शिवसागर में पद्मश्री इमरान शाह और साहित्याचार्य नाहेन्द्र पादुन के गीतों पर सात दिवसीय विशेष कार्यशाला का शुभारंभ : नई पीढ़ी तक असम की महान साहित्यिक एवं सांगीतिक धरोहर पहुंचाने की पहल : 100 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
“पराधीन भारत में गीत लिखने और सीखने का उचित माहौल नहीं था, आज नई पीढ़ी के पास अपार अवसर”— साहित्याचार्य नाहेन्द्र पादुन

शिवसागर, 6 जुलाई : असमिया साहित्य और संगीत जगत की दो महान विभूतियों पद्मश्री इमरान शाह और साहित्याचार्य नाहेन्द्र पादुन की अमूल्य गीत-संपदा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से शिवसागर में एक विशेष सात दिवसीय गीत कार्यशाला का शुभारंभ किया गया।
शिवसागर गर्ल्स कॉलेज के सभाकक्ष में आयोजित इस कार्यशाला में विद्यार्थियों को दोनों महान साहित्यकारों द्वारा रचित गीतों से परिचित कराने के साथ उनकी भावनात्मक, सांस्कृतिक और साहित्यिक गहराई को समझाने का प्रयास किया जा रहा है।

कई सांस्कृतिक संस्थाओं के संयुक्त प्रयास से आयोजन
इस सात दिवसीय गीत कार्यशाला का आयोजन शिवसागर गर्ल्स कॉलेज, दिसांगमुख संगीत कलाकेंद्र, पोहर संगीत कलाकेंद्र, आगंतुक और बीनापाणी संगीत महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में किया गया है।
कार्यक्रम का संचालन आयोजन समिति के सचिव संतोष दत्ता और मधुस्मिता चेतिया स्वर्णकार ने किया। समारोह की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुई।
महान साहित्यकारों की रचनाएं नई पीढ़ी तक पहुंचाना सराहनीय पहल : डॉ. प्रतीम शर्मा
शिवसागर गर्ल्स कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रतीम शर्मा ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि असम की दो महान विभूतियों के जीवनकाल में ही उनके गीतों और रचनात्मक योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक पहल है।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी भाषा, संस्कृति और साहित्य से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में आयोजन समिति के अध्यक्ष राजकुमार कनसेंग ने स्वागत भाषण प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत किया।

नई पीढ़ी अपनाएगी तभी मेरी रचनाएं सार्थक होंगी : नाहेन्द्र पादुन
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि साहित्याचार्य नाहेन्द्र पादुन ने अपने संबोधन में जीवन के पुराने अनुभवों और सांस्कृतिक यात्रा को साझा किया।
उन्होंने कहा कि मेरे द्वारा लिखे गए गीत तभी सार्थक होंगे, जब नई पीढ़ी उन्हें समझेगी, सीखेगी और आगे बढ़ाएगी।
उन्होंने अपने संघर्षपूर्ण समय को याद करते हुए कहा कि हमने पराधीन भारत में जन्म लिया था। उस समय गीत लिखने और सीखने के लिए आज जैसी सुविधाएं और उचित वातावरण उपलब्ध नहीं था।
तकनीक ने नई पीढ़ी के लिए खोले अवसरों के द्वार
साहित्याचार्य नाहेन्द्र पादुन ने कहा कि आज विज्ञान और तकनीक के विकास के कारण विद्यार्थियों के सामने गीत, संगीत, नृत्य, नाटक और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के अनेक अवसर उपलब्ध हैं।
पुराने दिनों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को उस समय डॉ. भूपेन हजारिका, तफज्जुल अली और बीरेन्द्र नाथ दत्त जैसे प्रसिद्ध गीतकारों और कलाकारों के गीत सुनने का भी पर्याप्त अवसर नहीं मिलता था।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद ग्रामीण क्षेत्रों के संस्कृति प्रेमी युवाओं ने स्वयं गीत लिखकर और गाकर अपनी रचनात्मक यात्रा को आगे बढ़ाया।
पद्मश्री इमरान शाह और नाहेन्द्र पादुन के गीत संग्रह ‘गीत’ का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान दोनों महान साहित्यकारों के चयनित गीतों की पुस्तक ‘गीत’ का औपचारिक विमोचन प्रसिद्ध शोधकर्ता एवं कलाकार डॉ. अनिल सैकिया द्वारा किया गया।
विमोचन भाषण में डॉ. सैकिया ने पद्मश्री इमरान शाह के साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इमरान शाह ने प्रकृति, मानव जीवन और देशप्रेम जैसे विषयों पर आधारित अनेक महत्वपूर्ण गीतों की रचना कर असमिया साहित्य और संस्कृति को समृद्ध किया है।

93 वर्ष की उम्र में भी साहित्य साधना प्रेरणादायक : डॉ. अनिल सैकिया
डॉ. अनिल सैकिया ने बताया कि इमरान शाह ने ईशान दत्त, अनिमेष बरुआ, अनामिका बरुआ और कुंभकर्ण जैसे छद्म नामों से गीत, कविता और कहानियां लिखकर असमिया भाषा-साहित्य को नई ऊंचाइयां दी हैं।
उन्होंने कहा कि 93 वर्ष की उम्र में भी इमरान शाह का निरंतर साहित्य साधना में सक्रिय रहना पूरे असमिया समाज के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।
नाहेन्द्र पादुन के गीतों पर हुई विशेष समीक्षा
कार्यक्रम में सांस्कृतिक निदेशालय के सेवानिवृत्त निदेशक डॉ. पवित्र कुमार पेगू ने साहित्याचार्य नाहेन्द्र पादुन द्वारा रचित गीतों पर विस्तार से समीक्षा प्रस्तुत की।
उन्होंने उनके गीतों में मौजूद सामाजिक चेतना, मानवीय भावनाओं और सांस्कृतिक मूल्यों को महत्वपूर्ण बताया।
100 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया प्रशिक्षण में हिस्सा
कार्यशाला का औपचारिक उद्घाटन शिवसागर जिले के सांस्कृतिक विकास अधिकारी निलोत्पल राजकोंवर ने किया।
इस अवसर पर शिवसागर जिला साहित्य सभा के पूर्व अध्यक्ष योग गोगोई विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
उद्घाटन समारोह के बाद दोपहर करीब 1 बजे से गीत प्रशिक्षण सत्र शुरू हुआ, जिसमें 100 से अधिक विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
प्रशिक्षक प्रबीन हजारिका और सुरुज कुमार पातिरी ने विद्यार्थियों को गीतों की प्रस्तुति, भाव और शैली का प्रशिक्षण प्रदान किया।
12 जुलाई को होगा सात दिवसीय कार्यशाला का समापन
आयोजन समिति के कार्यकारी अध्यक्ष मनीरुल इस्लाम बोरा ने बताया कि सात दिवसीय यह गीत कार्यशाला आगामी 12 जुलाई को संपन्न होगी।
उन्होंने कहा कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को असमिया साहित्य, संगीत और महान रचनाकारों की विरासत से जोड़ना है।
कार्यशाला को असम की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।




