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असम विधानसभा चुनाव 2026 : जीत का अंतर 724 वोट से 1.19 लाख तक : परिणामों के आंकड़े चौंकाने वाले : एनडीए की ऐतिहासिक जीत, 20-30 साल तक अपराजेय बनी बीजेपी

‘मुस्लिम कांग्रेस’ बनकर रह गई कांग्रेस, 19 में से 18 विधायक मुस्लिम : केवल 22 मुस्लिम विधायक चुने गए

गुवाहाटी, 6 मई : असम विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों ने राज्य की राजनीति में नया अध्याय लिख दिया है। कुल 126 सीटों वाली असम विधानसभा में बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने 102 सीटें जीतकर तीसरी बार सत्ता हासिल की। बीजेपी अकेले 82 सीटों पर काबिज हुई, जबकि सहयोगी बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) और असम गण परिषद (एजीपी) ने 10-10 सीटें जीतीं। कांग्रेस मात्र 19 सीटों पर सिमट गई, एआईयूडीएफ को 2, रायजोर दल को 2 और तृणमूल कांग्रेस को 1 सीट मिली।

जीत के अंतर की अनोखी तस्वीर – औसत अंतर अविश्वसनीय

इस चुनाव में जीत का औसत अंतर बेहद चौंकाने वाला रहा। ज्यादातर सीटों पर भारी अंतर से जीत दर्ज की गई। चार विधानसभा क्षेत्रों में एक लाख से ज्यादा वोटों का अंतर रहा।

जीता का सबसे बड़ा अंतर 9-गौरीपुर सीट

जिनमें से सबसे बड़ा अंतर 9-गौरीपुर सीट में दर्ज किया गया। यहां कांग्रेस के अब्दुस सोबहान अली सरकार ने एआईयूडीएफ प्रत्याशी के निजानुर रहमान को 1,19,097 वोटों के बड़े अंतर से हराया। विजयी कांग्रेस उम्मीदवार को 1,82,971 वोट मिले। जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी एआईयूडीएफ प्रत्याशी को मात्र 63,874 वोट मिले।

सबसे कम अंतर 30-हाजो-सुवालकुची सीट

वहीं जीत का सबसे कम अंतर 30-हाजो-सुवालकुची (एससी) सीट में रहा। जहां एजीपी के प्रकाश चंद्र दास ने कांग्रेस की नंदिता दास को सिर्फ 724 वोटों से हराया। प्रकाश चंद्र दास को 81,699 वोट मिले, जबकि नंदिता दास को 80,975 मिले।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के आधार पर वोट अंतर की विस्तृत जानकारी के अनुसार इस बार के विधानसभा चुनाव में –

5,000 वोटो से कम अंतर → केवल 2 सीटें

5,000–10,000 अंतर → 3 सीटें

25,000–50,000 अंतर → 48 सीटें

50,000–1,00,000 अंतर → 45 सीटें

बड़े अंतर की जीत –

12 जलेश्वर सीट पर कांग्रेस के आफताब उद्दीन मोल्ला ने 1,09,688 वोटों के रिकॉर्ड अंतर से जीत दर्ज की। उनको कुल 1,62,174 वोट मिलने के विपरीत उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी एआईयूडीएफ प्रत्याशी शेख शाह आलम को 52,486 वोट मिले।

58-सामागुड़ी सीट से कांग्रेस उम्मीदवार तंजील हुसैन ने भी रिकॉर्ड 1,08,310 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। तंजील को 1,45,212 वोट मिले, जो कुल मतों का करीब 68% है। उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी बीजेपी प्रत्याशी अनिल सैकिया को 36,902 वोट मिले। तंजील हुसैन ने 2024 के बाई-इलेक्शन में सामागुड़ी सीट पर कांग्रेस टिकट पर पहली बार चुनाव लड़े था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। तंजील हुसैन राज्य के प्रभावशाली कांग्रेस नेता, पूर्व मंत्री तथा धुबरी से लोकसभा सांसद रकीबुल हुसैन के बेटे हैं। मात्र 27 वर्ष की उम्र में वे असम के सबसे युवा विधायक बन गए हैं।

