Welcome to NE NEWS 24X7   Click to listen highlighted text! Welcome to NE NEWS 24X7
ASSAMBUSINESSDEVLOPMENTEconomySTATETINSUKIATOP NEWSटॉप न्यूज़राज्य

असम की माचा चाय अब जीतेगी वैश्विक बाजार : तिनसुकिया से शुरू हुआ भारत का पहला व्यावसायिक उत्पादन : जापानी तकनीक और असम की विरासत का अनूठा संगम : पहली खेप ₹3,000 प्रति किलोग्राम में बिकी : प्रीमियम वैश्विक बाजार में नई पहचान की ओर बढ़ा ‘असम टी’

न्यूज डेस्क, 17 जुलाई : विश्वभर में अपनी विशिष्ट सुगंध और मजबूत स्वाद के लिए प्रसिद्ध असम चाय अब एक नए अध्याय की शुरुआत कर चुकी है। पारंपरिक काली चाय (CTC और ऑर्थोडॉक्स) के लिए विख्यात असम ने अब जापानी शैली की प्रीमियम माचा (Matcha) चाय के व्यावसायिक उत्पादन में भी इतिहास रच दिया है। तिनसुकिया जिले के छोटा तिंगराई टी एस्टेट ने भारत में पहली बार व्यावसायिक स्तर पर माचा चाय का उत्पादन शुरू किया है, जिससे देश के चाय उद्योग को वैश्विक स्पेशियलिटी टी बाजार में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

भारत के चाय उद्योग के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि

अब तक भारत में उपलब्ध अधिकांश माचा चाय जापान, चीन और वियतनाम जैसे देशों से आयात की जाती थी। पहली बार असम की धरती पर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार माचा चाय का व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने से भारत इस उच्च मूल्य वाले वैश्विक बाजार में एक नए उत्पादक के रूप में उभरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि केवल असम ही नहीं, बल्कि पूरे भारतीय चाय उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

पहली खेप ने नीलामी में बनाया रिकॉर्ड, ₹3,000 प्रति किलो मिला मूल्य

छोटा तिंगराई टी एस्टेट द्वारा तैयार की गई पहली व्यावसायिक खेप को गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर (GTAC) में नीलामी के लिए प्रस्तुत किया गया। लगभग 5 किलोग्राम की पहली खेप को ₹3,000 प्रति किलोग्राम की प्रभावशाली कीमत प्राप्त हुई। शुरुआती नीलामी में खरीदारों और चाय व्यापारियों की मजबूत रुचि ने स्पष्ट संकेत दिया कि असम में निर्मित माचा चाय को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रीमियम बाजारों में अच्छी स्वीकार्यता मिल सकती है।

दस वर्षों के भारत-जापान सहयोग का परिणाम

इस परियोजना के पीछे लगभग एक दशक तक चला भारत-जापान तकनीकी सहयोग रहा। जापानी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में चाय की विशेष किस्मों, खेती की तकनीकों, पत्तियों की शेडिंग, प्रसंस्करण, स्टीमिंग, सुखाने और बारीक पीसने (ग्राइंडिंग) की पारंपरिक जापानी विधियों को अपनाया गया। इसी तकनीकी सहयोग के कारण अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप माचा चाय तैयार करना संभव हो सका।

क्या होती है माचा चाय और क्यों है इतनी खास?

माचा सामान्य ग्रीन टी से अलग होती है। इसके लिए चाय की पत्तियों को कटाई से पहले कुछ सप्ताह तक छाया (Shade) में उगाया जाता है, जिससे उनमें क्लोरोफिल और अमीनो एसिड की मात्रा बढ़ती है। इसके बाद पत्तियों को विशेष प्रक्रिया से सुखाकर अत्यंत महीन पाउडर बनाया जाता है।

यही कारण है कि माचा चाय अपने गहरे हरे रंग, विशिष्ट स्वाद, प्राकृतिक ऊर्जा, उच्च एंटीऑक्सीडेंट और स्वास्थ्य लाभों के कारण दुनिया भर में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। कैफे, हेल्थ ड्रिंक, डेजर्ट, बेकरी और प्रीमियम पेय पदार्थों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

वैश्विक बाजार में बढ़ती मांग, सीमित आपूर्ति

विशेषज्ञों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका, यूरोप, मध्य-पूर्व और एशिया के कई देशों में माचा चाय की मांग तेज़ी से बढ़ी है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ताओं, फिटनेस उद्योग और प्रीमियम कैफे संस्कृति ने इसकी लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी है।

