक्षक के रूप में अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए कहा कि एक आचार्य केवल पाठ्यक्रम नहीं पढ़ाता, बल्कि बच्चों के चरित्र, व्यक्तित्व, नैतिकता और सामाजिक चेतना का निर्माण करता है। उन्होंने प्रशिक्षुओं से समाज के लिए प्रेरणास्रोत बनने का आह्वान किया।

मनोज बोरठाकुर ने वर्तमान समय में भारतीय सभ्यता संस्कृति पर मंडरा रहे संकट के बादलों का हवाला देते हुए कहा कि इन प्रतिकूल परिस्थितियों में एकल अभियान द्वारा देश के आदिवासी बहुल क्षेत्रों और दुर्गम ग्रामीण इलाकों में किया जा रहा कार्य अत्यंत ही सराहनीय है। उन्होंने एकल अभियान को अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया।

मातृशक्ति की भागीदारी से ही संस्कारित समाज का निर्माण : सुमन शर्मा

शिवसागर अंचल महिला समिति की अध्यक्षा सुमन शर्मा ने कहा कि मातृशक्ति की सक्रिय भूमिका के बिना संस्कारित समाज की कल्पना अधूरी है। उन्होंने आचार्य-आचार्याओं से बच्चों में भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों, अनुशासन, सेवा भावना और राष्ट्रभक्ति के संस्कार विकसित करने पर विशेष बल दिया।

पंचमुखी शिक्षा से ही मजबूत होगा ग्रामीण भारत : संजय पारीक

मीडिया प्रभारी संजय पारीक ने कहा कि एकल अभियान के माध्यम से गांवों में शिक्षा, संस्कार, स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक समरसता का जो कार्य हो रहा है, उसे समाज तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना भी एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

उन्होंने प्रशिक्षित आचार्यों से आह्वान किया कि वे प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और अनुभव को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में लागू करते हुए पंचमुखी शिक्षा—शिक्षा, आरोग्य, विकास, जागरण और संस्कार—को पूर्ण रूप से क्रियान्वित करें, ताकि ग्रामीण समाज के सर्वांगीण विकास का मार्ग प्रशस्त हो सके।

उन्होंने कहा कि एकल अभियान की सफलता उन समर्पित पूर्णकालिक कार्यकर्ताओं और आचार्य-आचार्याओं पर निर्भर करती है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद दुर्गम क्षेत्रों में सेवा का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मानव निर्माण से बड़ा कोई कार्य नहीं है और सेवा भावना के बिना शिक्षक की भूमिका अधूरी है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान और अनुभव के बल पर सभी प्रशिक्षित आचार्य-आचार्याएं एकल अभियान के उद्देश्यों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाते हुए राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

संस्कारित पीढ़ी ही राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति : हिमाद्री ओझा

राष्ट्रीय सेविका समिति की जिला कार्यवाहिका हिमाद्री ओझा ने समाज निर्माण में मातृ शक्ति की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण का आधार संस्कारित परिवार और संस्कारित पीढ़ी होती है। उन्होंने प्रशिक्षुओं से बच्चों में भारतीय संस्कृति, आत्मविश्वास, नैतिकता, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति के संस्कार विकसित करने का आह्वान किया।

“ग्रामीण भारत के उत्थान का सबसे सशक्त माध्यम है संस्कारित शिक्षा” : अजय अग्रवाल

अंचल समिति के सचिव अजय अग्रवाल ने अपने संबोधन में कहा कि एकल अभियान का उद्देश्य केवल बच्चों को अक्षर ज्ञान देना नहीं, बल्कि उन्हें संस्कारवान, आत्मनिर्भर और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायी नागरिक बनाना है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण भारत के समग्र विकास की आधारशिला गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुदृढ़ संस्कार हैं। उन्होंने प्रशिक्षु आचार्य-आचार्याओं से आग्रह किया कि वे गांव-गांव जाकर बच्चों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ अभिभावकों और समाज में भी शिक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य जागरूकता और सामाजिक समरसता का संदेश पहुंचाएं।