122-अलगापुर-कटलीचेरा जैसी सीटों पर भी एक लाख से ज्यादा अंतर दर्ज किया गया। यहां से कांग्रेस उम्मीदवार जुबैर अनम मजुमदार ने 1,05,448 वोटों के रिकॉर्ड अंतर से जीत दर्ज की। उन्हें कुल 1,45,661 वोट मिलने के विपरीत उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी एजीपी प्रत्याशी जाकिर हुसैन लस्कर को 40,213 वोट मिले। 34 वर्षीय जुबैर अनम मजुमदार असम प्रदेश युवा कांग्रेस के अध्यक्ष हैं और उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा और रिकॉर्ड 1 लाख+ वोटों के अंतर से बड़ी जीत हासिल की।

इसके अलावा बराक घाटी की 114-लखीपुर सीट में बीजेपी के कौशिक राय ने 99,401 वोटों का रिकॉर्ड अंतर बनाया, जो बीजेपी उम्मीदवारों में सबसे बड़ा था।

मुस्लिम मतदाता – 35% आबादी को सिर्फ 22 मुस्लिम विधायक

असम की करीब 35% मुस्लिम आबादी को नए विधानसभा में मात्र 22 मुस्लिम विधायक मिले हैं। कांग्रेस की 19 जीती हुई सीटों में से 18 मुस्लिम उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। कांग्रेस पार्टी ने कुल 20 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया था। मुसलमान उम्मीदवारों की जीत की स्ट्राइक रेट 90% है। अब इसे “मुस्लिम कांग्रेस” की छवि बताया जा रहा है। इस बार के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की ओर से किसी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया गया था।

वहीं एआईयूडीएफ ने 16 मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दिया था और केवल 2 सीटें जीतीं। इसी प्रकार रायजोर दल से एक मुस्लिम उम्मीदवार जीता है।

परिसीमन (Delimitation) 100% सफल – बीजेपी 20-30 साल तक अपराजेय

2023 के परिसीमन ने मुस्लिम-बहुल सीटों की संख्या को 35 से घटाकर 22 कर दिया और आदिवासी-स्वदेशी बहुल क्षेत्रों को मजबूत किया। इसने एनडीए को भारी फायदा पहुंचाया। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने इसे 100% सफल बताया। परिसीमन के बाद 103 सीटें अब स्वदेशी मतदाताओं के फैसले पर निर्भर हैं। जिससे कि इस बार के चुनाव में कांग्रेस और एआईयूडीएफ को भारी नुकसान हुआ है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव बीजेपी को अगले 20-30 साल तक असम में अपराजेय बना सकता है।

कांग्रेस का प्रदर्शन – मुस्लिम बहुल क्षेत्रों तक सीमित

कांग्रेस ने गौरीपुर जैसी सीट पर रिकॉर्ड जीत हासिल की, लेकिन राज्य भर में उसकी सीटें मुख्य रूप से मुस्लिम-बहुल क्षेत्रों तक सिमट गईं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तथा लोकसभा सांसद गौरव गोगोई सहित रिपुन बोरा, मीरा बरठाकुर जैसे बड़े चेहरे भी हार गए। राज्य में विपक्षी गठबंधन कुल 24 सीटों पर सिमट गया।

चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस बार मतदान प्रतिशत भी रिकॉर्ड 85.38% रहा, जिसमें महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा भागीदारी दिखाई।

असम की जनता ने साफ संदेश दिया

बीजेपी-एनडीए की इस भारी जीत ने साबित कर दिया कि परिसीमन और विकास आधारित राजनीति ने राज्य की राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है। विपक्ष अब खुद को “मुस्लिम कांग्रेस” की छवि से बाहर निकालने की रणनीति पर विचार कर रहा है। जबकि चुनावी हैट्रिक लगाते हुए प्रचंड बहुमत के साथ आत्मविश्वास से भरा बीजेपी नीत एनडीए गठबंधन असम में विकास, सुरक्षा और स्वदेशी हितों पर फोकस जारी रखने का संकल्प ले चुका है।

असम विधानसभा चुनाव 2026 के ये आंकड़े न केवल जीत-हार की कहानी बताते हैं, बल्कि आने वाले दशकों की राजनीति की दिशा भी तय करते दिख रहे हैं।

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