बेलगावी में आरएसएस का तीन दिवसीय राष्ट्रीय मंथन शुरू : शताब्दी वर्ष की समीक्षा, शाखा विस्तार और 2026-27 की संगठनात्मक रणनीति पर चर्चा : सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले और सभी सह-सरकार्यवाहों की मौजूदगी : 11 क्षेत्रों, 46 प्रांतों और 32 संघ-प्रेरित संगठनों के 130 से अधिक प्रतिनिधि शामिल
अप्रैल से जून तक आयोजित प्रशिक्षण वर्गों की रिपोर्ट, जनगणना सहित समसामयिक विषयों, शेष शताब्दी कार्यक्रमों और विजयादशमी 2026 तक के कार्य विस्तार पर केंद्रित बैठक

न्यूज डेस्क, 10 जुलाई : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की वार्षिक अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक शुक्रवार सुबह कर्नाटक के बेलगावी (बेलगाम) में शुरू हुई। संघ की संगठनात्मक कार्यप्रणाली में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाने वाली यह तीन दिवसीय बैठक 10 से 12 जुलाई तक चलेगी। इसमें देशभर में संघ की गतिविधियों, शाखा विस्तार, प्रशिक्षण वर्गों, शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों और आगामी संगठनात्मक कार्ययोजना पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जा रहा है।
बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत, सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले, सभी सह-सरकार्यवाह, अखिल भारतीय कार्य विभागों के प्रमुख एवं सह-प्रमुख, अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य, क्षेत्र प्रचारक, सह-क्षेत्र प्रचारक, प्रांत प्रचारक तथा सह-प्रांत प्रचारक उपस्थित हैं। संघ की संरचना के अनुसार देश के सभी 11 क्षेत्रों और 46 प्रांतों के प्रतिनिधि इसमें भाग ले रहे हैं। इसके अतिरिक्त संघ से प्रेरित 32 विभिन्न संगठनों के अखिल भारतीय संगठन मंत्री भी बैठक में शामिल हुए हैं। आधिकारिक सूचना और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार बैठक में कुल प्रतिनिधियों की संख्या 130 से अधिक बताई गई है।

संत मीरा स्कूल में मुख्य बैठक, तीन स्थानों पर व्यवस्थाएं
बेलगावी में बैठक से संबंधित गतिविधियों के लिए तीन प्रमुख स्थानों का उपयोग किया जा रहा है। मुख्य विचार-विमर्श अंगोल स्थित संत मीरा स्कूल परिसर में हो रहा है, जबकि शास्त्री नगर स्थित संघ कार्यालय और उद्योगबाग क्षेत्र के फाउंड्री क्लस्टर में भी आवासीय तथा अन्य संगठनात्मक व्यवस्थाएं की गई हैं। मुख्य बैठक स्थल पर प्रवेश केवल आमंत्रित प्रतिनिधियों तक सीमित रखा गया है और आम लोगों के प्रवेश पर रोक है।
बैठक शुरू होने से एक दिन पहले गुरुवार को वरिष्ठ पदाधिकारियों और स्थानीय व्यवस्थापकों की तैयारी बैठकें हुईं। इनमें प्रतिनिधियों के आवास, भोजन, परिवहन, सुरक्षा और बैठक संचालन से संबंधित अंतिम तैयारियों की समीक्षा की गई। शुक्रवार सुबह निर्धारित संगठनात्मक पद्धति के अनुसार बैठक के औपचारिक सत्र प्रारंभ हुए।
डॉ. मोहन भागवत 6 जुलाई को ही पहुंचे बेलगावी
सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत बैठक से चार दिन पहले, 6 जुलाई को बेलगावी पहुंच गए थे। स्थानीय कार्यक्रमों और बैठक की तैयारियों को ध्यान में रखते हुए उनका शहर में लगभग आठ दिन का प्रवास निर्धारित बताया गया है। सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले तथा सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल, सी.आर. मुकुंद, अरुण कुमार, रामदत्त, आलोक कुमार और अतुल लिमये सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी भी बैठक शुरू होने से पहले बेलगावी पहुंच गए थे।
