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शिवसागर में जहरीली ‘भालुकी’ मकड़ी का खौफ : टैरेंटुला प्रजाति की विषैली विशालकाय चिलोब्रैकिस मकड़ी के दंश से युवक गंभीर रूप से बीमार : विशेषज्ञ चिकित्सक ने जारी की चेतावनी : 2022 से अब तक 100 से अधिक मामलों का इलाज, 6 मरीजों की उंगलियां काटनी पड़ीं

समय पर उपचार से बचाव संभव, नई उपचार पद्धति से 10 महिला मरीजों की उंगलियां बचाने में मिली सफलता : डॉ. सुरजीत गिरी

शिवसागर, 13 जून : असम के शिवसागर जिले में एक बार फिर टैरेंटुला प्रजाति की विषैली विशालकाय चिलोब्रैकिस (Chilobrachys), जिसे स्थानीय असमिया भाषा में ‘भालुकी मकड़ी’ कहा जाता है, के दंश का मामला सामने आने के बाद लोगों में चिंता और भय का माहौल व्याप्त हो गया है। इस बार मकड़ी के काटने से एक व्यक्ति गंभीर रूप से बीमार हो गया, जिसके बाद उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। घटना ने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सतर्क कर दिया है।

देर रात सोते समय हुआ दंश

प्राप्त जानकारी के अनुसार शिवसागर शहर के मध्यवर्ती सुकर गांव निवासी अब्दुर रहीम को देर रात उस समय जहरीली भालुकी मकड़ी ने काट लिया, जब वह अपने किराए के मकान में सो रहा था। मकड़ी के दंश के कुछ ही समय बाद उसकी तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी और शरीर में गंभीर लक्षण दिखाई देने लगे। परिजनों ने तत्काल उसे अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार जारी है।

पीड़ित का इलाज असम के प्रसिद्ध सर्पदंश एवं विष विशेषज्ञ डॉ. सुरजीत गिरी की देखरेख में किया जा रहा है। चिकित्सकों के अनुसार मरीज की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

क्या है भालुकी या चिलोब्रैकिस मकड़ी?

भालुकी मकड़ी टैरेंटुला परिवार की एक विषैली और विशालकाय मकड़ी है, जो मुख्य रूप से पूर्वोत्तर भारत के आर्द्र और वन क्षेत्रों में पाई जाती है। इसके शरीर पर घने बाल होने के कारण स्थानीय भाषा में इसे ‘भालुकी’ कहा जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह मकड़ी सामान्य परिस्थितियों में मनुष्यों पर हमला नहीं करती, लेकिन खतरा महसूस होने पर या संपर्क में आने पर दंश कर सकती है। इसका दंश अत्यंत दर्दनाक हो सकता है और कुछ मामलों में गंभीर चिकित्सकीय जटिलताएं भी उत्पन्न कर सकता है।

डॉ. सुरजीत गिरी ने दी गंभीर चेतावनी

घटना के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए प्रसिद्ध सर्पदंश एवं विष विशेषज्ञ डॉ. सुरजीत गिरी ने कहा कि भालुकी मकड़ी के दंश को किसी भी स्थिति में हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि कई मामलों में इस मकड़ी का विष जहरीले सांपों के विष के समान गंभीर प्रभाव उत्पन्न कर सकता है। दंश के बाद मरीज में तीव्र दर्द, सूजन, ऊतकों को नुकसान, संक्रमण, नसों पर प्रभाव तथा गंभीर अंग-क्षति जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

डॉ. गिरी ने कहा कि लोगों में अभी भी इस मकड़ी को लेकर पर्याप्त जागरूकता नहीं है, जिसके कारण कई मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते और स्थिति जटिल हो जाती है।

डिमौ अस्पताल में 100 से अधिक मामलों का उपचार

डॉ. गिरी के अनुसार वर्ष 2022 से अब तक डिमौ ग्रामीण अस्पताल में भालुकी तथा अन्य विषैली मकड़ियों के दंश से प्रभावित 100 से अधिक मरीजों का सफल उपचार किया जा चुका है।

इन मामलों के अध्ययन से चिकित्सकों को मकड़ी के विष और उसके प्रभावों को समझने में महत्वपूर्ण सहायता मिली है। हालांकि सभी मामलों में परिणाम सकारात्मक नहीं रहे।

उन्होंने बताया कि कुछ मरीज अस्पताल पहुंचने में अत्यधिक देर कर चुके थे, जिसके कारण प्रभावित हिस्से में गंभीर ऊतक क्षति विकसित हो गई थी।

छह मरीजों की उंगलियां काटनी पड़ीं

विशेषज्ञ चिकित्सक ने बताया कि अब तक ऐसे छह मामले सामने आए, जिनमें दंश के कारण गंभीर टिश्यू नेक्रोसिस (ऊतक मृत्यु) विकसित हो गया था।

