शिवसागर में रातभर बढ़ता रहा जलस्तर, राष्ट्रीय राजमार्ग तक पहुंची बाढ़ : प्रशासन ने जारी किया हाई अलर्ट : गौरीसागर से स्टेशन चारिआली तक पानी का कहर : ऐतिहासिक धरोहरों, अस्पताल और हजारों परिवारों पर गहराया संकट
राहत अभियान जारी, लेकिन हर घंटे बदल रहे हालात : प्रशासन ने लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने और अफवाहों से बचने की अपील की

शिवसागर, 21 जुलाई : मंगलवार देर रात से बुधवार तड़के तक शिवसागर जिले में बाढ़ की स्थिति लगातार और गंभीर होती चली गई। रात लगभग 11:45 बजे से लेकर 1:45 बजे तक बढ़ते जलस्तर ने शहर के कई नए इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। जिला प्रशासन पूरी रात हालात पर नजर बनाए रहा, जबकि NDRF, SDRF, भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना की टीमें लगातार राहत एवं बचाव अभियान में जुटी रहीं। कई इलाकों में लोगों को पूरी रात जागकर बितानी पड़ी और तेजी से घरों में घुसते पानी के कारण हजारों परिवार सुरक्षित स्थानों की तलाश में अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए।
स्टेशन चारिआली से जामुना रोड तक तेजी से फैला बाढ़ का पानी
रात करीब 1:30 बजे तक स्टेशन चारिआली से तेजी से प्रवेश कर रहा बाढ़ का पानी जामुना रोड, एएसटीसी तिनाली और आसपास के कई इलाकों तक फैल गया। जलस्तर लगातार बढ़ने से अनेक घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में पानी भर गया। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने लोगों से तत्काल ऊंचे स्थानों पर जाने तथा अनावश्यक रूप से घरों से बाहर नहीं निकलने की अपील की।
लाहोटी पेट्रोल पंप और अस्पताल रोड भी बाढ़ की चपेट में
देर शाम से आधी रात के बीच बाढ़ का पानी अस्पताल रोड स्थित लाहोटी पेट्रोल पंप क्षेत्र तक पहुंच गया। इसके बाद प्रशासन ने पूरे शिवसागर शहर के लिए विशेष सतर्कता जारी करते हुए नागरिकों को सावधान रहने की सलाह दी। अधिकारियों ने चेतावनी दी कि जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और हालात किसी भी समय और अधिक गंभीर हो सकते हैं।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर भी थम गया यातायात
बाढ़ का असर केवल शहर तक सीमित नहीं रहा। गौरीसागर के रानी फ्यूल स्टेशन से हंटोलीचिगा तक चार लेन राष्ट्रीय राजमार्ग जलमग्न हो गया। वहीं बेतबाड़ी-अलीमुर क्षेत्र में भी राष्ट्रीय राजमार्ग पर पानी चढ़ जाने से वाहनों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई। इससे ऊपरी असम के कई हिस्सों के बीच सड़क संपर्क बाधित होने की स्थिति उत्पन्न हो गई और आवागमन पर व्यापक असर पड़ा।
ऐतिहासिक धरोहरों पर लगातार बना हुआ खतरा
डिमौ और अन्य नदियों का जलस्तर बढ़ने से ऐतिहासिक रंगपुर परिसर अब भी पूरी तरह जलमग्न है। तलातल घर के ‘ना-द्वार’, ‘पानी द्वार’ तथा अहोम काल का ऐतिहासिक बारूद भंडार पहले ही पानी में डूब चुके हैं। फिलहाल मुख्य तलातल घर सुरक्षात्मक तटबंध के कारण सुरक्षित है, लेकिन यदि जलस्तर में और वृद्धि होती है तो इस विश्वप्रसिद्ध स्मारक के भी प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। वहीं ग्रेटर जॉयसागर क्षेत्र में फैलते पानी को देखते हुए ऐतिहासिक रंगघर पर भी खतरा लगातार बरकरार है। पुरातात्विक महत्व की इन धरोहरों की सुरक्षा को लेकर स्थानीय लोगों, इतिहासकारों और सांस्कृतिक संगठनों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है।
प्रशासन ने जारी किया हाई अलर्ट, लोगों से सतर्क रहने की अपील
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी संवेदनशील क्षेत्रों के लिए हाई अलर्ट जारी किया है। लोगों से जलमग्न क्षेत्रों में जाने से बचने, बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित स्थानों पर रखने, बिजली के खंभों और टूटे हुए तारों से दूर रहने, प्रशासन एवं आपदा प्रबंधन विभाग के निर्देशों का पालन करने तथा किसी भी प्रकार की अफवाहों पर विश्वास नहीं करने की अपील की गई है। साथ ही किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव दल से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
राहत एवं बचाव अभियान चौबीसों घंटे जारी
बदलते हालात के बीच प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि राहत एवं बचाव अभियान बिना किसी रुकावट के जारी रहेगा। NDRF, SDRF, भारतीय सेना, भारतीय वायुसेना, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की संयुक्त टीमें लगातार प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, राहत सामग्री वितरित करने, चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने, फंसे हुए परिवारों को निकालने तथा पशुधन को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में जुटी हुई हैं।
व्यापार, शिक्षा और सामान्य जनजीवन पूरी तरह प्रभावित
लगातार तीन दिनों से जारी बाढ़ के कारण शिवसागर जिले में सामान्य जनजीवन लगभग ठहर गया है। अधिकांश बाजार बंद हैं, स्कूलों एवं शैक्षणिक संस्थानों की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं, सरकारी कार्यालयों का कामकाज बाधित है और छोटे व्यापारियों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। परिवहन व्यवस्था भी बुरी तरह चरमरा गई है। हजारों लोग राहत शिविरों, तटबंधों और ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं।
विशेषज्ञों ने जताई और अधिक खतरे की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऊपरी क्षेत्रों में वर्षा जारी रही और नदियों का जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा, तो शिवसागर जिले के और भी निचले इलाके प्रभावित हो सकते हैं। विशेष रूप से दरिका, दिसांग और डिमौ नदियों के किनारे बसे क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता बताई जा रही है।
प्राकृतिक आपदा की सबसे कठिन परीक्षा से गुजर रहा है शिवसागर
अपनी समृद्ध अहोम विरासत, ऐतिहासिक स्मारकों और सांस्कृतिक पहचान के लिए प्रसिद्ध शिवसागर आज अभूतपूर्व प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा है। एक ओर हजारों परिवार अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं, तो दूसरी ओर राज्य की अमूल्य ऐतिहासिक धरोहरें भी बाढ़ के गंभीर खतरे से जूझ रही हैं। हालांकि राहत एवं बचाव एजेंसियां दिन-रात पूरी क्षमता के साथ कार्य कर रही हैं, लेकिन लगातार बढ़ता जलस्तर इस चुनौती को और कठिन बना रहा है। ऐसे में आने वाले 24 से 48 घंटे शिवसागर की बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों की दिशा तय करने के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।




