
शिवसागर / 2 मई : विश्व मजदूर दिवस के अवसर पर शिवसागर में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के शिवसागर केंद्र ने एक भावुक और प्रेरणादायक कार्यक्रम का आयोजन किया।
शताब्दी पुराने मजदूर दिवस के बावजूद असम के कई मेहनतकश आज भी इस दिन की जानकारी नहीं रखते। इसी कमी को दूर करने और श्रमिकों का सम्मान करने के उद्देश्य से आयोजित इस समारोह में सैकड़ों मजदूरों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का सबसे मार्मिक पल तब आया जब एक सफाई कर्मी बाबली बासफर भावुक होकर बोली कि हमें पता ही नहीं था कि हमारे लिए भी एक दिन है। आप लोगों के प्यार के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद। उनके इस वाक्य ने समारोह में उपस्थित लोगों के दिलों को छू लिया और यह साफ जाहिर कर दिया कि ग्रामीण और छोटे शहरों में अभी भी मजदूर दिवस जागरूकता की भारी कमी है।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित शिवसागर नगरपालिका अध्यक्ष मृणालिनी कुंवर ने अपने संबोधन में मजदूर दिवस के इतिहास और महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने नगरपालिका क्षेत्र के श्रमिकों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को चरणबद्ध तरीके से हल करने का आश्वासन दिया।

ब्रह्माकुमारीज की ओर से ऊपरी असम, नागालैंड, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश मंडल की प्राधिकारी राजयोगिनी रजनी दीदी ने अपने संबोधन में कहा कि समाज में श्रमिकों का स्थान अनमोल है। उन्होंने श्रमिकों के कर्तव्यों और उनके सम्मान के महत्व पर जोर दिया।
कार्यक्रम में अनुसूचित जाति बासफर समाज कल्याण समिति के अध्यक्ष नीलेश बाचफोर और शिवसागर ई-रिक्शा टूर एंड टूरिस्ट एसोसिएशन के सचिव आबेदुर रहमान ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए ब्रह्माकुमारी संगठन का आभार व्यक्त किया।
इससे पहले बीके नयना ने ब्रह्माकुमारीज के संक्षिप्त इतिहास के साथ-साथ राजयोग एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन के अंतर्गत चल रही 20 विभिन्न विंग्स की आध्यात्मिक, सामाजिक और शैक्षणिक सेवाओं की जानकारी दी। बीके पूर्णिमा और बीके नयना ने मजदूर दिवस पर एक सुंदर भक्ति गीत प्रस्तुत किया। बीके संध्या ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

कृषि विभाग के सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक डॉ. अरुण चांगकाकती के संचालन में आयोजित कार्यक्रम का समापन बीके पूर्णिमा के कुशल संचालन में सामूहिक योग और परमात्मा की याद में आध्यात्मिक गीत गाए गए।
ब्रह्माकुमारीज की ओर से बताया गया कि 4 से 6 मई तक श्रमिकों के लिए सुबह 7.30 बजे से 8.30 बजे तक और शाम 6 बजे से 7 बजे तक निःशुल्क राजयोग प्रशिक्षण दिया जाएगा।

कार्यक्रम में रिक्शा चालक, ठेला चालक, टाइल्स कर्मी, सफाई कर्मी, मिस्त्री सहित सौ से अधिक श्रमिकों ने भाग लिया। यह कार्यक्रम केवल एक समारोह नहीं, बल्कि उन अज्ञात मेहनतकशों को सम्मान देने का एक सुंदर प्रयास था जिनके बिना समाज की नींव भी नहीं टिक सकती।
ब्रह्माकुमारी केंद्र की इस पहल ने एक बार फिर साबित किया कि आध्यात्मिकता और सामाजिक सेवा का सुंदर संगम समाज परिवर्तन का आधार बन सकता है।