कड़ी सुरक्षा, नौ दिनों के लिए ‘नो-फ्लाई जोन’
शीर्ष संघ नेतृत्व की उपस्थिति को देखते हुए बेलगावी में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए हैं। बैठक स्थलों के आसपास पुलिस की तैनाती बढ़ाई गई है और प्रवेश बिंदुओं पर पहचान तथा अनुमति की जांच की जा रही है। स्थानीय प्रशासन ने डॉ. मोहन भागवत के प्रवास के दौरान सुरक्षा कारणों से संबंधित क्षेत्रों में नौ दिनों के लिए ड्रोन और अन्य निम्न ऊंचाई वाले उड़ान उपकरणों पर रोक लगाते हुए ‘नो-फ्लाई जोन’ घोषित किया है।
मार्च की प्रतिनिधि सभा के बाद पहली बड़ी समीक्षा बैठक
यह बैठक मार्च 2026 में हरियाणा के समालखा में आयोजित अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के बाद होने वाली प्रमुख राष्ट्रीय संगठनात्मक समीक्षा है। प्रतिनिधि सभा में तय वार्षिक कार्ययोजना को अप्रैल, मई और जून के दौरान विभिन्न प्रांतों, क्षेत्रों और शाखाओं तक पहुंचाया गया था। अब बेलगावी बैठक में उसके क्रियान्वयन, प्रगति, स्थानीय अनुभवों और सामने आई चुनौतियों की समीक्षा की जा रही है।
प्रांत प्रचारक अपने-अपने क्षेत्रों में शाखाओं की स्थिति, संगठनात्मक विस्तार, स्वयंसेवकों की भागीदारी, संपर्क गतिविधियों और सेवा कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। बैठक में केवल संख्या आधारित समीक्षा नहीं, बल्कि विभिन्न राज्यों की सामाजिक परिस्थितियों और संगठनात्मक आवश्यकताओं के आधार पर आगे की कार्यपद्धति तय किए जाने की संभावना है।
अप्रैल से जून तक चले प्रशिक्षण वर्गों की विस्तृत रिपोर्ट
मार्च की प्रतिनिधि सभा के बाद अप्रैल, मई और जून में देशभर में संघ के विभिन्न स्तरों के प्रशिक्षण वर्ग आयोजित किए गए। इन वर्गों में स्वयंसेवकों को शाखा संचालन, शारीरिक एवं बौद्धिक प्रशिक्षण, संगठन निर्माण, समाज संपर्क, सेवा गतिविधियों और स्थानीय नेतृत्व से जुड़े विषयों का प्रशिक्षण दिया गया।
बेलगावी बैठक में इन प्रशिक्षण वर्गों में स्वयंसेवकों की भागीदारी, पाठ्यक्रम, प्रशिक्षण की गुणवत्ता, प्रांतवार अनुभव तथा प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं की भावी जिम्मेदारियों पर विस्तृत चर्चा की जा रही है। प्रशिक्षण प्राप्त स्वयंसेवकों को नियमित शाखाओं, नई शाखाओं और शताब्दी वर्ष के जनसंपर्क अभियानों में सक्रिय भूमिका देने की योजना पर भी विचार किया जाएगा।

शाखा स्तर तक वार्षिक कार्ययोजना पहुंचाने पर जोर
बैठक का एक प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर तय कार्यक्रमों को शाखा स्तर तक प्रभावी ढंग से लागू करना है। संघ की सबसे बुनियादी इकाई शाखा मानी जाती है, इसलिए संगठन का जोर इस बात पर है कि राष्ट्रीय और प्रांतीय योजनाएं केवल बैठकों या घोषणाओं तक सीमित न रहें, बल्कि स्थानीय स्वयंसेवकों और समाज तक पहुंचें।
प्रांत प्रचारकों से उनके क्षेत्रों में नियमित शाखाओं, साप्ताहिक मिलन, मासिक मंडलियों और संपर्क गतिविधियों की स्थिति पर जानकारी ली जाएगी। जहां नियमित शाखाएं शुरू करना तत्काल संभव नहीं है, वहां वैकल्पिक संपर्क कार्यक्रमों के जरिए संगठनात्मक उपस्थिति बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है।
शताब्दी वर्ष के विस्तार अभियान की समीक्षा
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने वर्ष 2025-26 को अपनी स्थापना के सौ वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में शताब्दी वर्ष के रूप में चिह्नित किया है। बैठक में शताब्दी वर्ष के दौरान शाखा और संगठन विस्तार के लिए किए गए प्रयासों की समीक्षा प्रमुख एजेंडे में शामिल है।