इन मरीजों में संक्रमण और ऊतक क्षति इतनी बढ़ गई कि उनकी जान बचाने के लिए प्रभावित उंगलियों को काटना पड़ा। डॉ. गिरी ने कहा कि ऐसे मामलों ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से काफी व्यथित किया और इसी कारण उन्होंने बेहतर उपचार पद्धति विकसित करने की दिशा में कार्य शुरू किया।

नई उपचार पद्धति बनी उम्मीद की किरण

डॉ. गिरी ने बताया कि वर्षों के अनुभव और शोध के आधार पर उन्होंने एक विशेष उपचार पद्धति विकसित की है, जिसमें स्टेरॉयड और लोकल एनेस्थीसिया आधारित विशेष इंजेक्शन का प्रयोग किया जाता है।

इस उपचार पद्धति के माध्यम से अब तक मकड़ी दंश से प्रभावित 10 महिला मरीजों की उंगलियां बचाने में सफलता मिली है। सभी मरीज वर्तमान में स्वस्थ हैं और उन्हें अंग विच्छेदन की आवश्यकता नहीं पड़ी।

विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर उपचार मिलने पर गंभीर जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।

हर दंश का प्रभाव एक जैसा नहीं

डॉ. गिरी ने स्पष्ट किया कि मकड़ी के दंश का प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करता है कि शरीर के किस हिस्से में दंश हुआ है।

उन्होंने बताया कि हाथ और पैरों की उंगलियों में दंश होने की स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है, क्योंकि वहां रक्त प्रवाह सीमित होता है। वहीं शरीर के अन्य हिस्सों में दंश होने पर लक्षण और जटिलताएं अलग प्रकार की हो सकती हैं।

इसी कारण प्रत्येक मरीज का अलग-अलग मूल्यांकन और उपचार आवश्यक होता है।

किडनी तक को प्रभावित कर सकता है संक्रमण

विशेषज्ञ चिकित्सक के अनुसार कई मामलों में लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे संक्रमण बढ़ता जाता है।

गंभीर परिस्थितियों में संक्रमण रक्त प्रवाह के माध्यम से शरीर के अन्य अंगों तक पहुंच सकता है और किडनी सहित महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकता है। ऐसी स्थिति मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।

क्या करें यदि भालुकी मकड़ी काट ले ?

डॉ. गिरी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति को भालुकी या किसी अन्य विषैली मकड़ी के काटने का संदेह हो तो सबसे पहले प्रभावित स्थान को साबुन और स्वच्छ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए।

इसके बाद बिना किसी देरी के नजदीकी अस्पताल या चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि घरेलू उपचार, झाड़-फूंक, अंधविश्वास या स्वयं उपचार करने की कोशिश कई बार स्थिति को और गंभीर बना सकती है।

एंटीवेनम नहीं, समय पर उपचार ही सबसे बड़ा बचाव

विशेष चिंता की बात यह है कि वर्तमान समय तक भालुकी (Chilobrachys) मकड़ी के विष के लिए कोई विशिष्ट एंटीवेनम उपलब्ध नहीं है।

ऐसी स्थिति में शीघ्र चिकित्सकीय हस्तक्षेप, दर्द और सूजन का नियंत्रण, संक्रमण की रोकथाम तथा प्रभावित ऊतकों की सुरक्षा ही उपचार का मुख्य आधार है।

विशेषज्ञों का मानना है कि दंश के बाद जितनी जल्दी मरीज अस्पताल पहुंचता है, उसके गंभीर जटिलताओं से बचने की संभावना उतनी ही अधिक रहती है।

मानसून में बढ़ जाती है विषैले जीवों की गतिविधियां

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के मौसम में मकड़ियों, सांपों और अन्य विषैले जीवों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। बारिश के कारण इनके प्राकृतिक आवास प्रभावित होते हैं और ये मानव बस्तियों की ओर आ जाते हैं।

ऐसे में घरों, गोदामों, लकड़ी के ढेरों, पुराने भवनों और नम स्थानों की नियमित सफाई अत्यंत आवश्यक है। लोगों को विशेष रूप से रात के समय सावधानी बरतने और सोने से पहले बिस्तर तथा आसपास के स्थानों की जांच करने की सलाह दी गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भालुकी मकड़ी के दंश से होने वाले नुकसान को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय जागरूकता और समय पर उपचार है।

शिवसागर में सामने आए ताजा मामले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि विषैली मकड़ियों के दंश को साधारण कीट के काटने जैसी घटना समझना गंभीर भूल हो सकती है। समय पर चिकित्सकीय सहायता और उचित सावधानी ही संभावित गंभीर परिणामों से बचने का सबसे सुरक्षित मार्ग है।

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