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SIVASAGARशिवसागर

स्वाभिमानी असमिया के प्रतीक पुरुष लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ को शिवसागर आसू की श्रद्धांजलि

सत्राधिकार डॉ. श्री श्री पीताम्बर देव गोस्वामी को ‘साहित्यरथी रसराज लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ पुरस्कार’ प्रदान

शिवसागर / 1 मई: अखिल शिवसागर जिला छात्र संघ ने गुरुवार शाम शहर केपीएम हॉल में एक गंभीर और संस्कृतिमय समारोह का आयोजन कर वर्ष 2025 का साहित्यरथी रसराज लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ पुरस्कार आउनीआटी सत्र के सत्राधिकार डॉ. श्री श्री पीताम्बर देव गोस्वामी को प्रदान किया। आसू की जिला इकाई द्वारा यह प्रतिष्ठित पुरस्कार 2022 से प्रतिवर्ष असम की भाषा, साहित्य और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले विद्वानों को दिया जाता है।

आसू के जिलाध्यक्ष मानव हजारिका की अध्यक्षता में आयोजित समारोह में आसू के केंद्रीय महासचिव समीरन फुकन मुख्य अतिथि थे। जिला सचिव दीपांकर सैकिया के संचालन में हुए कार्यक्रम में बेजबरुआ परिवार की अरुंधति बेजबरुआ, आसू के सांस्कृतिक सचिव बितोपन शर्मा एवं कार्यकारिणी सदस्य रंगराज महंत विशिष्ट अतिथि के रूप में मंचासिन थे। समारोह की शुरुआत अनुधृति महंत के निर्देशन में राग-रागिनी संगीत प्रशिक्षण केंद्र के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत बोरगीत से हुई।

पुरस्कार ग्रहण कर सत्राधिकार डॉ. पीताम्बर देव गोस्वामी ने कहा कि असमिया साहित्य में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जहां लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ ने हाथ नहीं लगाया हो। कहानी, कविता, उपन्यास, रस-रचना, तत्त्व-चर्चा — साहित्य के जितने भी अंग हैं, उन सभी में उन्होंने योगदान दिया है। इसलिए वे सच्चे सव्यसाची थे। वे सीधे राजनीतिक स्वाधीनता संग्राम में नहीं उतरे, लेकिन उनका अंतर्मन स्वाधीनता के पक्ष में था। उन्होंने माना कि राजनीतिक स्वाधीनता में बाधा आने पर जन्मसिद्ध अधिकार प्रभावित हो सकता है, लेकिन सांस्कृतिक स्वाधीनता में बाधा आने पर आत्मा को ढक दिया जाएगा। इसलिए उन्होंने संस्कृति और साहित्य पर विशेष जोर दिया। बेजबरुआ ने सबसे पहले साहित्य में रस की भरपूर सृष्टि की, इसलिए उन्हें ‘रसराज’ कहा गया। वे साहित्य के रथी थे। यदि उन्होंने सोने-चाँदी की वह राह नहीं दिखाई होती, तो आज हम इस साहित्य-संपदा को नहीं बटोर पाते। उन्होंने आसू को ‘असमिया जाति का अतंद्र प्रहरी’ कहकर धन्यवाद दिया और कहा कि छात्र संघ दिन-रात समाज की सेवा में लगा रहता है।

मुख्य अतिथि समीरन फुकन ने कहा कि लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ ने अपनी चिंता, अपनी लेखनी और अपनी रचनाओं से जाति को मजबूत बनाने का प्रयास किया। शिवसागर और असम का गौरव उनकी रचनाएँ हमारी अमूल्य संपदा हैं। उनकी जीवन-चर्या को हम अनादि-अनंत काल तक जीवित रखेंगे। नई पीढ़ी को उनके आदर्शों पर चलना चाहिए।

समारोह में विशिष्ट सांस्कृतिक कर्मी माखन चंद्र बरा, द्विजेन गोगोई, कवि प्रेम गोगोई, लेखिका दीपाली भट्टाचार्य बरुवा, शिवसागर कॉमर्स कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. सौमारज्योति महंत, शिवसागर गर्ल्स कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. प्रतीम शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार मनोज बरठाकुर, शिवसागर यूनिवर्सिटी के सहयोगी अध्यापक डॉ. उत्पल दत्ता, वरिष्ठ समाजसेवी शंकरलाल अग्रवाल, मारवाड़ी सम्मेलन शिवसागर शाखाध्यक्ष प्रदीप खेमका, श्री मारवाड़ी पंचायत जन दातव्य समिति के सचिव संजय अग्रवाल एवं सह सचिव राजेश कुमार गट्टाणी, मारवाड़ी युवा मंच शिवसागर शाखाध्यक्ष अंकुश केड़िया के अलावा सैकड़ों आसू नेता-कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ असमिया जाति के स्वाभिमान और सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक हैं। ताई-आहोम, वैष्णव सत्र परंपरा और आधुनिक असमिया साहित्य के बीच सेतु बनाने वाले इस महान साहित्यकार को याद करते हुए यह पुरस्कार असम की नई पीढ़ी को उनकी विरासत से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम बन गया है। समारोह में सभी ने लक्ष्मीनाथ बेजबरुआ के आदर्शों पर चलकर असमिया संस्कृति को और समृद्ध करने की प्रतिबद्धता जताई।

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