देश के कितने नए गांवों, नगरों, बस्तियों, शैक्षणिक संस्थानों और सामाजिक क्षेत्रों तक संघ का संपर्क पहुंचा, कितनी नई शाखाएं या मिलन प्रारंभ हुए और नए स्वयंसेवकों को किस प्रकार नियमित गतिविधियों से जोड़ा गया—इन विषयों पर प्रांतवार रिपोर्टों के आधार पर चर्चा होगी।
बैठक में अभी तक हुए विस्तार के साथ आगे अधिकतम शाखा विस्तार की योजना तैयार करने पर भी मंथन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल शाखाओं की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें नियमित, सक्रिय और स्थानीय समाज से जुड़ा बनाना बताया गया है।
विजयादशमी 2026 तक चलेंगे शताब्दी वर्ष के शेष कार्यक्रम
संघ की आधिकारिक जानकारी के अनुसार शताब्दी वर्ष 2025-26 के शेष कार्यक्रम आगामी विजयादशमी, 20 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेंगे। बैठक में अब तक पूर्ण हो चुके कार्यक्रमों की समीक्षा के साथ शेष कार्यक्रमों की समयबद्ध योजना तैयार की जाएगी।
शताब्दी वर्ष के दौरान संगठन ने समाज के व्यापक वर्गों तक पहुंच बनाने, स्थानीय स्तर पर संवाद बढ़ाने और स्वयंसेवकों की सामाजिक भागीदारी मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया है। बैठक में यह भी देखा जाएगा कि किन कार्यक्रमों को विजयादशमी तक पूरा करना है और कौन-सी गतिविधियां शताब्दी वर्ष समाप्त होने के बाद भी नियमित रूप से जारी रखी जाएंगी।
सामाजिक समरसता से नागरिक कर्तव्य तक व्यापक विषय
शताब्दी वर्ष के संदर्भ में संघ की गतिविधियों में सामाजिक समरसता, परिवारों में संवाद और संस्कार, पर्यावरण संरक्षण, स्वदेशी जीवनशैली तथा नागरिक कर्तव्य जैसे विषय प्रमुख रहे हैं। विभिन्न प्रांतों से मिले अनुभवों के आधार पर इन विषयों पर चलाए गए कार्यक्रमों की प्रभावशीलता और समाज की प्रतिक्रिया का आकलन किया जाएगा।
ग्रामीण क्षेत्रों, जनजातीय इलाकों, सीमावर्ती जिलों, नगरीय बस्तियों और युवाओं के बीच संगठनात्मक संपर्क बढ़ाने की अलग-अलग कार्यपद्धतियों पर भी चर्चा होने की संभावना है। महिला सहभागिता, परिवार आधारित संपर्क, शिक्षण संस्थानों से संवाद और सेवा बस्तियों में कार्य विस्तार के अनुभव भी संघ-प्रेरित संगठनों के प्रतिनिधियों द्वारा साझा किए जा सकते हैं।
जनगणना सहित समसामयिक राष्ट्रीय विषयों पर संवाद
संघ की आधिकारिक घोषणा में कहा गया है कि बैठक में प्रचारक वर्तमान परिस्थितियों से जुड़े अनुभवों और जनगणना जैसे महत्वपूर्ण समसामयिक विषयों पर भी विचार-विमर्श करेंगे।
इसके अलावा कुछ अन्य राष्ट्रीय और सामाजिक विषयों के बैठक में उठने की संभावना है, लेकिन संघ ने अपने घोषित एजेंडे में संगठनात्मक समीक्षा, प्रशिक्षण, शाखा विस्तार, शताब्दी कार्यक्रम, प्रवास योजना और समसामयिक विषयों के अलावा किसी अन्य मुद्दे की औपचारिक पुष्टि नहीं की है।
डॉ. मोहन भागवत के 2026-27 के प्रवास की रूपरेखा
बैठक में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत के 2026-27 के देशव्यापी प्रवास कार्यक्रम पर भी चर्चा होगी। उनके प्रवास विभिन्न प्रांतों में संगठनात्मक बैठकों, स्वयंसेवक संवाद, सामाजिक संस्थाओं से संपर्क और सार्वजनिक कार्यक्रमों के आधार पर तय किए जाते हैं।