वर्तमान में विश्व बाजार में माचा की आपूर्ति सीमित है, जबकि मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में असम का इस क्षेत्र में प्रवेश भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खोल सकता है।

‘असम टी’ ब्रांड को मिलेगा वैश्विक विस्तार

राज्य सरकार और चाय उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि माचा चाय का उत्पादन शुरू होने से ‘असम टी’ की वैश्विक ब्रांड पहचान और मजबूत होगी। अब तक असम मुख्य रूप से सीटीसी और ऑर्थोडॉक्स चाय के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन अब स्पेशियलिटी टी श्रेणी में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने भी इस उपलब्धि को असम की समृद्ध चाय विरासत के लिए एक नया अध्याय बताते हुए कहा कि यह पहल राज्य के चाय उद्योग के विविधीकरण और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को नई मजबूती प्रदान करेगी।

चाय उद्योग को मिलेंगे बहुआयामी आर्थिक लाभ

विशेषज्ञों का मानना है कि माचा चाय का व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने से राज्य के चाय उद्योग को कई स्तरों पर लाभ मिलेगा। इससे—

– उच्च मूल्य वाले प्रीमियम बाजारों तक पहुंच बढ़ेगी।
– निर्यात में विविधता आएगी।
– चाय बागानों को अधिक मूल्य प्राप्त होगा।
– मूल्य संवर्धन (Value Addition) को बढ़ावा मिलेगा।
– स्थानीय रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
– किसानों और उत्पादकों की आय बढ़ाने में सहायता मिलेगी।
– भारतीय स्पेशियलिटी टी उद्योग को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी।

पारंपरिक चाय से आगे बढ़ने की नई रणनीति

लंबे समय से असम का चाय उद्योग कीमतों में उतार-चढ़ाव, लागत वृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे समय में उच्च मूल्य वाली स्पेशियलिटी चाय का उत्पादन उद्योग के लिए एक रणनीतिक बदलाव माना जा रहा है। इससे केवल उत्पादन बढ़ाने के बजाय गुणवत्ता और मूल्य आधारित बाजार पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा।

गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर की बढ़ती भूमिका

गुवाहाटी टी ऑक्शन सेंटर देश के प्रमुख चाय नीलामी केंद्रों में शामिल है। हाल के वर्षों में यहां प्रीमियम गुणवत्ता वाली चाय को लगातार बेहतर मूल्य मिल रहा है। माचा चाय की पहली सफल नीलामी ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में स्पेशियलिटी चाय की अलग पहचान बन सकती है और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों की रुचि और बढ़ सकती है।

छोटा तिंगराई टी एस्टेट ने रचा इतिहास, 10 वर्षों की मेहनत से साकार हुआ भारत का पहला व्यावसायिक माचा उत्पादन

तिनसुकिया जिले के छोटा तिंगराई टी एस्टेट प्राइवेट लिमिटेड ने भारत में पहली बार व्यावसायिक स्तर पर माचा (Matcha) चाय का उत्पादन कर नया इतिहास रच दिया है। एस्टेट के डायरेक्टर मृत्युंजय जालान के अनुसार लगभग 10 वर्ष पहले उन्होंने जापानी तकनीक के आधार पर उच्च गुणवत्ता वाली माचा चाय विकसित करने की पहल शुरू की थी। उस समय भारत में इसकी मांग सीमित और उत्पादन लागत अधिक होने के कारण इसे व्यावसायिक रूप से शुरू नहीं किया गया, लेकिन हाल के वर्षों में देश और विदेश में माचा चाय की तेजी से बढ़ती मांग को देखते हुए यह कदम उठाया गया। उनके अनुसार, इस पहल का उद्देश्य केवल एक नया उत्पाद बाजार में उतारना नहीं, बल्कि ‘असम टी’ को वैश्विक प्रीमियम स्पेशियलिटी टी बाजार में नई पहचान दिलाना और निर्यात के नए अवसरों का सृजन करना है। कंपनी का मानना है कि यह उपलब्धि भारतीय चाय उद्योग के लिए एक नए युग की शुरुआत साबित होगी।

विशेषज्ञों की राय : असम के लिए सुनहरा अवसर

चाय उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि गुणवत्ता, उत्पादन और निर्यात मानकों को लगातार बनाए रखा गया तो आने वाले वर्षों में असम न केवल दुनिया की सर्वश्रेष्ठ काली चाय के लिए, बल्कि प्रीमियम माचा चाय के लिए भी एक प्रमुख वैश्विक केंद्र बन सकता है। इससे राज्य के चाय बागानों, निर्यातकों, प्रसंस्करण इकाइयों और लाखों श्रमिकों को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!
Click to listen highlighted text!