ई-फार्मेसी के खिलाफ देशव्यापी बिगुल : 20 मई को असम समेत पूरे भारत में दवा दुकानें रहेंगी बंद, जनस्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा

गुवाहाटी 14 मई : ऑनलाइन दवा बिक्री और अनियंत्रित ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ केमिस्टों का आक्रोश अब चरम पर पहुंच गया है। असम के दवा विक्रेताओं ने भी इस देशव्यापी आंदोलन में पूरा समर्थन जताते हुए 20 मई को पूरे राज्य में दवा दुकानों के बंद रहने का आह्वान किया है। केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन ऑफ असम (सीडीएए) ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार उनकी मांगों पर तुरंत कार्रवाई नहीं करती, तो असम के सभी 30 जिलों में लगभग 12,000 सदस्यों वाली 90 प्रतिशत से अधिक दवा दुकानें पूरी तरह बंद रहेंगी।
गुरुवार को गुवाहाटी में आयोजित एक प्रेस वार्ता में संगठन के अध्यक्ष डॉ. एन.एल. अग्रवाल और महासचिव हलधर डेका ने कहा कि अनियमित ई-फार्मेसी कंपनियां न केवल स्थानीय दवा व्यवसाय को बर्बाद कर रही हैं, बल्कि जनस्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना मरीज की उचित शारीरिक जांच या वैध प्रिस्क्रिप्शन के दवाएं बेच रहे हैं, एक ही पर्चे का बार-बार इस्तेमाल हो रहा है, जेनेरिक दवाओं के नाम पर नकली और घटिया गुणवत्ता की दवाएं सप्लाई की जा रही हैं तथा एआई आधारित फर्जी प्रिस्क्रिप्शन का सहारा लिया जा रहा है। इससे एंटीबायोटिक रेसिस्टेंस (एएमआर) जैसे गंभीर स्वास्थ्य संकट बढ़ रहे हैं।
बाजार में गहराती अनियमितता और कॉर्पोरेट छूट का खेल
सीडीएए ने बड़ी ऑनलाइन दवा कंपनियों और कॉर्पोरेट फार्मेसी चेन पर भी तीखा हमला बोला। संगठन का कहना है कि ये प्लेटफॉर्म डीप डिस्काउंट देकर बाजार को बिगाड़ रहे हैं, जिससे छोटे-मोटे स्थानीय केमिस्टों का कारोबार ठप होने का खतरा मंडरा रहा है। देशभर में करीब 5 करोड़ लोगों की आजीविका इस क्षेत्र से जुड़ी हुई है।
प्रधानमंत्री को ज्ञापन, मांगें सख्त
संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ज्ञापन सौंपकर अवैध ऑनलाइन दवा बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और कोविड-19 महामारी के दौरान जारी ई-फार्मेसी अधिसूचना जीएसआर 220(ई) तथा जीएसआर 817(ई) को तुरंत वापस लेने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने इन मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो 20 मई को आंदोलन और तेज होगा।
देशव्यापी आंदोलन की तैयारी, 12.40 लाख से ज्यादा केमिस्ट शामिल
यह बंद ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (एआईओसीडी) के आह्वान पर हो रहा है, जिसमें देशभर के करीब 12.40 लाख दवा विक्रेता, थोक व्यापारी और वितरक शामिल होने वाले हैं। एआईओसीडी ने चरणबद्ध आंदोलन की योजना बनाई है—राज्य स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस, 15 मई से काली पट्टी आंदोलन और 20 मई को 24 घंटे का पूर्ण बंद।
राष्ट्रीय स्तर पर एआईओसीडी के अध्यक्ष जे.एस. शिंदे और महासचिव राजीव सिंघल ने कहा कि यह सिर्फ व्यापार की लड़ाई नहीं, बल्कि मरीजों की सुरक्षा की लड़ाई है। कई राज्यों में केमिस्ट एसोसिएशनों ने पहले ही प्रेस कॉन्फ्रेंस कर समर्थन जताया है। हालांकि, कुछ राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश में कुछ स्प्लिंटर ग्रुप्स ने बंद से दूरी बनाई है, लेकिन असम में सीडीएए ने पूरी ताकत से साथ दिया है।
आम जनता पर क्या असर?
20 मई को दवा दुकानों के बंद रहने से रूटीन दवाओं की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है, हालांकि आपातकालीन दवाएं कुछ क्षेत्रों में उपलब्ध रहेंगी। संगठन ने जनता से अपील की है कि वे इस बंद को समझें और सरकार पर दबाव बनाएं ताकि स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।
केमिस्टों का यह आंदोलन ई-फार्मेसी के तेजी से बढ़ते विस्तार, नियमन की कमी और कॉर्पोरेट प्राइसिंग पॉलिसी के खिलाफ लंबे समय से चले आ रहे असंतोष का परिणाम है। अब देखना यह है कि केंद्र सरकार इन मांगों पर कितनी जल्दी और कितनी गंभीरता से कार्रवाई करती है।




