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शिवसागर जिला छात्र संस्था की अनूठी पहल : 85% प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 500 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों का भव्य सम्मान : आसू ने किया शिक्षा के माध्यम से समाज और राष्ट्र निर्माण का आह्वान, मेधावी विद्यार्थियों को सामाजिक उत्तरदायित्व निभाने का संदेश

"अंक ही जीवन की अंतिम पहचान नहीं, ज्ञान, मूल्यबोध और सामाजिक जिम्मेदारी ही सफलता का वास्तविक पैमाना है" — समीरन फुकन

शिवसागर, 7 जून : हाल ही में घोषित हाईस्कूल शिक्षांत (HSLC) तथा उच्चतर माध्यमिक (HS) परीक्षा 2026 में 85 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त कर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले शिवसागर जिले के 500 से अधिक मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित करने के उद्देश्य से रविवार को शिवसागर नाट्य मंदिर में एक भव्य एवं गरिमामय सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।

अखिल शिवसागर जिला छात्र संस्था के तत्वावधान में तथा शिवसागर आंचलिक छात्र संस्था के सहयोग से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए मेधावी विद्यार्थी, अभिभावक, शिक्षाविद्, छात्र नेता एवं गणमान्य व्यक्तियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। शिवसागर नाट्य मंदिर का सभागार विद्यार्थियों और अभिभावकों से खचाखच भरा हुआ था।

कार्यक्रम का शुभारंभ शिवसागर कॉमर्स कॉलेज की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सामूहिक गीत “तूरे मुरे आलोकोरे यात्रा” से हुआ, जिसने पूरे वातावरण को भावनात्मक और सांस्कृतिक रंगों से सराबोर कर दिया।

कार्यक्रम का संचालन जिला छात्र संस्था के महासचिव दीपांकर सैकिया ने किया, जबकि अध्यक्षता जिला छात्र संस्था के अध्यक्ष मानव हजारिका ने की।

विदिशा सैकिया ने की कार्यक्रम की सराहना

कार्यक्रम का उद्घाटन शिवसागर जिला प्रशासन की ओर से उपस्थित सहायक आयुक्त विदिशा सैकिया ने किया। उन्होंने छात्र संस्था की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम केवल मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित करने तक सीमित नहीं होते, बल्कि उन्हें समाज के प्रति जिम्मेदार नागरिक के रूप में विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को समय रहते प्रेरणा और उचित दिशा मिलना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे सम्मान समारोह उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ-साथ भविष्य के लिए नई ऊर्जा प्रदान करते हैं।

समीरन फुकन का प्रेरणादायी संबोधन

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित अखिल असम छात्र संस्था (आसू) के महासचिव समीरन फुकन ने मेधावी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि हाईस्कूल और उच्चतर माध्यमिक परीक्षाएं जीवन के दो महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। इन परीक्षाओं में मिली सफलता किसी संयोग का परिणाम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की कठिन मेहनत, अनुशासन, लगन और परिवार के त्याग का प्रतिफल है।

उन्होंने कहा कि शिक्षा ही विद्यार्थियों के हाथ में सबसे शक्तिशाली हथियार है। इसी शिक्षा के बल पर युवा समाज और राष्ट्र के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा सकते हैं। वर्तमान समय आत्मचिंतन, आत्मविश्वास और आत्मस्थापना का समय है। विद्यार्थियों को केवल अच्छे अंक प्राप्त करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नैतिक मूल्यों, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक जिम्मेदारियों से युक्त नागरिक बनने का प्रयास करना चाहिए।

समीरन फुकन ने कहा कि नई पीढ़ी को अपनी भाषा, साहित्य, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण के प्रति भी जागरूक होना होगा। वैश्वीकरण के इस दौर में अपनी जड़ों को भूल जाना किसी भी समाज के लिए शुभ संकेत नहीं है।

उन्होंने विद्यार्थियों से कौशल आधारित शिक्षा, शोध, नवाचार, उद्यमिता और रोजगार सृजन की दिशा में आगे बढ़ने का आह्वान करते हुए कहा कि केवल नौकरी की तलाश करने के बजाय युवाओं को अवसर पैदा करने वाले व्यक्तित्व के रूप में विकसित होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि श्रम के प्रति सम्मान, समाज के प्रति जिम्मेदारी और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना ही शिक्षा को सार्थक बनाती है। यदि युवा पीढ़ी इन मूल्यों को आत्मसात कर लेती है तो समाज और राष्ट्र दोनों का भविष्य उज्ज्वल होगा।

“अंक सफलता का अंतिम मापदंड नहीं” — डॉ. सूरजीत बोरकटकी

विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय के छात्र कल्याण अधिष्ठाता तथा गणित विभाग के प्राध्यापक डॉ. सूरजीत बोरकटकी ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि परीक्षा में प्राप्त अंक कभी भी जीवन की सफलता का अंतिम मापदंड नहीं हो सकते।

उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए आत्मविश्वास, धैर्य, रचनात्मक सोच और सही लक्ष्य का चयन अत्यंत आवश्यक है। प्रत्येक विद्यार्थी को अपनी रुचि, क्षमता और सपनों के अनुरूप जीवन की दिशा निर्धारित करनी चाहिए।

शिक्षाविदों ने दिए सफलता के सूत्र

कार्यक्रम में शिवसागर गर्ल्स कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. प्रतिम शर्मा तथा वीर लाचित बरफुकन कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. पंकज ज्योति हजारिका ने भी विद्यार्थियों को संबोधित किया। दोनों शिक्षाविदों ने विद्यार्थियों से स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर निरंतर परिश्रम और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।

500 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान

कार्यक्रम के अंतिम चरण में प्रसिद्ध शिक्षाविद एवं लोकप्रिय क्विज मास्टर ब्रजेन बोरा के संचालन में जिले के 85 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले 500 से अधिक विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया।

सम्मान स्वरूप प्रत्येक विद्यार्थी को प्रशस्ति-पत्र, एक लेदर फाइल तथा पुस्तक खरीदने के लिए विशेष कूपन प्रदान किया गया। विद्यार्थियों और अभिभावकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार का सम्मान युवा पीढ़ी को और अधिक मेहनत करने तथा जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

उपस्थित रहे अनेक छात्र नेता और गणमान्य व्यक्ति

इस अवसर पर अखिल असम छात्र संस्था के केंद्रीय संगठन सचिव जितेंद्र सूतिया, कार्यकारी सदस्य ध्रुवज्योति कलिता, लब्ध प्रतिम दास, शिवसागर आंचलिक छात्र संस्था के अध्यक्ष मानस प्रतिम बरुआ, सचिव मनजीत हजारिका सहित जिले की विभिन्न क्षेत्रीय छात्र संस्थाओं के सैकड़ों पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।

समारोह केवल मेधावी विद्यार्थियों के सम्मान तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा, सामाजिक उत्तरदायित्व, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्र निर्माण के प्रति नई पीढ़ी को प्रेरित करने वाला एक सशक्त मंच बनकर उभरा।

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