दैनिक दस सत्रों में हुआ व्यापक प्रशिक्षण

आयोजकों ने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद आयोजित इस दस दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण वर्ग में प्रतिभागियों का दैनिक कार्यक्रम अत्यंत अनुशासित रहा। प्रतिदिन प्रातः 4:30 बजे जागरण सत्र से लेकर रात्रि 10 बजे दीप निर्वापन तक दैनिक दस प्रशिक्षण सत्रों के माध्यम से बौद्धिक, मानसिक, आध्यात्मिक तथा शारीरिक विकास पर आधारित प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण में शिक्षण पद्धति, व्यक्तित्व विकास, संगठनात्मक विचारधारा, कार्य नियोजन, नेतृत्व क्षमता, सांस्कृतिक जागरण, ग्राम विकास तथा सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषयों पर विशेष अभ्यास कराया गया।

हर वर्ष आयोजित होता है गुणवत्ता उन्नयन प्रशिक्षण

एकल अभियान के अनुसार, आचार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा उनके बौद्धिक, मानसिक, आध्यात्मिक एवं शारीरिक विकास के उद्देश्य से इस प्रकार के प्रशिक्षण वर्ग प्रतिवर्ष आयोजित किए जाते हैं। प्रारंभिक वर्ग के माध्यम से नए आचार्य-आचार्याओं को संगठन की विचारधारा, अवधारणा, कार्यपद्धति और दायित्वों से परिचित कराया जाता है। यह केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के संकल्प को साकार करने की एक साधना है।

अब गांव-गांव संचालित होंगे एकल विद्यालय

प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद सभी 36 प्रशिक्षित आचार्य-आचार्याएं अपने-अपने गांवों में जाकर एकल विद्यालयों का संचालन करेंगे। वे 6 से 14 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को पंचमुखी शिक्षा—शिक्षा, आरोग्य, विकास, जागरण और संस्कार—के आधार पर शिक्षित करेंगे तथा आधुनिक समय में विलुप्त होती भारतीय संस्कृति, सामाजिक मूल्यों और राष्ट्रधर्म के प्रति नई पीढ़ी को जागरूक बनाने का कार्य करेंगे।

सफल आयोजन में इन कार्यकर्ताओं की रही महत्वपूर्ण भूमिका

प्रारंभिक वर्ग के सफल संचालन में अंचल अभियान प्रमुख जूनमनी कुर्मी, कार्यालय प्रमुख दिगंत दास, प्राथमिक शिक्षा प्रमुख दीपान्ती बाउरी, संच प्रमुख बिंदावती गुवाला, नोमी गोगोई, सुरोभी गोगोई, मनी कोइरी, आईसेंगफा गोगोई, दीपिका तांती, संच संस्कार प्रमुख पोम्पी तांती, मालती बाउरी तथा रिंजुमोनी बाउरी सहित शिवसागर अंचल के समस्त कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आभार और विश्वास

समापन अवसर पर आयोजन समिति ने सभी प्रशिक्षकों, अतिथियों, सहयोगियों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि प्रशिक्षण प्राप्त आचार्य-आचार्याएं ग्रामीण समाज में शिक्षा, संस्कार, सेवा और सामाजिक जागरण के प्रभावी माध्यम बनकर एकल अभियान के उद्देश्यों को नई गति प्रदान करेंगे तथा राष्ट्र निर्माण की इस महत्वपूर्ण यात्रा को और अधिक सशक्त बनाएंगे।

अंचल अभियान प्रमुख जूनमनी कुर्मी द्वारा उपस्थित अतिथियों एवं सभी सहयोगियों का धन्यवाद ज्ञापन करते हुए एवं शुभकामना मंत्र के सामूहिक पाठ के साथ कार्यक्रम का सफल समापन हुआ।

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