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CBSE का बड़ा फैसला : अब 9वीं के छात्रों को पढ़नी होंगी 3 भाषाएं : 1 जुलाई 2026 से अनिवार्य

न्यूज डेस्क, 16 मई : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने छात्रों में बहुभाषिकता और भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 15 मई 2026 को जारी सर्कुलर – Acad-33/2026 में स्पष्ट किया कि 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के सभी छात्रों के लिए तीन भाषाओं (R1, R2 और R3) का अध्ययन अनिवार्य कर दिया गया है। इनमें से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की (Native Indian Languages) होनी चाहिए।

यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा-स्कूल शिक्षा (NCF-SE) 2023 के अनुरूप लिया गया है। CBSE ने NCERT के नए कक्षा 9 पाठ्यक्रम के साथ अपनी योजना को संरेखित करने के लिए यह बदलाव किया है।

नया नियम क्या है ?

CBSE ने भाषाओं को तीन स्तरों में बांटा है :

– R1: छात्र की मुख्य/मातृ भाषा या सबसे मजबूत भाषा (उच्च स्तर पर अध्ययन)।

– R2 : दूसरी भाषा (R1 से अलग)।

– R3 : तीसरी भाषा (R1 और R2 से अलग)।

महत्वपूर्ण शर्तें :

– कम से कम दो भाषाएं भारतीय होनी चाहिए।

– यदि छात्र विदेशी भाषा (जैसे फ्रेंच, जर्मन) पढ़ना चाहे, तो R1 और R2 दोनों भारतीय भाषाएं होनी चाहिए। विदेशी भाषा को चौथी अतिरिक्त भाषा के रूप में भी चुना जा सकता है।

– कक्षा 10 में R3 अर्थात तीसरी भाषा की कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसका मूल्यांकन पूरी तरह स्कूल स्तर पर आंतरिक परीक्षा के आधार पर होगा और परिणाम CBSE प्रमाणपत्र में दर्ज किया जाएगा।

संक्रमणकालीन व्यवस्था (2026-27 सत्र के लिए) –

– कक्षा 9 के छात्र शुरू में NCERT/CBSE द्वारा निर्धारित कक्षा 6 स्तर की R3 पाठ्यपुस्तकों का उपयोग करेंगे।

– स्कूल स्थानीय साहित्य, कविताएं, कहानियां आदि जोड़कर पाठ्यक्रम को समृद्ध कर सकते हैं।

– विस्तृत दिशा-निर्देश 15 जून 2026 तक जारी किए जाएंगे।

– शिक्षकों की कमी की स्थिति में स्कूल क्लस्टर मॉडल, ऑनलाइन/हाइब्रिड कक्षाएं, अन्य विषयों के शिक्षकों की मदद या सेवानिवृत्त शिक्षकों की सेवाएं ले सकते हैं।

स्कूलों के लिए जरूरी निर्देश :

– सभी CBSE से संबद्ध स्कूलों को 30 जून 2026 तक OASIS पोर्टल पर कक्षा 6 से 9 तक की R3 भाषा संबंधी जानकारी अपडेट करनी होगी।

– विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CwSN), विदेश से लौटे छात्रों और विदेशी CBSE स्कूलों को कुछ छूट दी गई है।

उद्देश्य और फायदे :

CBSE के अनुसार, यह बदलाव छात्रों पर अतिरिक्त परीक्षा का दबाव बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए है। इससे छात्रों में भारतीय भाषाओं के प्रति समझ और सांस्कृतिक जुड़ाव बढ़ेगा। संज्ञानात्मक विकास (Cognitive Development) होगा। वैश्विक स्तर पर बेहतर प्रतिस्पर्धा की क्षमता विकसित होगी।

बोर्ड ने स्कूलों से अपील की है कि अभिभावकों, शिक्षकों और छात्रों को इस नई व्यवस्था के बारे में सकारात्मक तरीके से जागरूक करें।

छात्रों और अभिभावकों पर क्या प्रभाव पड़ेगा ?

यह बदलाव 2026-27 सत्र से कक्षा 9 में प्रवेश करने वाले छात्रों पर लागू होगा। पहले से कक्षा 9-10 में पढ़ रहे छात्रों पर तत्काल कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन भविष्य में पूर्ण रूप से तीन-भाषा फॉर्मूला लागू होने के साथ कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा में भी इसका असर दिखेगा (2030-31 तक)।

कुछ अभिभावक अतिरिक्त बोझ की चिंता जता रहे हैं, जबकि विशेषज्ञ इसे NEP के लक्ष्य “बहुभाषिक भारत” की दिशा में सकारात्मक कदम मान रहे हैं।

CBSE चेयरमैन राहुल सिंह ने पहले स्पष्ट किया था कि यह व्यवस्था छात्रों को भाषाई विविधता से जोड़ने के लिए है।

यह फैसला CBSE के व्यापक पाठ्यक्रम सुधार का हिस्सा है, जिसमें कक्षा 9-10 में व्यावसायिक शिक्षा (Vocational Education), कला और शारीरिक शिक्षा को भी अनिवार्य किया गया है। बोर्ड का लक्ष्य छात्रों को कौशल-आधारित और समग्र शिक्षा प्रदान करना है।

CBSE ने स्कूलों और अभिभावकों को सलाह दी है कि आधिकारिक CBSE वेबसाइट या सर्कुलर का अध्ययन करें और समय पर OASIS पोर्टल अपडेट पूरा करें।

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