प्रांतों से प्राप्त प्रस्तावों और संगठन की प्राथमिकताओं के आधार पर यह निर्धारित किया जाएगा कि डॉ. भागवत आगामी वर्ष में किन क्षेत्रों का दौरा करेंगे और किन विषयों पर समाज के अलग-अलग वर्गों से संवाद किया जाएगा। संघ के शीर्ष नेतृत्व के अन्य प्रवासों और क्षेत्रीय बैठकों की रूपरेखा भी इसी समन्वय के तहत तैयार होने की संभावना है।
32 संघ-प्रेरित संगठनों से समन्वय
बैठक में संघ से प्रेरित 32 संगठनों के अखिल भारतीय संगठन मंत्रियों की उपस्थिति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ये संगठन शिक्षा, श्रम, किसान, विद्यार्थी, सेवा, वनवासी समाज, आर्थिक क्षेत्र और अन्य सामाजिक क्षेत्रों में सक्रिय हैं।
इन संगठनों के प्रतिनिधि अपने कार्यक्षेत्र की स्थिति, समाज में उभरती चुनौतियों और संघ के साथ समन्वय के अनुभव साझा करेंगे। हालांकि प्रत्येक संगठन स्वतंत्र रूप से अपने क्षेत्र में काम करता है, लेकिन सामाजिक और राष्ट्रीय विषयों पर परस्पर संवाद तथा कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण में समन्वय की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है।
कर्नाटक में पंजीकरण और पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक विवाद की पृष्ठभूमि
यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे द्वारा संघ के पंजीकरण, कानूनी स्थिति और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इस मुद्दे पर संघ के क्षेत्रीय पदाधिकारी भारतकुमार ने बैठक से पहले बेलगावी में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा था कि वर्तमान कानून संघ के लिए अलग पंजीकरण अनिवार्य नहीं करता और सरकार सभी संगठनों के लिए ऐसा कानून बनाती है तो संघ उसका पालन करेगा।
उन्होंने यह भी दावा किया कि संघ सामान्य जनता, उद्योगपतियों या राजनेताओं से चंदा नहीं मांगता और स्वयंसेवकों द्वारा वर्ष में एक बार दी जाने वाली गुरु दक्षिणा का पूरा हिसाब रखा जाता है। यह विवाद बेलगावी बैठक के राजनीतिक संदर्भ का हिस्सा अवश्य है, लेकिन शुक्रवार शाम तक इसे प्रांत प्रचारक बैठक के आधिकारिक एजेंडे या किसी पारित निर्णय के रूप में घोषित नहीं किया गया था।
तीन दिन के मंथन के बाद सामने आ सकती है आगे की दिशा
शुक्रवार को शुरू हुई बैठक शनिवार और रविवार को भी जारी रहेगी। पहले दिन मुख्य रूप से रिपोर्ट प्रस्तुत करने, प्रांतों के अनुभव साझा करने और घोषित एजेंडे के आधार पर प्रारंभिक समीक्षा किए जाने की जानकारी सामने आई है। शाखा विस्तार की अंतिम योजना, शताब्दी वर्ष के शेष कार्यक्रमों की विस्तृत रूपरेखा और अन्य निर्णय बैठक के अंतिम चरण में स्पष्ट होने की संभावना है।
संघ के शताब्दी वर्ष में बेलगावी बैठक का विशेष महत्व
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना वर्ष 1925 में विजयादशमी के अवसर पर नागपुर में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। संगठन के सौ वर्ष पूरे होने के कारण बेलगावी की यह बैठक सामान्य वार्षिक समीक्षा से आगे बढ़कर अगले चरण की संगठनात्मक दिशा तय करने वाली बैठक मानी जा रही है।
शताब्दी कार्यक्रमों के समापन से पहले अधिकतम शाखा विस्तार, नए क्षेत्रों तक संपर्क, प्रशिक्षित कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी और 2026-27 के प्रवास तथा वार्षिक कार्यक्रमों की योजना इस बैठक को विशेष महत्व देती है। तीन दिनों के विचार-विमर्श के बाद तैयार होने वाली कार्ययोजना के आधार पर आने वाले महीनों में देशभर के प्रांत, जिले और शाखाएं अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाएंगी।




