
सीकर, 16 मई : राजस्थान के कोचिंग हब सीकर में नीट-यूजी 2026 परीक्षा रद्द होने के सदमे में एक छात्र ने आत्महत्या कर ली।
मृतक की पहचान प्रदीप मेघवाल (23 वर्ष) के रूप में हुई है, जो झुंझुनूं जिले के गुडा गौड़जी क्षेत्र के कनिका की ढाणी गांव का निवासी था।
प्रदीप पिछले तीन वर्षों से सीकर के पिपराली रोड स्थित जलधारी नगर में अपनी दो बहनों के साथ किराए के कमरे में रहकर नीट की तैयारी कर रहा था।
परिवार के अनुसार, प्रदीप की यह अपनी तीसरी कोशिश थी। 3 मई को हुई परीक्षा में उसने अच्छा प्रदर्शन किया था और परिवार को 650 से अधिक अंकों की उम्मीद थी।
पेशे से मजदुर पिता राजेश कुमार मेघवाल ने बताया कि बेटा अक्सर कहता था – “इस बार मेरा मेडिकल कॉलेज में चयन पक्का है।” परीक्षा रद्द होने की खबर सुनकर वह गहरे मानसिक तनाव में चला गया। 15 मई को वह कमरे में छत के पंखे से बहन की ओढ़नी से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। घटना के समय एक बहन कोचिंग गई हुई थी और दूसरी बाथरूम में थी।
परिवार और गांव में शोक की लहर
प्रदीप परिवार का इकलौता बेटा था। तीन बहनों का सहारा था। पिता ने भावुक होकर कहा, “तीन साल की मेहनत, कर्ज लेकर जमीन बेचकर पढ़ाया… सब बर्बाद हो गया। सिस्टम ने हमारा बेटा छीन लिया।” परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में मातम का माहौल है। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने बढ़ते परीक्षा दबाव, पेपर लीक और अनिश्चितताओं पर गहरी चिंता जताई है।
नीट 2026 विवाद का संक्षिप्त विवरण
नीट-यूजी 2026 परीक्षा 3 मई को देशभर में हुई थी, जिसमें 22 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए। 12 मई को NTA ने पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द कर दी। CBI जांच कर रही है। री-एग्जाम 21 जून 2026 को प्रस्तावित है। इस अनिश्चितता ने लाखों छात्रों को मानसिक रूप से प्रभावित किया है। सीकर में इस घटना के अलावा दिल्ली में भी एक छात्रा की आत्महत्या की खबर है।
स्थानीय प्रतिक्रिया और मांगें
स्थानीय लोगों और प्रतियोगी परीक्षाओं के छात्रों ने सरकार, NTA और संबंधित एजेंसियों से छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा, परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और समय पर परिणाम घोषणा की मांग की है। पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट समेत कई नेताओं ने दुख जताया और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की बात कही।
यह घटना केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की चुनौतियों की ओर इशारा करती है। नीट जैसे परीक्षाओं में लाखों छात्र वर्षों की मेहनत लगाते हैं, लेकिन बार-बार की अनियमितताएं उनके भविष्य को अंधेरे में धकेल रही हैं।




