तेजपुर में भारत-तिब्बत समन्वय संघ की प्रेरणादायी सभा आयोजित : राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक चेतना और तिब्बत की अस्मिता संरक्षण का लिया सामूहिक संकल्प : कैलाश मानसरोवर को बताया सनातन सभ्यता की आत्मा : भगवान भोलेनाथ से आध्यात्मिक धरोहर के संरक्षण की प्रार्थना

तेजपुर, 6 जुलाई : भारत-तिब्बत समन्वय संघ, सोनितपुर द्वारा तेजपुर स्थित हिन्दी विद्यापीठ परिसर में एक प्रेरणादायी एवं सांस्कृतिक चेतना से ओतप्रोत सभा का आयोजन किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रभक्ति, भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों, तिब्बत की प्राचीन आध्यात्मिक विरासत तथा कैलाश मानसरोवर के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम की शुरुआत प्रकृति संरक्षण के संदेश के साथ प्रतीकात्मक रूप से पौधारोपण कर की गई। हालांकि आयोजन का मुख्य उद्देश्य राष्ट्र एवं संस्कृति के प्रति जागरूकता फैलाना तथा भारत-तिब्बत के प्राचीन आध्यात्मिक संबंधों को जन-जन तक पहुंचाने का संदेश देना रहा।

राष्ट्र की एकता और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा का लिया संकल्प
सभा में उपस्थित भारत-तिब्बत समन्वय संघ के पदाधिकारियों, सदस्यों एवं स्थानीय नागरिकों ने सामूहिक रूप से शपथ ग्रहण की। सभी ने राष्ट्र की एकता, अखंडता, भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों तथा तिब्बत की प्राचीन आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया।
उपस्थित लोगों ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों तक राष्ट्रप्रेम, सांस्कृतिक गौरव और भारतीय सभ्यता की महान परंपराओं को पहुंचाना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है और इसके लिए समाज में निरंतर जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।
कैलाश मानसरोवर की महिमा का किया गुणगान, भगवान भोलेनाथ का स्मरण
कार्यक्रम का सबसे भावपूर्ण क्षण तब देखने को मिला, जब उपस्थित सभी सदस्यों ने सामूहिक रूप से भगवान भोलेनाथ का स्मरण करते हुए कैलाश मानसरोवर की महिमा का गुणगान किया और प्रार्थना की।
वक्ताओं ने कहा कि कैलाश मानसरोवर केवल एक पर्वत या तीर्थ स्थल नहीं, बल्कि सनातन सभ्यता की आत्मा, ऋषि-मुनियों की तपोभूमि और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह पवित्र धाम भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य निवास माना जाता है, जहां से आध्यात्मिक चेतना की प्रेरणा संपूर्ण मानवता को मिलती है।

कैलाश मानसरोवर की सहज उपलब्धता और हिमालय क्षेत्र में शांति की प्रार्थना
सभा के दौरान सदस्यों ने परमपिता भगवान भोलेनाथ से प्रार्थना की कि कैलाश मानसरोवर पुनः अपने वास्तविक गौरव के साथ विश्वभर के श्रद्धालुओं के लिए सहज और निर्बाध रूप से सुलभ हो।
इसके साथ ही तिब्बत की विशिष्ट सांस्कृतिक एवं धार्मिक पहचान सुरक्षित रहने तथा पूरे हिमालय क्षेत्र में शांति, सद्भाव और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार की कामना की गई।
भारत-तिब्बत के प्राचीन सांस्कृतिक संबंधों पर डाला प्रकाश
इस अवसर पर वक्ताओं ने भारत और तिब्बत के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि कैलाश मानसरोवर और तिब्बत का विषय केवल किसी भूभाग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की आस्था, इतिहास, अध्यात्म और सांस्कृतिक चेतना से जुड़ा हुआ विषय है।
उन्होंने कहा कि समाज के प्रत्येक वर्ग को अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और जागरूकता बढ़ाने में योगदान देना चाहिए।
गणमान्य लोगों की रही गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में भारत-तिब्बत समन्वय संघ, सोनितपुर के जिला अध्यक्ष राजीव बरुआ, जिला उपाध्यक्ष राजीव जैन, जिला सचिव नवीन अग्रवाल, जिला कोषाध्यक्ष हरिहर ठाकुर, राज कुमार महंत, धनेश्वर दास सहित अनेक सदस्य एवं राष्ट्रप्रेमी नागरिक उपस्थित रहे।
सभा का समापन “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्” और “हर-हर महादेव” के गगनभेदी उद्घोष के साथ हुआ। उपस्थित सभी सदस्यों ने राष्ट्र, संस्कृति, अध्यात्म और मानवता के उत्थान के लिए कार्य करते रहने तथा कैलाश मानसरोवर एवं तिब्बत से जुड़े जनजागरण अभियान को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।




